इंग्लैंड में भारतीय सैनिक स्मारक के प्रति नफरत पैदा करने वालों की तलाश

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इंग्लैंड के मिडलैंड प्रान्त की पुलिस ने 15 सिख रेजिमेंट के सिपाही की 10 फुट की कांस्य प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने वाले दो लोगों की सीसीटीवी फुटेज जारी की है.

पहले विश्वयुद्ध में हिस्सा लेने वाले दक्षिण एशियाई सैनिकों को समर्पित स्मारक को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करने वाले दो लोगों की सीसीटीवी फोटो इंग्लैंड के मिडलैंड प्रान्त की पुलिस ने जारी की है. विश्व युद्ध की एक सौवीं बरसी पर हाल ही में इस स्मारक “लायंस ऑफ़ ग्रेट वार” (महायुद्ध के सिंह) का अनावरण पूरे सैनिक रस्मो रिवाज़ के साथ किया गया था जिसमें 15 सिख रेजिमेंट के सिपाही की 10 फुट की कांस्य प्रतिमा स्थापित है. कुछ शरारती तत्वों ने अपनी नफरत का प्रदर्शन करते हुए स्मारक की दीवार पर काले पेंट से स्प्रे करते हुये लिखा है ‘नो मोर सिपॉय’ यानि और सिपाही नहीं. नफ़रत भरी इस लिखावट के पीछे उनकी क्या मंशा है?, ये भी अभी समझ नहीं आ सका लेकिन इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों और खासतौर से वहां रह रहे सिख परिवारों और सैन्य जगत से जुड़े लोगों में नाराजगी है.

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इंग्लैंड के मिडलैंड प्रान्त की पुलिस द्वारा जारी दो लोगों की सीसीटीवी फुटेज.

हज़ारों मील दूर इस घटना पर भारत के पंजाब के मुख्यमंत्री और पूर्व सैनिक कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भर्त्सना करते हुए ट्वीट किया और इंग्लेंड की सरकार से इस मामले के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

वहीँ वेस्ट मिडलैंड पुलिस की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहे दो लोगों की तलाश है और पुलिस उनसे पूछताछ करना चाहती है. पुलिस ने इसके लिए जन सहयोग माँगा है और सूचना देने के लिए फोन नम्बर भी जारी किया है. वेस्ट मिडलैंड पुलिस का कहना है कि उसके अधिकारी इस घटना को नस्ली उकसावे वाला अपराध मानते हैं.

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15 सिख रेजिमेंट के सिपाही की 10 फुट की कांस्य की स्थापित प्रतिमा पर ढका केसरी रंग का कपड़ा हटाने की रस्म की तस्वीर.

सैंडवैल काउंसिल क्षेत्र के हाई स्ट्रीट और टोलहाउस वे के बीच स्मेथविक में बने इस स्मारक ‘लायंस ऑफ़ ग्रेट वॉर’ (Lions of Great War) का अनावरण चार नवम्बर को हुआ था. इस कार्यक्रम में 15 सिख रेजिमेंट के सिपाही की 10 फुट की कांस्य की स्थापित प्रतिमा पर ढका केसरी रंग का कपड़ा हटाने की रस्म की तस्वीरें और सोशल मीडिया पर वीडियो खूब वायरल हुआ था. रिटायर्ड और सेवारत सैन्य व पुलिस अधिकारियों के अलावा इस शानदार कार्यक्रम में स्थानीय अधिकारियों के साथ साथ वहां लेबर पार्टी की सांसद प्रीत कौर गिल भी उपस्थित थीं जो इंग्लेंड की पहली सिख महिला सांसद हैं. ‘महायुद्ध के सिंह’ स्मारक के लिए स्मेथविक के गुरु नानक गुरुद्वारे की तरफ से 20 हज़ार पाउंड की राशि दी गई थी जबकि जगह आदि का बन्दोबस्त सैंडवैल काउंसिल ने किया है. रविवार को यहाँ स्मृति कार्यक्रम के आयोजन से कुछ घंटे पहले ही इस वारदात को अंजाम दिया गया.

सैंडवैल पुलिस के अधीक्षक मार्टिन हरकोम्ब का कहना है कि हम इस पूरे मामले पर नज़र रख रहे हैं और इसके लिए सिखों और गुरु नानक देव गुरुद्वारा प्रबन्धन कमेटी से लगातार सम्पर्क में, साथ ही इस समुदाय की चिंताओं से अवगत हैं. इस क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी भी बढ़ा दी गई है ताकि लोगों का भरोसा कायम रहे और उनकी चिंता को तुरंत दूर किया जा सके.

पुलिस सुपरिंटेंडेंट मार्टिन हरकोम्ब ने कहा, ‘ जो हुआ उसके पीछे के कारण जानने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की शिनाख्त करने के लिए काम जारी है और मैं अपील करता हूँ कि जो कोई सीसीटीवी में दिखाई दे रहे लोगों को पहचान सकता है वो हमसे जल्द से जल्द सम्पर्क करें’.

वैसे इस घटना को इंग्लैण्ड और पश्चिमी देशों में सिखों पर नस्ली हमले के सिलसिले का ही हिस्सा माना जा रहा है. सिखों की वेशभूषा के प्रति सही ज्ञान की कमी की वजह से भी वहां के लोग गलतफहमी का शिकार होकर प्रतिक्रिया भी करते हैं. ऐसे में तस्वीरों और प्रतिमाओं में हथियारों का प्रदर्शन गलतफहमी बढ़ाता है. सोशल मीडिया के प्रभाव की वजह से इस तरह की नकारात्मक सोच से भरी बातें हालात को और खराब कर रही हैं.

स्मारक पर काले स्प्रे पेंट से एक जगह पर किसी ने 1 jarnoil भी उन्हीं शरारती तत्वों में से किसी ने लिखा है. सम्भवत: नफरत दिखाकर ये शब्द लिखने वाला प्रतिमा की वेशभूषा को खालिस्तान समर्थक उस आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाला की वेशभूषा से जोड़कर देख रहा होगा जो 1984 में अमृतसर में गोल्डन टेम्पल में किये गये आपरेशन ब्लू स्टार में भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों मारा गया था – कुछ लोग ऐसा भी अंदाजा लगा रहे हैं.

1914 से 1918 के बीच चले पहले विश्व युद्ध में भारत से गये 74 हज़ार से ज्यादा सैनिकों ने प्राण गंवाए थे और उनकी स्मृति में भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था.