समीक्षा बैठक के दौरान, पुलिस आयुक्तों ने थानों के पुनर्गठन, क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र, प्रशासनिक आवश्यकताओं और अन्य संबंधित मुद्दों से जुड़े प्रस्ताव पेश किए. डीजीपी श्री आनन्द ने निर्देश दिया कि थानों (police station ) की सीमाओं का पुनर्गठन करते समय सरकारी आदेशों का सख्ती से पालन किया जाए और साथ ही नगर निकायों, राजस्व डिवीजनों और अदालतों के अधिकार क्षेत्रों को भी ध्यान में रखा जाए.
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजना बनाने पर जोर देते हुए, श्री आनंद ने कहा कि इस प्रक्रिया में शहरी विस्तार, बढ़ती जनसंख्या और बदलती प्रशासनिक ज़रूरतों पर विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि नई क्षेत्रीय सीमाओं को अंतिम रूप देने से पहले सभी संबंधित पक्षों की राय ली जाए.
डीजीपी ने विस्तृत चर्चा के बाद हैदराबाद शहर के कुछ हिस्सों में पुलिस स्टेशन की सीमाओं से जुड़े लंबित विवादों और फील्ड-स्तर के मुद्दों को भी सुलझाया और निर्देश दिया कि सहमत बदलावों को अंतिम प्रस्तावों में शामिल किया जाए.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नए थानों के अधिकार क्षेत्रों को इस तरह से तैयार किया जाना चाहिए कि जनता, सरकारी विभागों और न्यायपालिका को कोई असुविधा न हो और साथ ही सुचारू पुलिसिंग सुनिश्चित हो सके. इस प्रक्रिया के उद्देश्य को दोहराते हुए, आनंद ने कहा कि पुनर्गठन से जन-केंद्रित पुलिसिंग ( public centric policing ) मजबूत होनी चाहिए, प्रशासनिक दक्षता में सुधार और पुलिस सेवाओं की डिलीवरी बेहतर होनी चाहिए.
बैठक में हैदराबाद के पुलिस आयुक्त वीसी सज्जनार, फ्यूचर सिटी के पुलिस आयुक्त तरुण जोशी, साइबराबाद के पुलिस आयुक्त रमेश रेड्डी, मल्काजगिरी की पुलिस आयुक्त सुमति के साथ-साथ संयुक्त आयुक्त और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए.













