सीजेपी विरोध प्रदर्शनों के सभी पहलुओं की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी

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सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी एचपीईसी के प्रमुख होंगे
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी एचपीईसी के प्रमुख होंगे
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (cockroach janta party) के प्रदर्शनकारियों पर  पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में उच्च शक्ति प्राप्त एक ‘पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी’ (  high powered enquiry committee ) का गठन किया है.

कमेटी के सदस्य:

जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी के अलावा, कमेटी में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जस्टिस शलिंदर कौर, केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (central bureau of investigation – CBI) के पूर्व निदेशक  ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व  पुलिस महानिदेशक के डॉ एल.आर. बिश्नोई सदस्य के तौर पर शामिल होंगे.
  ऋषि कुमार शुक्ला भारतीय पुलिस सेवा के 19 83 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं जबकि  डॉ. लज्जा राम बिश्नोई  1991 बैच के असम-मेघालय कैडर के भारतीय पुलिस सेवा रिटायर्ड  अधिकारी हैं.

एचपीईसी के गठन का आदेश सर्वोच्च न्यायाधीश न्यायमूर्ति  सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने 18 अगस्त को पारित किया था और इसे गुरुवार, 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया.

कमेटी क्या करेगी :
कमेटी को सीजेपी  विरोध प्रदर्शनों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर तथ्यों का पता लगाने का काम सौंपा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सिफारिश की है कि एचपीईसी ( HPEC) पुलिस की कथित ज्यादतियों, विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न व छेड़छाड़ के आरोपों की जांच को प्राथमिकता दे.

मुआवजा:
कोर्ट ने कहा कि इसके अलावा, कमेटी  दोनों पक्षों (चाहे पुलिसकर्मी हों या प्रदर्शनकारी) में से घायल हुए लोगों को अंतरिम मुआवजा देने से जुड़े मुद्दों की भी जांच कर सकती है.

कोर्ट ने नोट किया कि याचिकाकर्ताओं (जो प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों को रोकने के लिए गाइडलाइंस की मांग कर रहे थे) और प्रतिवादी-अधिकारियों, दोनों ने ही कमेटी  के दायरे (remit) पर कई सुझाव दिए थे।

समय-समय पर कार्रवाई संभव:

कोर्ट ने कहा कि पैनल का काम एक बार की कवायद नहीं होगी, बल्कि उठाए गए मुद्दों का लगातार और समय-समय पर मूल्यांकन होगा.

कोर्ट ने कहा, ” एचपीईसी समय-समय पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपेगी ताकि यह कोर्ट उचित कदम उठा सके और ज़रूरत के हिसाब से निर्देश जारी कर सके.”

सभी कैमरा फुटेज जमा करें:
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि विरोध प्रदर्शनों की  सीसीटीवी रिकॉर्डिंग (cctv footage) और पुलिस या सुरक्षा कर्मियों के बॉडी कैमरा फुटेज, जिन्हें पहले सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था, उन्हें कमेटी  को सौंप दिया जाए.

गलती करने वाले कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई पर कोई रोक नहीं:
खास बात यह है कि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन प्रदर्शनों और भीड़ नियंत्रण की कार्रवाई के दौरान जिन पुलिसकर्मियों ने गलतियां की है उनके खिलाफ अधिकारी या विभाग अलग विभागीय कार्रवाई कर सकते हैं .

आदेश में कहा गया, “हमारे एचपीईसी  का गठन करना किसी भी तरह से पुलिस अधिकारियों या अन्य सुरक्षा बलों को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से नहीं रोकेगा या वंचित नहीं करेगा, जो अपने आचरण को नियंत्रित करने वाले नियमों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं.”

कोर्ट ने यह आदेश नीट (neet ) और अन्य परीक्षाओं के कथित पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर और बिहार तथा देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की बर्बरता से जुड़ी याचिकाओं पर दिया.

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से पूरे देश के लिए दिशा निर्देशों की मांग की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों की अनुमति हो.

कुछ याचिकाओं में , प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कर्मियों पर हमला करने के आरोपी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई.

जंतर-मंतर के सीजेपी आंदोलन की पृष्ठभूमि:
विरोध प्रदर्शन जून में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के आह्वान पर बार-बार प्रश्न पत्र लीक होने के खिलाफ शुरू हुए थे. इन पेपर लीक के कारण हताश हुए कई अभ्यर्थियों ने आत्महत्या कर ली थी . सीजेपी  ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी, जिन्होंने बाद में इस पद से इस्तीफा दे दिया.

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के शामिल होने और समर्थन में भूख हड़ताल शुरू करने के बाद विरोध प्रदर्शनों ने जोर पकड़ा. वामपंथी पार्टी के छात्र संगठन, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने भी आंदोलन में जोरदार तरीके से हिस्सा लिया. आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन ( all india students association ) की अध्यक्ष नेहा बोरा और अन्य छात्र नेताओं ने आमरण अनशन शुरू किया. बाद में दिल्ली पुलिस ने ,  हाई कोर्ट के एक ऑर्डर की आड़ में ,  सोनम वांगचुक को खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जबरन  विरोध स्थल से हटाकर मेदान्ता  अस्पताल पहुंचाया.  उन्होंने 23 जुलाई की देर रात मेदांता अस्पताल में अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल समाप्त की।

इस बीच,  20 जुलाई को संसद तक “संसद चलो” मार्च निकाल रहे सीजेपी  प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल की रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले दागने और पैलेट गन का इस्तेमाल किया.

आखिरकार धर्मेन्द्र प्रधान ने 25 जुलाई को केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के  पद से इस्तीफा दे दिया और विरोध प्रदर्शन वापस ले लिए गए.

बिहार में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन देखे गए, जहां पुलिस ने वैसी ही कार्रवाई की.  बिहार में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ एक पुलिसकर्मी को एके 47 असॉल्ट राइफल ( AK-47 rifle ) का इस्तेमाल करते हुए भी देखा गया.