दस साल बाद ही सही लेकिन बन गया NSG का इब्राहीमपटनम हब

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हैदराबाद के पास इब्राहिमपटनम में NSG बेस का उद्घाटन केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने किया.

दस साल पहले मुम्बई आतंकवादी हमले के दौरान आपरेशन के लिए, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के विशेषज्ञ और कमांडो दस्ते के दिल्ली के पास हरियाणा के मानेसर बेस से पहुंचने में हुई देरी से सबक लेते हुए देश के और हिस्सों में भी @NSG बेस बनाने का जो विचार आया था, उसे अब अमली जामा पहनाया जा सका है. हैदराबाद के पास इब्राहिमपटनम में ऐसे ही NSG बेस का उद्घाटन केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने किया. 2008 में परिकल्पित इस हब को बनाने का काम शुरू करने में देरी भी गजब की हुई और वो भी 5 साल की, यानि जितना कि भारतीय लोकतंत्र में किसी सरकार का कार्यकाल होता है. सही मायने में इसके निर्माण की कवायद 2013 में शुरू हुई.

200 एकड़ वर्गक्षेत्र में तकरीबन 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से बने इस हब में 300 ब्लैक कैट कमांडो के रहने का बन्दोबस्त है. मकसद ये है कि आतंकवाद के निशाने पर रहने वाले मेट्रो शहर मुम्बई, कोलकाता, हैदराबाद और चेन्नई में जरूरत पड़ने पर एनएसजी कमांडो दस्ते को पहुँचाने में लगने वाला वक्त थोड़ा कम किया जा सके. कुल मिलाकर यूँ कहा जा सकता है कि इस हब के जरिये NSG आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल को कवर करेगी.

ये NSG के चार क्षेत्रीय हब में से एक है जो दक्षिण क्षेत्र का एक सेंटर है. यहाँ कमांडो दस्ते को आतंकवाद जैसी चुनौतीपूर्ण कार्रवाई से निपटने के लिए विश्व स्तरीय प्रशिक्षण देने का इंतज़ाम है. शायद NSG की इन्हीं खूबियों की वजह से तारीफ़ करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि NSG बेहतरीन फोर्सेज में भी बेहतर है. उन्होंने 2019 में एवरेस्ट फतह के लिए जाने वाली इस बल के दल को भी शुभकामनायें दीं.

इस अवसर पर राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के महानिदेशक सुदीप लखटकिया ने बताया कि इस बल के दस्ते अब तक 115 आतंकी हमलों का जवाब दे चुके हैं. इतना ही नहीं NSG ने अपनी कौशल क्षमता में इजाफा करने के मकसद से अमेरिका और फ्रांस की बेहतरीन फोर्सेज के साथ मिलकर संयुक्त अभ्यास भी किये हैं. अब तक ये बल 3 अशोक चक्र , 3 कीर्ति चक्र और 3 ही शौर्य चक्र हासिल कर चुका है. इसके अलावा अब तक मिले 109 पुलिस मेडल भी NSG के दमखम की कहानी बताने के लिए काफी हैं.

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