फर्जी मुठभेड़ मामले में मेजर जनरल, दो कर्नल समेत सात सैन्यकर्मियों को उम्रकैद

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फर्जी मुठभेड़
प्रतीकात्मक तस्वीर. फोटो : इंस्टाग्राम

असम के डिब्रूगढ जिले के डिंजन में 2 इंफेंट्री माउंटेन डिवीजन में सैन्य अदालत ने 24 साल पुराने एक फर्जी मुठभेड़ के मामले में एक मेजर जनरल समेत सात वरिष्ठ सैन्य कर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. समरी जनरल कोर्ट मार्शल (एसजीसीएम) ने जिन अधिकारियों की सजा सुनाई गई है उनके नाम मेजर जनरल एके लाल, कर्नल थॉमस मैथ्यू, कर्नल आरएस सिबीरेन, कैप्टन दिलीप सिंह, कैप्टन जगदेव सिंह, नायक अलबिंदर सिंह और नायक शिवेंदर सिंह हैं. ये सभी लोग असम के तिनसुकिया जिले में फरवरी 1994 में हुई फर्जी मुठभेड़ में शामिल थे.

इस चर्चित केस को उस समय AASU के उपाध्यक्ष और इस समय भाजपा नेता जगदीश भुइयां ने गुवाहाटी हाईकोर्ट में कानूनी जंग लडी. इस केस की सीबीआई जांच भी हुई. जानकारी के अनुसार 14 फरवरी से 19 फरवरी 1994 के बीच तिनसुकिया जिले की अलग-अलग जगहों से नौ लोगों को उठाया था. इन लोगों को तलप टी एस्टेट स्थित असम फ्रंटियर टी लिमिटेड के जनरल मैनेजर रामेश्वर सिंह की हत्या के शक में पकड़ा गया. जिन युवकों को हिरासत में लिया गया था उनमें से पांच को उल्फा उग्रवादी बताकर फर्जी मुठभेड़ में मार डाला गया. जबकि चार को कुछ दिन बाद छोड़ दिया गया.

मामले में भुइयां ने 22 फरवरी को गुवाहाटी हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर लापता युवकों को पेश करने की मांग की. इसके बाद हाई कोर्ट ने सेना को पकड़े गए सभी नौ युवकों को पेश करने का आदेश दिया. तब सेना ने आल असम स्टूडेंट्स यूनियन ‌(AASU) के पांच कार्यकर्ताओं प्रबीन सोनोवाल, प्रदीप दत्ता, देबाजीत बिस्वास, अखिल सोनोवाल और भाबेन मोरेन के शव नजदीकी ढोल्ला पुलिस थाने में पेश किए. उन्हें उल्फा उग्रवादी बताकर मुठभेड़ में मारे जाने की बात कही. विभिन्न स्तरों पर की गई शिकायतों के आधार पर इस साल 16 जुलाई को कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू हुई और 27 जुलाई को वह पूरी हुई. रविवार को सेना ने इस कार्रवाई की पुष्टि की.