दिल्ली से बाहर पहली बार भारत ने मनाया 75 वां सेना दिवस

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सेना दिवस
बंगलुरु में 75 वें सेना दिवस पर शौर्य संध्या का आयोजन किया गया.

भारत ने 15 जनवरी 2023 को पहली बार सेना दिवस (army day ) के मुख्य कार्यक्रम का आयोजन राजधानी दिल्ली के बजाय कर्नाटक में किया. वैसे एक दिलचस्प बात ये भी है कि भारत के पहले सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल के एम करियप्पा का ताल्लुक भी कर्नाटक से था. यहां शानदार परेड के लिए काफी लाव लश्कर और अधिकारी दिल्ली से भी गए. 75 वें सेना दिवस पर आज बंगलुरु में हुए मुख्य समारोह को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे ने सम्बोधित किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना दिवस के अवसर पर सेना के सभी कर्मियों, पूर्व-सैनिकों और उनके परिवारों को ट्वीट संदेश के जरिए शुभकामनाएं दी.

असल में भारतीय सेना का गठन तो पहले ही हो गया था लेकिन जनरल पहले भारतीय अधिकारी थे जिन्होंने इसकी कमान सम्भाली. दरअसल वर्ष 1949 की 15 जनवरी ही वो तारीख थी जब जनरल करियप्पा को भारत का सेनाध्यक्ष बनाया गया था. उनसे पहले भारतीय सेना का नेतृत्व ब्रिटिश सैन्य अधिकारी करता था क्योंकि तब भारत पर ब्रिटिश हुकूमत करते थे. जनरल करियप्पा को फील्ड मार्शल का ओहदा भी दिया गया. उनको सेना की कमान ब्रिटिश सेनी अफसर जनरल फ्रांसिस रॉय बुचर ने सौंपी थी.

सेना दिवस
बंगलुरु में 75 वें सेना दिवस पर शौर्य संध्या का आयोजन किया गया.

आज के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कर्नाटक में ये आयोजन कर्नाटक के उन लोगों के प्रति श्रद्धांजलि है जिन्होंने भारत की आज़ादी की खातिर लड़ाई में अपनी जान न्योछावर की. उन्होंने कहा कि ये फील्ड मार्शल करियप्पा को भी श्रद्धांजलि है जो कर्नाटक से संबंधित थे. राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारा देश अगर कुछ ख़ास चीज़ों के बारे में जाना जाता है तो मैं कहूंगा भारतीय सेना उनमें से एक है. रक्षा मंत्री का कहना था कि भारतीय सेना सबसे विश्वसनीय संगठनों में से के है. कुछ भी बड़ी मुसीबत आने पर जब लोगों को पता चलता है कि सेना पहुँच गई है तो उनको इस बात का अहसास हो जाता है कि अब सब कुछ सामान्य हो जाएगा.

सेनाध्यक्ष जनरल पांडे बोले :

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बंगलुरु में 75 वें सेना दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे

इस अवसर पर सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे ने कहा कि उत्तरी सीमा पर हालात सामान्य हैं और सेना ने किसी भी तरह के हालात से निपटने के लिए मजबूती से तैयारी की हुई है. जनरल पांडे ने अग्निपथ योजना भर्ती की तारीफ़ की. उन्होंने कहा कि अग्निवीरों का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है और महिला अग्निवीरों का प्रशिक्षण भी मार्च से शुरू हो जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई :

उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट में कहा, ” “सेना दिवस पर, मैं सेना के सभी कर्मियों, पूर्व-सैनिकों और उनके परिवारों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं. प्रत्येक भारतीय को हमारी सेना पर गर्व है और वे हमेशा हमारे सैनिकों का आभारी रहेंगे. उन्होंने हमेशा हमारे देश को सुरक्षित रखा है और संकट के समय उनकी सेवा के लिए व्यापक रूप से प्रशंसा की जाती है.”

सेना दिवस का इतिहास :

जब भारत देश अंग्रेजों के अधीन था, तभी भारतीय सेना बन गई थी. लेकिन उस वक्त सेना के बड़े अफसर ब्रिटिश अधिकारी ही हुआ करते थे. 1947 में आजादी के बाद भी भारतीय सेना के प्रमुख ब्रिटिश मूल के ही थे. 1949 में आखिरी ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर के जाने के बाद उनकी जगह एक भारतीय ने ली जो लेफ्टिनेंट जनरल एम करियप्पा थे. इस तरह वो जनरल बन कर आजाद भारत के पहले भारतीय सैन्य अधिकारी बने. देश के लिए यह मौका खास होना स्वाभाविक है. इसलिए सेना ने तब से 15 जनवरी को सेना दिवस मानना शुरू किया.

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बंगलुरु में 75 वें सेना दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की आज़ादी की खातिर लड़ाई में अपनी जान न्योछावर करने वाले जांबाजों के परिवारीजन को सम्मानित किया.

फील्ड मार्शल करियप्पा की उपलब्धियां :

1947 – 48 में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को परास्त करके शानदार जीत हासिल की. पाकिस्तानी सैनिकों को कश्मीर के काफी हिस्से से खदेड़ डाला. 1949 में जब फील्ड मार्शल करियप्पा को सेना प्रमुख बनाया गया तो भारतीय सेना में लगभग 2 लाख सैनिक थे. वर्ष 1953 में फील्ड मार्शल करियप्पा रिटायर हो गए थे. बाद में 1993 में 94 साल की उम्र में उनका निधन हुआ. करियप्पा के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हो चुकी हैं.
1947 में भारत पाकिस्तान का युद्ध ( first india pakistan war ) हुआ तो के एम करियप्पा ने ही भारतीय सेना का नेतृत्व किया था. वहीं दूसरे विश्व युद्ध ( second world war ) में भी करियप्पा शामिल हुए थे. बर्मा में जापानियों को शिकस्त देने के लिए के एम करियप्पा को ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर (OBE) का सम्मान भी मिला था.