भारत पाकिस्तान सीमा पर शहीद बीएसएफ हवलदार नरेंद्र कुमार सिंह हैवानियत का शिकार हुआ

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हवलदार नरेंद्र कुमार सिंह
सीमा सुरक्षा बल (BSF) के शहीद हवलदार नरेंद्र सिंह तोमर की फाइल फोटो.

सीमा सुरक्षा बल (BSF) के शहीद हुए हवलदार नरेंद्र कुमार सिंह का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जब अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया तो हरियाणा के सोनीपत में उनके पैतृक गाँव का माहौल बार बार एक ही सवाल पूछ रहा था… आखिर कब तक? और यही सवाल शहीद हुए नरेंद्र सिंह के जवान बेटे की जुबां पर था.

ये कोई पहली बार नहीं हुआ जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी या सैनिक अपना निर्जीव शरीर वहशीपन के निशानों के साथ लेकर लौटा हो. 1999 में करगिल संघर्ष की शुरुआत में ही लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया के शव के साथ जो बर्बरता की गई, उसके दर्द को कम करने के लिए अब तक कोई मरहम नहीं लगी. कुछ ही महीने बाद उस घटना को बीस साल पूरे हो जायेंगे लेकिन वैसा ही दर्द इसके बाद भी और परिवारों को लगातार मिल रहा है. शहीद हेमराज और मनदीप सिंह का सर धड़ से अलग करने के बाद भी. साल दो साल या चंद महीने बाद ही वैसी दरिंदगी की कहानियों के असल किरदार भारतीय सेना, किसी सुरक्षा बल या पुलिस के जवान बनते रहे हैं.

जम्मू कश्मीर के रामगढ़ सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से हुए हमले जान गंवाने वाले, बीएसएफ के हेड कांस्टेबल नरेंद्र सिंह का शव जिस हालत में मिला उससे ये भी स्पष्ट होता था कि न सिर्फ उन्हें गोलियां मारी गईं बल्कि ज़ख्म तो ये तक इशारा करते हैं कि उनका गला काटने और आंखें तक निकालने की भी कोशिश की गई थी. नरेंद्र सिंह सीमा सुरक्षा बल के उस पेट्रोलिंग पार्टी में थे जो रामगढ सेक्टर में भारत पाकिस्तान के अंतराष्ट्रीय बार्डर पर गश्त कर रही थी. घात लगाकर किए गए हमले के बाद नरेंद्र सिंह का अता-पता नहीं चला और जब भारतीय सुरक्षा कर्मियों ने लापता साथी को खोजने की लिए, नियमों के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों से सीमा क्षेत्र में तलाशी के लिए इजाज़त मांगी तो उसमें भी घंटों लगा दिए गये. साथ ही इस मामले में असहयोग ही दिखाया.

नरेंद्र सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा हुए. फ़ख्र, आंसू, गम और कब तक? वाला प्रश्न चिन्ह वातावरण में फैला हुआ था. जो दिखाई नहीं देता था लेकिन महसूस किया जा सकता था. सिर से पिता और घर के मुखिया का साया अचानक  उठ जाने के सदमे और तकलीफ सह रहा, शहीद नरेंद्र का बड़ा बेटा शहादत पर तो फख्र करता है लेकिन एक बड़ा सवाल भी साथ में करता है, ‘ये हमारे लिय गर्व की बात है क्योंकि हर किसी को तिरंगे का लिबास नसीब नहीं होता लेकिन हम सिर्फ गर्व महसूस करके ही नहीं रह सकते. कल फिर कोई मारा जायेगा. हमें फिर गर्व होगा. हम सरकार से कार्रवाई की मांग करते हैं.’

असल में बीएसएफ के गश्ती दल को मंगलवार की सुबह मैदान में उग आये ऊँचे ऊँचे सरकंडे काटने के लिए बाड़ के आगे जाना पड़ा था. इस दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा बीएसएफ के दल पर पहली बार सुबह 10 बजकर 40 मिनट पर गोली चलाई गई. इस अप्रत्याशित हमले से अफरा तफरी मच गई. इसी दौरान  बीएसएफ का जवान नरेंद्र सिंह लापता हो गया. उसके शव का पता लगाने के लिए दिन भर भारतीय पक्ष की तरफ से, सीमा के दूसरी ओर फोन करने और संवाद के आदान-प्रदान करने का सिलसिला चलता रहा.

इसके बाद कल बुधवार शाम को भारत ने सैन्य अभियान निदेशालय स्तर की वार्ता के दौरान बीएसएफ जवान नरेंद्र सिंह की हत्या को लेकर पाकिस्तान के समक्ष विरोध दर्ज कराया. सेना के सूत्रों का कहना है कि बातचीत के दौरान भारत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ जवान को निशाना बनाकर किए गए संघर्षविराम उल्लंघन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया.