जनरल रावत ने सीडीएस का कार्यभार सम्भाला, कहा-सियासत से सेना दूर है

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भारत के पहले चीफ आफ डिफेंस स्टारफ (सीडीएस) के रूप में पदभार सम्भालने के बाद पत्रकारों से रूबरू हुए जनरल बिपिन रावत.

भारत के पहले चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में पदभार सम्भालने के बाद पत्रकारों से रूबरू हुए जनरल बिपिन रावत ने कहा कि सेना सियासत से दूर रहती है. जनरल रावत ने कल ही जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को भारत के सेना प्रमुख का कार्यभार सौंपा और इसके बाद सीडीएस का कार्यभार लिया है. चीफ ऑफ स्टाफ के तौर पर जनरल रावत तीनों सेनाओं के बारे में रक्षा मंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार होंगे.

संवाददाताओं के इस सवाल के जवाब में कि कांग्रेस सेना के राजनीतिकरण का आरोप लगा रही है, जनरल रावत ने कहा कि हम सियासत से दूर और बहुत दूर रहते हैं और सत्ताधारी सरकार के निर्देश पर काम करते हैं.

जनरल रावत ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाकर पुष्प चक्र भी चढ़ाया और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की.

जनरल रावत ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने का वादा किया. उन्होंने कहा “सीडीएस को तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने, सशस्त्र बलों को आवंटित संसाधनों का सर्वोत्तम आर्थिक उपयोग सुनिश्चित करने और खरीद प्रक्रिया में एकरूपता लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि सेना, नौसेना और वायु सेना एक टीम के रूप में काम करेगी और सीडीएस इन सब के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा.”

जनरल रावत ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाकर पुष्प चक्र भी चढ़ाया और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की.

सीडीएस के तौर पर सेना को आवंटित बजट का युक्तिसंगत इस्तेमाल सुनिश्चित करने तथा संयुक्त नियोजन और एकीकरण के माध्ययम से तीनों सेनाओं के लिए खरीद, प्रशिक्षण और संचालन में बेहतर समन्वय बनाने में जनरल रावत की बड़ी भूमिका होगी. उन्हें तीनों सेनाओं के लिए रक्षा खरीद योजना तैयार करते समय स्वदेशी हथियारों तथा रक्षा उपकरणों की खरीद को बढ़ावा देने के हरसंभव प्रयास भी करने होंगे.

इससे पहले जनरल रावत ने नयी दिल्ली के साउथ ब्लॉक के लान में तीनों सेनाओं की सलामी गारद का निरीक्षण किया. इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया और सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे भी मौजूद थे. जनरल रावत ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाकर पुष्प चक्र भी चढ़ाया और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की.

जनरल रावत ने नयी दिल्ली के साउथ ब्लॉक के लान में तीनों सेनाओं की सलामी गारद का निरीक्षण किया.

जनरल बिपिन रावत राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, वेलिंगटन स्थित रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज और उच्च कमान राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज के पूर्व छात्र रह चुके हैं. उन्होंने अमेरिका के फोर्ट लीवएनवर्थ से कमान और जनरल स्टाफ विषय की पढ़ाई की है.

सेना में अपने लंबे करियर के दौरान जनरल रावत सेना के पूर्वी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर थल सेना की एक बटालियन का तथा कश्मीर और पूर्वोत्तर में भी सेना की टुकडि़यों का नेतृत्व कर चुके हैं. जनरल रावत ने कांगो गणराज्य में विभिन्न देशों की सेनाओं की एक ब्रिगेड की भी कमान संभाली है. उनके पास सेना की पश्चिमी कमान में कई सैन्य अभियानों के संचालन का अनुभव है. सेना प्रमुख नियुक्त किए जाने के पहले बिपिन रावत सेना के उप प्रमुख के पद पर काम कर चुके थे.

सेना में 41 वर्षों से ज्यादा समय के कामकाज के अनुभव के आधार पर जनरल रावत को उनकी उत्कृट सेवाओं के लिए कई वीरता और अतिविशिष्ट सेवा पदकों से सम्मानित किया जा चुका है.

सीडीएस की वर्दी :

सीडीएस की वर्दी में यह सब होगा.

भारत के चीफ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ की वर्दी धारण करने वाले पहले अधिकारी बिपिन रावत को सेना के तीनों अंगों की एकीकृत कमान ने गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया. क्यूंकि भारत में सीडीएस के ओहदा हाल ही में सृजित किया गया है इसलिए इस पर लगे रैंक और बिल्लों का डिज़ायन भी नया था. वर्दी का रंग तो थल सेना का परम्परागत ऑलिव ग्रीन ही है लेकिन इसके बिल्ले पर वायु सेना और नौसेना के पहचान चिन्हों का समावेश किया गया है.

कौन हैं जनरल बिपिन रावत :

16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी में पैदा हुए बिपिन रावत के पिता लक्ष्मण सिंह रावत भी भारतीय सेना में थे और बतौर लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर हुए थे. जनरल बिपिन रावत ने सेना में 16 दिसम्बर 1978 में उसी 11 गोरखा राइफल्स में कमीशन लिया था जिसमें उनके पिता भी रहे. उन्होंने भारत की थलसेना के 27 वें प्रमुख के तौर पर 31 दिसम्बर 2016 को कार्यभार सम्भाला था.

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