फौजी अफसरों के वेतन – पेंशन में गड़बड़ 6 महीने में ठीक हो : सरकार को कोर्ट का निर्देश

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प्रतीकात्मक तस्वीर

भारतीय सेना के अधिकारियों को मिलने वाले वेतन और पेंशन में गड़बड़ी के लटके मामले पर पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को साफ़ साफ़ कहा है कि इस विसंगति को 6 महीने में दूर किया जाए. इस गड़बड़ी के कारण कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का वेतन और पेंशन जूनियर अधिकारियों से कम भी हो गई है. कुछेक मामले तो ऐसे हैं जिनमें कर्नल रैंक के अफसर को ब्रिगेडियर तो क्या मेजर जनरल रैंक के अफसर से भी ज्यादा वेतन या पेंशन मिल रही है.

अदालत में ये मामला सेवानिवृत्त मेजर जनरल डीएन हसीजा और कुछ अन्य अधिकारियों ने पहुंचाया था जिस पर अब पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश जारी किये हैं. हाई कोर्ट के जस्टिस फतेह दीप सिंह ने छह महीने में इस विसंगति को दूर करने के निर्देश के साथ ये भी कहा कि ऐसी गड़बड़ियां सेना के मनोबल पर भी बुरा असर डालती है.

असल में ये मामला तब का है जब अरुण जेटली रक्षा मंत्री हुआ करते थे और उनके पास वित्त मंत्रालय का भी अतिरिक्त प्रभार था. उन्हीं दिनों में ये गड़बड़ी पकड़ में आ गई थी लेकिन इस पर अंतिम पत्र जारी नहीं हुआ था. तभी से इसे ठीक करने के लिए रक्षा मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और कार्मिक व प्रशिक्षण मंत्रालयों के बीच खतो किताबत ही चल रही थी लेकिन समाधान के लिए अपनाए जाने वाले तरीके पर उनकी सहमति नहीं बन पा रही. सेना के अधिकारी इस गड़बड़ी को दूर करने और समाधान के लिए रक्षा मंत्रालय व वित्त मंत्रालय को भी गुहार लगा चुके हैं.

कुल मिलाकर समस्या ये है कि ब्रिगेडियर रैंक तक के अधिकारी के वेतन में मिलिटरी सर्विस पे (military service pay – msp) में 15500 रूपये का भत्ता जोड़ा गया था. ब्रिगेडियर से ऊपर रैंक के लिए विशेष भत्ते का नियम बदल जाता है लेकिन तरक्की होने पर इस भत्ते को मेजर जनरल और उससे ऊपर के रैंक के वेतन में अलग से नहीं जोड़ा गया. इस कारण जूनियर और सीनियर अधिकारियों के वेतन के साथ साथ पेंशन में भी विसंगतियां पैदा ही गई.