पत्नी के जाते ही हमेशा के लिए उड़ गया फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह

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मिल्खा सिंह
मिल्खा सिंह : तब और बाद में

वो ज़िन्दगी का असली सिपाही योद्धा था. भारतीय सेना के कैप्टन (ओनारेरी), पद्मश्री, चैम्पियन और भी न जाने कितने सम्बोधनों के साथ पुकारे जाने वाले मिल्खा सिंह को सबसे ज्यादा लोकप्रियता ‘उड़न सिख’ (फ्लाइंग सिख) सम्बोधन के साथ मिली.

मिल्खा सिंह
यह तस्वीर 1958 की है. जब मिल्खा सिंह ने टोक्यो एशियाई खेलों की 200 मीटर रेस में पाकिस्तान के अब्दुल खालिक़ को परास्त किया था.

एक भारतीय फौजी को ये खिताब किसी और ने नहीं बल्कि पड़ोसी से दुश्मन बने मुल्क पाकिस्तान की सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल अयूब खान ने दिया था. वो मौका था जब मिल्खा सिंह ने लाहौर में पाकिस्तान के सबसे तेज़ एथलीट अब्दुल खालिक को रेस में हराया था. तब मिल्खा सिंह को मेडल और पुरस्कार देते हुए फील्ड मार्शल अयूब खान ने कहा था, ‘मिल्खा आज तुम दौड़े नहीं, उड़े हो’. लेकिन शुक्रवार की रात मिल्खा सचमुच में हमेशा के लिए उड़ गया. समय रहा होगा तकरीबन 11 .30 बजे का. स्थान था चंडीगढ़ का पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर). मीडिया को उनके निधन की पुष्टि जाने माने गोल्फर पुत्र जीव मिल्खा सिंह ने की. डैड जस्ट पास्ड अवे (Dad just passed away).

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फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह

कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत 91 वर्षीय ओलम्पियन धावक मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी 85 वर्षीय निर्मल कौर तकरीबन महीने भर से वैश्विक महामारी कोविड 19 के संक्रमण से जूझ रहे थे. रविवार को उनकी पत्नी ने चण्डीगढ़ के पास मोहाली स्थित अस्पताल में इलाज के दौरान प्राण त्याग दिए थे और परिवार इस खालीपन से संभल भी नहीं पाया था कि मुखिया मिल्खा सिंह ने भी प्राण त्याग दिए. आज शाम चंडीगढ़ के सेक्टर 25 स्थित शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा. दोपहर तीन बजे उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शनों के लिए चंडीगढ़ के सेक्टर 8 स्थित उनके निवास पर रखा जाएगा जहाँ उनका परिवार बरसों से रह रहा है.

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मिल्खा सिंह अपनी पत्नी के साथ. फाइल फोटो

मिल्खा सिंह 19 मई को कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आये थे. उन्हें पहले पीजीआई की कोविड यूनिट में इलाज के लिए भर्ती रखा गया था. मिल्खा सिंह की कोविड संक्रमण की जांच रिपोर्ट नेगेटिव भी आ गई थी और उन्हें उस यूनिट से शिफ्ट भी कर दिया गया था लेकिन खतरनाक वायरस उनके अंगों को इतना प्रभावित कर चुका था कि ये अंतर्राष्ट्रीय धावक मौत की लकीर को पार नहीं कर सका.

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पीजीआई की तरफ से उनके निधन पर दिए गए बयान में बताया गया है कि मिल्खा सिंह 3 जून को पीजीआईएमईआर (PGIMER) अस्पताल में भर्ती हुए थे. 13 तारीख तक यहां उनका कोरोना का इलाज चलता रहा. अंततः वह कोरोना नेगेटिव आ गए. हालांकि बाद में पोस्ट कोविड दिक्कत आने की वजह से उन्हें कोविड अस्पताल से मेडिकल ICU में भर्ती कर दिया गया. लेकिन डॉक्टरों की टीम के द्वारा की गई पूरी कोशिशों के बाद भी वह नाज़ुक हालात से बाहर नहीं आ सके और 18 जून की रात 11 .30 बजे वे स्वर्ग सिधार गए.

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