करगिल के 20 साल : दिल्ली से द्रास तक विजय मशाल

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रक्षा मंत्री ने दिल्ली में नेशनल वार मेमोरियल पर विजय मशाल भारतीय सेना को सौंपी.

भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने करगिल युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ विजय की प्रतीक विजय मशाल को दिल्ली से द्रास के लिये रवाना किया. रविवार को यहाँ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में रोशन की गई विजय मशाल ओलम्पिक निशानेबाज़ जीतू राय को सौंपी गई. इस अवसर पर भारतीय सेना के प्रमुख, जनरल बिपिन रावत, करगिल युद्ध के नायकों में से एक और परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार संजय कुमार भी मौजूद थे.

दिल्ली से द्रास तक की विजय मशाल यात्रा उन कार्यक्रमों का हिस्सा है जो करगिल युद्ध के बीस बरस पूरे होने पर भारत में आयोजित किये जा रहे हैं. विजय मशाल उत्तर भारत के नौ बड़े नगरों और शहरों से होते द्रास पहुंचेगी जहां इसकी यात्रा 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस के मौके पर सम्पन्न होगी. यहाँ विजय मशाल के स्वागत के लिए भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल रावत समेत तमाम बड़े अधिकारी उपस्थित होंगे.

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करगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि.

विजय मशाल को भारतीय सेना के शानदार खिलाड़ी और युद्ध नायक लेकर चलेंगे. इस यात्रा के दौरान रास्ते में भारतीय सैनिक बीस साल पहले करगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए अपने साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. ये सैनिक दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में पाकिस्तान की तरफ से कब्जाई गई अपनी मातृभूमि की चोटियों को मुक्त कराने में शहीद हुए थे.

विजय मशाल की बनावट भारतीय सेना की परम्परा के मुताबिक उन सैनिकों की हिम्मत, वीरत्ता और बलिदान की भावना से प्रेरित है जिन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के खातिर अपना सर्वोच्च न्यौछावर कर दिया. मशाल का ऊपरी हिस्सा ताम्बे, पीतल और लकड़ी का बना है जो शहीद हुए सैनिकों के संकल्प और दृढ़ता का प्रतीक है. धातु वाले ऊपरी हिस्से में अनाम शहीद सैनिक अमर जवान का चित्र उकेरा गया है. मशाल के निचले लकड़ी वाले हिस्से में सुनहरे अक्षरों में करगिल की गौरवशाली विजय के बारे में लिखा गया है.

दिल्ली में रविवार को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय थल सेना की उत्तरी कमान के जीओसी इन चीफ (प्रमुख कमान अधिकारी) लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह और फायर एंड फ्यूरी कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी के अलावा कई अधिकारी और गण्यमान्य लोग मौजूद थे.

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