भारत चीन सीमा पर सेनाओं का टकराव टालने का काम अब भी पूरा नहीं हुआ

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भारत चीन सीमा (सांकेतिक फोटो)

लदाख सीमा पर गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों की झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल समेत 20 सैनिकों की जान गये दो महीने बीत चुके हैं, बावजूद इसके दोनों देशों की सेनाओं के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हालात अपेक्षा के मुताबिक़ अभी तक ज़्यादा सुधर नहीं पाये हैं. तब से अब तक विभिन्न स्तर पर सैन्य और राजनयिक बैठकों के सिलिसिले की कड़ी में मंगलवार से बुधवार तक तकरीबन 15 घंटे तक एक और बैठक चली. इसके बाद भारतीय रक्षा मंत्रालय के तरफ से जारी सेना की प्रेस विज्ञप्ति में जो जानकारी दी गई उसका लब्बोलुआब यही था कि भविष्य के टकराव को टालने के लिए दोनों देश तैयार तो हैं लेकिन इस काम को पूरा होने में और वक्त लगेगा.

सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद की तरफ से जारी इस बयान में कहा गया, “दोनों पक्ष पूरी तरह से पीछे हटने के उद्देश्य को लेकर प्रतिबद्ध हैं. प्रक्रिया जटिल है और इसमें लगातार सत्यापन की जरूरत है. दोनों पक्ष इसे राजनयिक और सैन्य स्तर पर नियमित बैठकों के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं”.

भारतीय सीमा क्षेत्र के चुशूल इलाके में 14 जुलाई को चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और भारतीय सेना के कमांडरों के बीच चौथे दौर की बातचीत के लिए बैठक हुई. तकरीबन 15 घंटे चली इस बैठक के बाद भारतीय सेना की तरफ से जारी बयान में बताया गया कि वरिष्ठ कमांडरों ने पहले चरण में सीमा से सेनाओं को पीछे हटाने के लिए हुई बातचीत के कार्यान्वयन पर हुई प्रगति की समीक्षा की. उन्होंने पूरी तरह सीमाओं से सेनाओं को पीछे हटाने के कदमों को सुनिश्चित करने पर चर्चा की.

भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर मौजूदा हालात को दूर करने के लिए स्थापित सैन्य और राजनयिक चैनलों के ज़रिये बातचीत कर रहे हैं. सीमा से सेनाओं को पीछे हटाने के लिए 5 जुलाई को हुई सहमति के मुताबिक़ ही भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई.

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