दिलचस्प है कि उनसे पहले इसी पद पर रहे रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एस एस देसवाल ( ips ss deswal) ने भी अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया था. हरियाणा खेल विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत स्थापित हरियाणा की इस पहली खेल यूनिवर्सिटी को लेकर शुरू से ही विवाद रहा है .
अशोक कुमार की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका डॉ देवेन्द्र सिंह मोर व एक अन्य ने दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि अशोक कुमार की विश्वद्यालय के उप कुलपति पद पर नियुक्ति यूजीसी के उन नियमों ( ugc rules ) का उल्लंघन है जिसके मुताबिक़ विश्विद्यालय के उप कुलपति पद पर जिस व्यक्ति को नियुक्ति किया जाए उसे कम से कम 10 साल का पेशेवर अनुभव होना चाहिए जबकि अशोक कुमार ने तो प्रोफेसर के तौर पर भी कभी सेवा नहीं की और उनके पास तो पीएचडी की डिग्री तक नहीं है .
यह याचिका सुनवाई के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की अदालत में जब आई तो हरियाणा सरकार का तर्क था कि राज्य सरकार के पास यूनिवर्सिटी के उप कुलपति की नियुक्ति की शक्ति है. वहीं याचिकाकर्ता की तरफ से दलील के दौरान सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का उल्लेख किया गया गया जिसमें एक प्रोफेसर को पुडुचेरी के तकनीकी विश्वविद्यालय ( techological university ) के वाइस चांसलर के पद के लिए इसलिए पात्र नहीं माना गया था क्योंकि उसके 10 साल के अनुभव में सिर्फ तीन महीने की कमी थी .
हरियाणा की यह पहली खेल यूनिवर्सिटी ( sports university of haryana ) अप्रैल 2022 में करते समय क्रिकेटर कपिल देव ( cricketer kapil dev) को इसका उप कुलपति बनाया गया था लेकिन कपिल देव ने पद स्वीकार नहीं किया था . इसके बाद 1984 बैच के हरियाणा कैडर के आईपीएस एसएस देसवाल को राई स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर नियुक्त किया गया. श्री देसवाल भारत तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक भी रहे थे . दिसम्बर 2022 में उनको तीन साल के लिए वीसी के पद पर नियुक्त किया गया लेकिन उन्होंने समय पूरा होने से पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया. मार्च 2024 में सरकार ने अशोक कुमार को उप कुलपति बना दिया जो कुछ महीने पहले ही उत्तराखंड के डीजीपी ( dgp uttarakhand ) के पद से रिटायर हुए थे .










