जैसे कि परम्परा है , नेपाल के राष्ट्रपति ने जनरल सेठ को अपनी आर्मी के जनरल की मानद रैंक से सम्मानित भी किया लेकिन नेपाली नागरिकों की भारतीय सेना में फिर से भर्ती करने जैसे मुद्दे पर कोई आधिकारिक बातचीत की चर्चा नहीं सुनी गई. जनरल धीरज सेठ 17 से 19 अगस्त तक के नेपाल दौरे पर हैं.
नेपाल में जेन जी आन्दोलन ( genz movement in nepal) के बाद प्रधानमंत्री 37 वर्षीय बालेन शाह के नेतृत्व में बनी नई सरकार के गठन के बाद भारत के सेना प्रमुख का वहां जाने का यह पहला मौका है. हालांकि नेपाल ने भारतीय सेना की अग्निपथ योजना के शुरुआत में ही ऐलान कर दिया था कि अपने नागरिकों की अग्निवीर के तौर पर भर्ती को मंज़ूरी नहीं देता . वैसे भारत और ब्रिटेन के अलावा नेपाली नागरिक किसी अन्य देश की सेना में भर्ती नहीं हो सकता .
भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंट्स में ज्यादातर नेपाली मूल के हैं लेकिन बरसों से उनकी भर्ती नहीं हुई . 2019 में कोरोना वायरस संक्रमण से फैली महामारी कोविड -19 के बाद सेना में भर्ती ही बंद थी. इसके बाद 2022 में भारत द्वारा अग्निपथ योजना शुरू किए जाने के बाद नेपाल ने नेपाली युवाओं की भर्ती रोक दी थी. इस योजना के तहत, चार साल बाद 25 प्रतिशत तक रंगरूटों को स्थायी सेवा के लिए रखा जाता है. बाकी 75 प्रतिशत को एकमुश्त भुगतान के साथ सेना की सेवा से मुक्त कर दिया जाता है और उन्हें पेंशन या करियर से जुड़े अन्य दीर्घकालिक फायदे नहीं मिलते हैं.
नेपाली सरकार ने यह दलील देते हुए भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती रोक दी थी कि यह योजना भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच 1947 के त्रिपक्षीय समझौते के प्रावधानों के मुताबिक़ नहीं है .
वहीं नेपाल में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण, कई युवा अभी भी अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में शामिल होने में रुचि रखते हैं . पोखरा रैली में सरकार से अपनी स्थिति पर पुनर्विचार करने और नेपाली युवाओं को भारत सरकार द्वारा शुरू की गई अग्निपथ भर्ती योजना के तहत भारतीय सेना में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की गई.
‘इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल’ द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व सैनिक, उनके परिवार के सदस्य और विदेशी सेनाओं में शामिल होने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके युवा शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने अग्निपथ योजना के तहत नेपाली युवाओं की भर्ती फिर से शुरू करने की मांग करते हुए तख्तियां ले रखी थीं. उन्होंने कहा कि नेपाली युवाओं को खाड़ी देशों में रोजगार तलाशने के लिए मजबूर करने के बजाय ‘अग्निवीर’ के रूप में भारतीय सेना में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए.
सोशल मीडिया पर साझा की गई उनकी प्रमुख मांगों में अग्निपथ भर्ती प्रक्रिया को तुरंत फिर से शुरू करना शामिल था. उन्होंने कहा कि नेपाली युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की रक्षा करने और गोरखा सैनिकों से जुड़ी पहचान और परंपरा को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है. प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि पूर्व सैनिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले और “एक्स-सर्विसमेन” (पूर्व सैनिक) शब्द का उपयोग करने वाले संगठनों के पंजीकरण की प्रक्रिया को न रोका जाए. उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों की गरिमा, अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए ऐसे संगठन आवश्यक हैं. वैसे आयोजकों ने इसे ‘शांति मार्च ‘ कहा है . पोखरा स्टेडियम से जुलूस के तौर पर चले लोग जिला प्रशासन कार्यालय से कास्की के मुख्य जिला अधिकारी के दफ्तर तक गए और उनको एक ज्ञापन सौंपा.










