दफ्तरों में सफाई और कामकाज का बेहतर माहौल बनाने में जुटा पूर्व सैनिक कल्याण विभाग

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प्रतीकात्मक फोटो
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पूर्व सैनिक कल्याण विभाग ,स्वच्छता को संस्थागत बनाने और सरकारी प्रक्रियाओं में लंबित मामलों में कमी लाने के मकसद को हासिल करने के लिए चलाए जा रहे , भारत सरकार के देशव्यापी विशेष अभियान 6.0 में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहा है.  यह अभियान 2 अक्टूबर से शुरू हुआ यह अभियान 31 अक्टूबर, 2026 तक चलेगा . इसमें  कार्यस्थल की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने और स्वच्छ एवं अधिक टिकाऊ कार्यालय परिवेश को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है.

रक्षा मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़ इस अभियान के तहत,  पूर्व सैनिक कल्याण विभाग ( department of ex-servicemen welfare) और उससे जुड़े तथा उसके अंतर्गत आने वाले कार्यालय , अपने प्रतिष्ठानों में कई तरह की लक्षित गतिविधियां चला रहे हैं:

ई-अपशिष्ट (electronic waste ) प्रबंधन पर ध्यान:

डीईएसडब्ल्यू ई-अपशिष्ट प्रबंधन नियमों ( e waste management rules ) के अनुसार ई-अपशिष्ट को सही तरीके से इकट्ठा करने, वैज्ञानिक तरीके से अलग अलग  करने और ज़िम्मेदारी से निपटाने को प्राथमिकता दे रहा है. यह पहल अपशिष्ट को कीमती संसाधनों में बदलने को प्रोत्साहन देकर ‘अपशिष्ट से धन’ की सोच को बढ़ावा देती है.

स्वच्छता एवं कार्यस्थल उन्नयन:

दफ्तरों और अन्य कार्यस्थलों पर साफ़-सफ़ाई, सुंदरता एवं व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सभी जगहों पर बड़े पैमाने पर सफ़ाई अभियान एवं श्रमदान कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि अधिकारियों और आगंतुकों को साफ़-सुथरा और बेहतर माहौल मिले .

लंबित मामलों में सुव्यवस्थित कमी:

पूर्व-सैनिकों को बेहतर सेवाएं देने के मकसद से, लंबित मामलों (जिनमें शिकायतें एवं संसदीय आश्वासन शामिल हैं) का तेज़ी से निपटारा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित बनाया जा रहा है.

जागरूकता एवं संस्थानीकरण:

डीईएसडब्ल्यू द्वारा स्वच्छता के सिद्धांतों को विभाग के दैनिक कामकाज में शामिल करने के लिए लंबे समय तक चलने वाले उपायों को भी लागू कर रहा है, ताकि अभियान-आधारित पहलों को स्थायी प्रशासनिक प्रथाओं में बदला जा सके.

इन साझा कोशिशों के जरिए , डीईएसडब्ल्यू विशेष अभियान 6.0 के उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्ध है और इसका ध्यान एक साफ-सुथरी, ज्यादा कुशल एवं उत्तरदायी शासन को बढ़ावा देने पर है, जो भारत  के पूर्व-सैनिकों की सेवा के लिए समर्पित है.