बर्फीले इलाके में गश्त पर गये 7 भारतीय सैनिक बचाए न जा सके, शव मिले

284
बर्फीले तूफ़ान
बर्फीले तूफ़ान में शहीद हुए भारतीय सैनिक.

आखिर वही हुआ जिसकी आशंका व्यक्त की जा रही थी. बर्फीले तूफ़ान में लापता हुई भारतीय सैनिकों की 7 सदस्यों वाली टुकड़ी में से कोई भी नहीं बचा. अरुणाचल प्रदेश के सीमांत इलाके उनकी खोज खबर के लिए निकले राहत दस्ते को सभी जवान मृत अवस्था में मिले. इनके नाम हैं : हवलदार जुगल किशोर, राइफलमैन अरुण कत्तल, राइफल मैंन अक्षय पठानिया , राइफल मैन विशाल शर्मा , राइफल मैन राकेश सिंह , राइफलमैन अंकेश भारद्वाज और गनर गुरबाज सिंह.

ये हादसा चीन और भूटान के आसपास पश्चिम केमांग (west kemang) क्षेत्र में हिमस्खलन के कारण हुआ. इस इलाके की ऊंचाई 14500 फीट है. सेना के एक अधिकारी ने बताया कि काफी कोशिशों के बावजूद किसी को बचाया नहीं जा सका. उस जगह से मंगलवार को सभी मृत अवस्था में मिले.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी (pm narender modi) और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (rajnath singh) ने इस हादसे पर शोक ज़ाहिर किया है और ट्विटर पर संदेश के तौर पर मृत सैनिकों के परवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है. राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर लिखा है कि अरूणाचल प्रदेश के केमांग सेक्टर में हिमस्खलन की चपेट में आए भारतीय सेना के जवानों के निधन से गहरा पीड़ा हुई है. इन वीर जवानों ने देश की सेवा करते हुए अपने प्राण गंवाए हैं. मैं उनके साहस और सेवा को सलाम करता हूं. उनके शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी दिल से संवेदनाएं हैं.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (president ramnath kovind ) ने चीन के पास की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुए इस हादसे में मृत भारतीय सेना के जवानों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की हैं. उन्होंने कहा कि बर्फीले तूफ़ान में हुए इस हादसे में सैनिकों के प्राण जाने की तकलीफ को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता. बहादुर सैनिकों ने देश सेवा में अपनी जान दी है. इस निस्वार्थ बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा.

सीमा पर जहां हादसा हुआ वहां कुछ दिन से बर्फबारी चल रही थी. सर्दियों के मौसम में ऐसे ऊंचाई वाले बर्फीले इलाकों में गश्त करना चुनौती भरा काम होता है. हालांकि हादसे की सूरत में होने होने वाले नुकसान को रोकने के लिए ये सैनिक प्रशिक्षित और उपकरणों से लैस होते हैं. बावजूद इसके इस तरह की दुखद घटनाएं होती रहती हैं जिनमें सैनिकों की जान तक गईं है और कई की तो खोज खबर ही बहुत दिन बाद मिल सकी है.