तिहाड़ जेल में रोज़ा रखने वाले हिंदू बंदियों की तादाद तिगुनी हुई

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तिहाड़ जेल
प्रतीकात्मक फोटो

भारत की राजधानी दिल्ली की तिहाड़ जेल के प्रशासन ने इस बार रमज़ान के लिए ख़ास बन्दोबस्त किये हैं जिसमें, कारागार में बाहर से मुस्लिम धर्मगुरुओं को बुलाना, रोज़ा इफ्तार के लिए खजूर और रूह आफज़ा शरबत का इंतजाम करना शामिल है. तिहाड़ ही नहीं दिल्ली की तमाम जेलों की कैंटीन में इनका भरपूर स्टॉक रखा गया है ताकि जो चाहे खरीद सके. रोज़े को देखते हुए रात के खाने के समय में भी उचित बदलाव किया गया है.

दिलचस्प है कि इस बार बड़ी तादाद में मुस्लिम बंदियों के साथ साथ हिन्दू बंदियों ने भी रोज़ा रखा है. जेल के एक अधिकारी के मुताबिक़ ये रुझान न तो पहली बार है और न ही सिर्फ तिहाड़ में है लेकिन इतना ज़रूर है कि इस बार पहले के मुकाबले ज्यादा हिन्दू बंदियों ने रोज़ा रखा है. इसकी वजह वो अपने साथियों के साथ धार्मिक सद्भाव को बताते हैं. पिछले साल यहाँ 50 हिन्दू बंदी रोज़े पर थे लेकिन इस बार की रमजान में इनकी तादाद तिगुनी यानि 150 है.

एक अधिकारी ने पुष्टि करते हुए बताया कि इस दफा रमज़ान शुरू होने से पहले मई के पहले हफ्ते में ही, अलग अलग जेलों में बंद हिन्दू बंदियों ने जेल अधीक्षकों को बता दिया था कि वो मुस्लिम साथियों के साथ रोज़ा रखेंगे. इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने तमाम बन्दोबस्त किये. जेल प्रशासन ने कुछ धार्मिक और कल्याणकारी संस्थाओं को भी इस बार जेल बंदियों के साथ रोज़ा इफ्तार करने की छूट दी है. दिल्ली की जेलों में तकरीबन बंद तकरीबन 16500 बंदियों में मुस्लिम और हिन्दुओं को मिलाकर 2500 से ज्यादा ने इस बार रोज़ा रखा है.

दिलचस्प है कि रमजान के दौरान ही नहीं, बंदियों में ये धार्मिक सद्भाव हाल ही में और पहले भी नौ दिन के हिन्दू नवरात्र उत्सव के दौरान भी दिखाई दिया था जब कई मुसलमान बंदियों ने नवरात्र के व्रत रखे थे. वो भी हिन्दू साथियों के साथ ही वैसे ही खान पान और पूजा में शरीक होते थे. जेल में इस तरह के ट्रेंड के बारे में अधिकारियों का कहना है कि यहाँ आने के बाद कैदियों कि धार्मिक प्रवृत्ति भी जागृत होती है. वो प्रार्थना में विश्वास करने लगते हैं. कईयों को तो लगता है कि प्रार्थना और ईश्वर की भक्ति न सिर्फ उन्हें सही रास्ता दिखाएगी, जेल से जल्दी छूटने की इच्छा भी पूरी करेगी.

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