डल की ताज़गी से लेकर रंग बिरंगी सुरीली शाम की गवाह बनी स्वर्णिम विजय मशाल

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स्वर्णिम विजय वर्ष
लाइट एंड साउंड शो में सेना का पाइप बैंड

स्वर्णिम विजय वर्ष की मशाल के स्वागत में शनिवार सुबह से ही जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में जगह जगह कार्यक्रम शुरू हुए. श्रीनगर के पूर्वी हिस्सों से होते हुए मशाल जब डल लेक पहुँचीं तो इसमें चार चांद लग गये. मोटर साइकिल सवारों के साथ, साइकिलिस्ट और दिव्यांग जन भी पूरे जोश खरोश के साथ जुड़ गये. इसी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए. शाम को बादामी बाग़ कैंट में लाइट एंड साउंड शो के साथ आज के कार्यक्रम का समापन हुआ.

स्वर्णिम विजय वर्ष
श्रीनगर में डल झील के पास पार्क में स्वर्णिम विजय वर्ष मशाल यात्रा के स्वागत में फैशन शो भी हुआ.

शनिवार की सुबह विजय मशाल को चार चिनार ले जाया गया. इस मौके पर कराई गई स्केटिंग में लड़को के साथ लडकियां भी शामिल हुई. इसके बाद मशाल डल लेक इलाके में रैली के साथ यात्रा पर निकली. सुरक्षा का ठीकठाक बन्दोबस्त था. खुली जिप्सी पर मशाल के आगे जहां यातायात पुलिस की मोटरसाइकिल थी वहीं पीछे सेना के बख्तरबंद वाहन भी थे. थोड़ा बहुत ट्रैफिक जाम ज़रूर हुआ लेकिन यात्रा सुचारू रूप से चली.

स्वर्णिम विजय वर्ष मशाल
डल झील पर स्वर्णिम विजय मशाल के स्वागत में रैली

दिलचस्प है कि रास्ते में जो साइकिल सवारों का जत्था मशाल रैली में शामिल हुआ उसका नेतृत्व भारतीय थल सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पाण्डेय की पत्नी कर रही थीं. पहाड़ी सूबे हिमाचल की मूल निवासी श्रीमती पांडेय साइकिलिंग की शौक़ीन हैं और ये उनके व्यायाम का हिस्सा है. साइकिल सवारों में कई तो कश्मीर के रहने वाले राष्ट्रीय स्तर के खिलाडी थे. इस रैली में कई महिलाओं ने भी दिलचस्पी दिखाई और हिस्सा लिया. मशाल रैली फिर सेंट्रल पार्क में रुकी जहां स्कूली बच्चों ने, भारत पाकिस्तान युद्ध में विजय के प्रतीक के तौर पर 1971 की फोरमेशन बनाई.

स्वर्णिम विजय वर्ष मशाल
बादामी बाग कैंट में लाइट एंड साउंड शो के दौरान सेल्फी कार्नर भी बनाया गया.

यहाँ गीत, संगीत और मनोरंजन का शानदार कार्यक्रम हुआ. एक फैशन शो का भी आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में सेना के कुछ अधिकरियों ने भी शिरकत कर युवाओं का हौसला बढ़ाया. गीत, संगीत और कला की दुनिया के उभरते कश्मीरी मूल के कुछ सितारे भी यहाँ मौजूद थे. उन्होंने अपनी कला का जलवा दिखाया और तारीफ में खूब तालियाँ भी बटोरी. जम्मू कश्मीर पुलिस की इकाई टूरिस्ट पुलिस की प्रभारी उपाधीक्षक संदीप कौर (DSP Sandeep Kaur) भी यहाँ मौजूद थीं.

स्वर्णिम विजय वर्ष मशाल
श्रीनगर में स्वर्णिम विजय मशाल यात्रा में शामिल दिव्यांग अपनी ट्राईसाइकिल पर

शाम को बादामी बाग़ कैंट के इबादत-ए- शहादत म्यूजियम में लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया गया. अँधेरे में म्यूजियम की दीवारों रंग बिरंगी रोशनी और संगीत ने यहाँ समां बाँधा. सेना के दो पाइप बैंड ने एक दूसरे से मुकाबला करते हुए लोकप्रिय और देशभक्ति वाले गानों की धुनें बजाई. बैंड टीम के सदस्य अपनी अपनी यूनिट की रंगबिरंगी यूनिफार्म में थे लेकिन अँधेरे ने उनकी पोशाक का आकर्षण बेशक ढांप लिया था. अलबत्ता टोपी से लेकर जूतों तक उनकी पोशाक पर जलते छोटे छोटे एल ई डी बल्बों की लड़ी एक अलग ही किस्म का नजारा पेश कर रही थी. सेना के वरिष्ठ अधिकारी और सैनिकों के परिवार भी इस शो को देखने आये. 1971 के युद्ध पर बनाई गई फिल्म भी यहाँ दिखाई गई. शो देखने के लिए वो पूर्व सैन्य अधिकारी भी आये जो खुद इस लड़ाई का हिस्सा रहे हैं.

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इबादत-ए-शहादत म्यूजियम में लाइट एंड साउंड शो