रक्षामंत्री राजनाथ सिंह दुनिया के सबसे ऊँचे मैदान-ए-जंग सियाचिन पहुंचे

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भारत का रक्षामंत्री बनने के बाद राजनाथ सिंह ने सियाचिन स्थित स्मारक पर सैन्य रस्मों के मुताबिक पुष्पांजलि अर्पित की.

भारत का रक्षामंत्री बनने के बाद राजनाथ सिंह ने सबसे पहला दौरा उस जगह का किया जिसे दुनिया की सबसे ऊँची रणभूमि कहा जाता है. भारत के लिए सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण, संवेदनशील और सैनिकों के लिए सबसे दुरूह बर्फीला इलाका जहां शरीर के तापमान को कुदरती तौर पर संतुलित रखने की बात सोचना तो बहुत दूर की बात है लगातार स्वाभाविक गतिविधियाँ या सांस तक लेना दूभर है. ये जगह है सियाचिन ग्लेशियर.

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने यहाँ स्थित स्मारक पर सैन्य रस्मों के मुताबिक पुष्पांजलि अर्पित की. इस ग्लेशियर की रक्षा करते हुए भारत के अब तक 1100 सैनिक वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं. इस बात का ज़िक्र करते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट संदेश में कहा कि मुझे सैनिकों के साहस और शौर्य पर बेहद फख्र महसूस हो रहा है. राजनाथ सिंह ने कहा कि देश उन सैनिकों की सेवा और कुर्बानी को हमेशा याद रखेगा. उन्होंने कहा कि तमाम तरह की विपरीत परिस्थितियों के बीच सैनिकों का यहाँ डटे रहना बहुत बड़े साहस का काम है. राजनाथ सिंह ने सियाचिन दौरे के दौरान सैनिकों से भी बातचीत की.

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सियाचिन बेस कैम्प और अग्रिम चौकी का भी दौरा किया. भारतीय सेना के चीफ जनरल बिपिन रावत भी उनके साथ थे. श्रीनगर पहुँचने पर बीबी कैंट में राजनाथ सिंह ने अधिकारियों के साथ जम्मू कश्मीर के सुरक्षा के हालात की समीक्षा भी की. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘मुझे उन माता पिता पर भी फख्र हैं जो अपने बच्चों को सेना में भेजते हैं. मैं उन्हें व्यक्तिगत तौर पर धन्यवाद पत्र भेजूंगा’.

रक्षामंत्री राजनाथ ने एक और ट्वीट में ये भी बताया कि उन्होंने भारतीय वायुसेना के लापता ए एन 32 विमान की तलाश के बारे मार्शल राकेश सिंह भदौरिया से बातचीत की है और विमान और उसमें सवार लोगों का पता लगाने के लिए उठाये गये कदमों की जानकारी ली.

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