भारत की प्रमुख जांच एजेंसी केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो ( central bureau of investigation ) के सबसे बुरे विवादित दौर के बीच कुछ महीने के लिए सरकार ने नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक के तौर पर एजेंसी के प्रमुख का कार्यभार सौंपा था. उससे पहले ही वे सीबीआई में वर्ष 2016 से प्रतिनियुक्ति पर गए हुए थे और उन्हें वहां ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर तैनाती मिली हुई थी . यह बात 2018 की है . माना जा रहा था कि तब के सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच भ्रष्टाचार के मामले को लेकर खड़े हुए विवाद के मद्देनजर एजेंसी के अस्थाई मुखिया बने श्री राव को इस पद पर बनाए रखा जाएगा लेकिन 103 दिन के कार्यकाल के बाद उन्हें हटाकर सीबीआई से रुखसत कर दिया गया था .
राव तेलंगाना राज्य के वारंगल ज़िले के मंगापेट गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने उस्मानिया यूनिवर्सिटी से पोस्ट-ग्रेजुएशन किया है. श्री राव ने 1986 में आईपीएस में शामिल होने से पहले आईआईटी मद्रास ( iit madras) में रिसर्च शोध कार्य किया था .
एक समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार सियासत में अपनी एंट्री का ऐलान करते वक्त , राव ने कहा कि पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (सार्वजनिक प्रशासन) में उनके अनुभव ने उन्हें यह विश्वास दिलाया है कि भारत का पुनर्निर्माण केवल प्रशासनिक सुधारों तक सीमित नहीं रह सकता. उन्होंने कहा कि देश को अपनी सभ्यतागत जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक विकास की तरफ बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि उनके दल सर्वजन सनातन पार्टी ( एसएसपी ) का ‘सनातन’ का नजरिया पूजा-पद्धति से कहीं आगे है और यह सत्य, धर्म, कर्तव्य, करुणा, न्याय, आत्म-नियंत्रण, प्रकृति, परिवार, समाज और जन-कल्याण पर आधारित जीवन-शैली का प्रतिनिधित्व करता है.
उनका कहना है कि एसएसपी का घोषित विज़न चार मुख्य स्तंभों पर टिका है — शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सभ्यतागत जड़ों से पुनः जुड़ाव.










