जनरल मनोज चंद्रशेखर पांडे ने भारतीय सेना की कमान संभाली

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जनरल मनोज मुकुंद नरवणे
जनरल मनोज पांडे, परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, ऐड डि कैंप ने जनरल एम एम नरवणे से भारतीयसेना के 29वें सेनाध्यक्ष का पदभार संभाला।

जनरल मनोज पांडे के रूप में भारतीय सेना को अपना 28 वां कमांडर मिल गया है. जनरल मनोज चंद्रशेखर पांडे (manoj chandrashekhar pande) को आज रिटायर हुए 27 वें सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भारतीय सेना की बैटन सौंपी. इसके साथ एक दिलचस्प संयोग और बन गया है. जनरल पांडे के थल सेना का प्रमुख बनने के बाद वर्तमान में सेना के तीनों अंगों के प्रमुख एक ही बैच के हो गए है यानि सेना में भर्ती होते वक्त तीनों एक साथ थे. जनरल पांडे भारत के सेनाध्यक्ष बनने वाले पहले इंजीनियर हैं.

6 मई 1962 को जन्मे जनरल मनोज चंद्रशेखर पांडे मूल रूप से महाराष्ट्र के नागपुर के रहने वाले हैं. वह अभी तक भारतीय सेना के उप प्रमुख थे. उनको इसी साल 1 फरवरी को सेना का उप प्रमुख बनाया गया था. 18 अप्रैल 2022 को मनोज पांडे भारतीय सेना के जनरल नियुक्त किए गए थे.

जनरल मनोज मुकुंद नरवणे
जनरल एम एम नरवणे नए सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे को बेटन सौंपते हुए.

सेनाध्यक्ष के पद पर रहे जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के बाद जनरल मनोज पांडे ही सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं. नेशनल डिफेन्स अकेडमी के छात्र रहे जनरल मनोज पांडे ने दिसंबर 1982 में बॉम्बे सैपर्स (bombay sappers) में कमीशन हासिल किया था जो सेना की इंजीनियर्स कोर की रेजीमेंट है. थल सेना का उप प्रमुख बनाए जाने से पहले बतौर लेफ्टिनेंट जनरल उन्होंने सेना की पूर्वी कमान संभाली थी जो सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में, भारत -चीन के बीच, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी – lac) की निगहबानी करती है. उससे पहले जनरल मनोज पांडे जून 2020 से मई 2021 अंडमान और निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ थे. परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित मनोज पांडे को चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ और जीओसी इन चीफ का प्रशस्ति पत्र भी मिला हुआ है.

सेना की इंजीनियरिंग कोर के मनोज पांडे ने संसद भवन पर 2001 में आतंकवादियों के हमले के बाद जम्मू कश्मीर ऑपरेशन पराक्रम के दौरान पल्लनवाला में इंजीनियर रेजीमेंट की कमान संभाली थी. करगिल युद्ध के दो साल बाद का ही ये वो वक्त था जब भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से तनाव तथा जंग के हालात पैदा हो गए थे.