सेना ने हारी पर्बत पर स्वर्णिम विजय मशाल और तिरंगे से समां बाँध दिया

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स्वर्णिम विजय मशाल
स्वर्णिम विजय मशाल

भारतीय सेना पाकिस्तान के साथ 1971 में लड़े गए युद्ध की विजय के पचास साल पूरे होने के मौके पर मनाये जा रहे स्वर्णिम विजय वर्ष के आयोजनों के तहत श्रीनगर का ऐतिहासिक किला हारी पर्बत विजय मशाल की रिले दौड़ का गवाह बना. सादगी से किये गए इस आयोजन में मौजूदगी बेशक चुनिन्दा लोगों की रही लेकिन मशाल लेकर दौड़ने वाले अलग अलग उम्र के और अलग अलग खेलों के उन सितारों की शिरकत ने समां बाँध दिया जो कश्मीरी मूल के हैं.

स्वर्णिम विजय मशाल
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इस दौरान जगह जगह तिरंगों से सजाये गये किले के कुछ हिस्से इस आयोजन में चार चाँद लगा रहे थे लेकिन इस अवसर पर, भारत के पहले ब्लेड रनर एथलीट, रिटायर्ड मेजर डीपी सिंह का न पहुँच पाना थोड़ा निराश कर गया. किन्ही कारणों से उनकी इन आयोजनों में उपस्थिति अब मुश्किल लग रही है.

स्वर्णिम विजय मशाल
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कनाडा में 1988 में हुए 15 वें विंटर ओलंपिक्स, एशियन गेम्स और विश्वस्तरीय विभिन्न स्कींइंग मुकाबलों में भारत की नुमायन्दगी कर चुके गुल मुस्तफा देव ने सबसे पहले हारी पर्बत की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए अगले प्रतिभागी स्पोर्ट्स स्टार को ये मशाल थमाई जो कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से होती हुई श्रीनगर पहुंची है. इस तरह एक एक करके ये खिलाड़ी किले की सीढ़ियाँ चढ़ते चढ़ते एक दूसरे को विजय मशाल थमाते चले गये.

स्वर्णिम विजय मशाल
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सबसे अंत में ताइक्वांडो चैंपियन मंशा बशीर ने विजय मशाल थामी. मंशा उम्र में इन सभी खिलाड़ियों से छोटी भी थीं. अब कश्मीर घाटी में छात्रों को ताइक्वांडो सिखा मंशा कश्मीर के युवाओं के लिए प्रेरणा की एक शानदार मिसाल है. आतंकवादियों ने उनके सर से पिता का साया तब छीन लिया था जब वो सिर्फ चार दिन की थी. श्रीनगर के पुराने इलाके हबाकदल से ताल्लुक रखने वाली मंशा पहली ऐसी कश्मीरी युवती है जिसने भारतीय खेल प्राधिकरण के ज़रिये एनआईएस पूरा किया.

स्वर्णिम विजय मशाल
स्वर्णिम विजय मशाल थामे ताइक्वांडो चैंपियन मंशा बशीर
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स्वर्णिम विजय मशाल थामे ताइक्वांडो चैंपियन मंशा बशीर

मंशा कहती है, ‘इस मशाल को थामकर चलना मेरे लिए गर्व का विषय है और ऐसा मौका देने के लिए मैं दिल से सेना और इसके अधिकारियों को धन्यवाद देती हूँ. स्वर्णिम विजय मशाल लेकर दौड़ने वालों में क्रिकेट खिलाड़ी और कोच बिलाल शम्स भी थे. बिलाल अंडर 14, 16 और 19 टीम के खिलाड़ियों को कोचिंग भी देते हैं.

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यहाँ विजय मशाल को लेकर लोगों में बेहद दिलचस्पी और जज़्बा दिखाई दिया. हर कोई मशाल के करीब आना, उसे छूना या थामना चाहता था. यहाँ तक कि हारी पर्बत पर सुरक्षा और अन्य इंतज़ाम में तैनात केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF सीआरपीएफ) जवान भी इस आयोजन में शामिल होने से खुद को रोक न सके. मशाल और अपने अधिकारी के साथ फोटो खिंचवाकर वे भी बहुत खुश हो रहे थे. विजय मशाल के साथ राष्ट्रीय ध्वज की जुगलबन्दी इस आयोजन के मायने भी साफ़ बता रही थी-देश और तिरंगा सर्वोपरि है.

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स्वर्णिम विजय मशाल थामे सैन्य अफसर