अयोध्या से 850 किलोमीटर कार चलाकर सीकर में रिश्वत वसूलने पहुंचे यूपी पुलिसकर्मी गिरफ्तार

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रिश्वतखोरी के केस में सीकर में गिरफ्तार यूपी पुलिस के कर्मी
रिश्वतखोरी के केस में सीकर में गिरफ्तार यूपी पुलिस के कर्मी
उत्तर प्रदेश की पावन माने जाने वाली राम की नगरी अयोध्या में तैनात एक दारोगा समेत चार पुलिसकर्मियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया है. इनको भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ( anti corruption bureau ) की टीम ने तब धर दबोचा जब यह रिश्वत की रकम वसूलने के बाद कार में सवार हो लौट रहे थे. गिफ्तार पुलिस कर्मियों में एक उपनिरीक्षक यशवंत सिंह हैं और बाकी तीनों सिपाही हैं . उनके नाम  गौरव,सोहन लाल और पवन त्रिपाठी हैं .

गिरफ्तार किए गए चारों पुलिसकर्मी अयोध्या के साइबर थाने में तैनात हैं. वहां काफी अरसा पहले राजस्थान के सीकर के एक युवक के खिलाफ केस दर्ज हुआ था. पुलिसकर्मियों ने रिश्वत लेकर मामले को रफा दफा करने की डील की. बताया जाता है कि सौदा 8 लाख रुपये में तय हुआ. इसमें से 4 लाख रुपये दे भी दिए गए. अब बाकी के  रुपये वसूलने के लिए  पुलिसकर्मी कर में सवार हो सीकर जा पहुंचे. लेकिन 4 लाख की जगह इनको 2 लाख 80 हजार रुपये मिले.

इसी बीच इनके बारे में सूचना  मिलने पर ( जो शायद रिश्वत देने वाले ने दी )  सीकर में एंटी करप्शन ब्यूरो ( एसीबी ) की  टीम ने रास्ते में नाकाबंदी कर ली. उसने मंगलवार दोपहर सीकर-बीकानेर नेशनल हाईवे पर रसीदपुरा टोल पर इनको  रोक लिया. इस  कार्रवाई के दौरान आरोपियों ने अपनी कार से एसीबी टीम की गाड़ी को टक्कर मारकर भागने की भी कोशिश की. तलाशी के दौरान इनके पास से रिश्वत की रकम वसूल हो गई. अयोध्या के साइबर थाने में तैनात इन चारों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर एसीबी का दल ले गया .

सीकर के एसीबी के एएसपी  विजय सिंह ने मीडिया को उपलब्ध कराई सूचना में बताया कि  आरोपी परिवादी से रिश्वत लेने 3 दिन पहले सीकर आए थे.  परिवादी की सूचना पर सीकर एसीबी टीम ने पहले से जाल बिछा रखा था. पूछताछ में  आरोपी अपने कब्जे से बरामद रकम के बारे में बता नहीं पाए.

इस बीच अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर  ने मंगलवार देर शाम यह कार्रवाई करते हुए चारों पुलिसकर्मियों एसआई  यशवंत सिंह, कांस्टेबल पवन कुमार त्रिपाठी, कांस्टेबल सोहन लाल और कांस्टेबल गौरव के निलंबन के आदेश दे दिए. पुलिस का कहना था साइबर अपराध से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान इन पर रिश्वत लेने का आरोप लगा था. प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर चारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.