दिल्ली में जंतर मंतर ( jantar mantar) पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के बाद भी 2 अक्टूबर ( शुक्रवार ) को , ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे , की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ था जिसमें आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन ( aisa ) की अध्यक्ष नेहा बोरा , जाने माने वकील और एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण , योगेंद्र यादव एवं विभिन्न छात्र व युवाओं के संगठनों के नेताओं /कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था. हालांकि बाद में उनको रिहा कर दिया गया था. हिरासत में लेते समय इनके साथ ज़बरदस्ती किए जाने , खींचने , दबोचने , घसीटने , दबोचने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे . तीन अक्टूबर को फिर से वहां प्रदर्शन किया गया . इस दौरान पुलिस की कार्रवाई का कई स्वतंत्र पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर्स वीडियो रेकॉर्ड कर रहे थे . पुलिस ने माना है कि उन हालात के दौरान उपरोक्त घटनाएं होने की शिकायत उसको मिली है .
ज़ाहिर सी बात है कि पुलिस अपना दामन साफ़ दिखाने के लिए अपनी किसी भी गलती या ज़ोर जबरदस्ती को छिपाना , उसके साक्ष्य सृजित करने से रोकना या उनको नष्ट कर देना चाहेगी. ऐसे में पुलिसकर्मी अक्सर वीडियो बनाने वालों के मोबाइल फोन , कैमरा आदि सामान छीनते या बंद कराते हैं . इस प्रदर्शन के दौरान भी ऐसा हो रहा था. लेकिन एक शिकायत ऐसी है जिसने दिल्ली में काम करने वाले पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर्स में बेहद रोष पैदा किया है . यह मामला एक स्वतंत्र महिला पत्रकार का है जिनको अपने साथ हुई शर्मनाक करतूत को बताने के लिए सोशल मीडिया पर मदद के लिए तब गुहार लगानी पड़ी जब शनिवार की रात को वे संसद मार्ग थाने में दी गई अपनी शिकायत पर कार्रवाई न होने से परेशान थीं.

महिला पत्रकार का कहना था कि वह विरोध प्रदर्शन के दौरान आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ( aisa president neha bora) को जबरदस्ती हिरासत में लिए जाने के घटनाक्रम को रिकॉर्ड कर रही थीं. महिला पत्रकार ने कहा कि उसी दौरान वहां मौजूद दिल्ली पुलिस के एक सहायक आयुक्त ( assistant commissioner of police ) ने उनको छाती से पकड़ कर दबोचा व धक्का दिया. इस हरकत पर जब महिला पत्रकार ने उस एसीपी से सवाल किया तो उसके पास कोई जवाब नहीं था . फिर वो अधिकारी वहां से चला गया.
अपने साथ हुए इस यौन हमले की शिकायत लेकर महिला पत्रकार संसद मार्ग थाने ( police station parliament street )पर गई लेकिन उस अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई होना तो दूर एफआईआर तक नहीं लिखी गई.
विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए दिल्ली पुलिस की कार्यशैली और महिला पत्रकार के साथ हुई इस घटना की बड़े व्यापक स्तर पर निंदा हो रही है . कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके , सौरभ दास आदि ने दोषी अधिकारी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की है .
प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ( presss club of india) की अध्यक्ष संगीता बरुआ और महासचिव अफज़ल इमाम ने जन्तर मन्तर प्रदर्शन को शुक्रवार और शनिवार को कवर कर रहे पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस के किए गए व्यवहार पर आक्रोश जाहिर किया है . उन्होंने रविवार की सुबह जारी बयान में कहा कि पुलिस ने पत्रकारों के साथ हिंसात्मक व्यवहार ही नहीं किया बल्कि अपना आई कार्ड दिखाने पर भी हिरासत तक में लिए गया. उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में इस तरह का व्यवहार सामान्य नहीं है . पत्रकारों को बिना डरे आजादी के साथ काम करने दिया जाना ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि देश की राजधानी तक में ऐसा होने रोकना देश में मीडिया की स्वतंत्रता के मार्ग के लिए शुभ संकेत नहीं है .
लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ( rahul gandhi ) ने ऐसी घटनाओं की निंदा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है . दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण यहां की पुलिस केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है. लिहाजा राहुल गांधी ने ऐसी घटनाओं के लिए श्री शाह की जवाबदेही बनती है .










