डॉक्टरों के अनुसार, डीजीपी अनुराग धनकड़ को अस्पताल में मृत हालत में लाया गया था. फिर भी उन्होंने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सब बेकार रहा.
अनुराग धनकड़ भारतीय पुलिस सेवा के 1994 बैच के अधिकारी थे. उन्होंने अमिताभ रंजन की जगह मई 2025 में त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP of Tripura ) का पद संभाला था.
त्रिपुरा राज्य के पुलिस का प्रमुख बनने से पहले, उन्होंने त्रिपुरा में डायरेक्टर जनरल (इंटेलिजेंस) के तौर पर काम किया था और केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के साथ उनका शानदार करियर रहा. वहां उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई हाई-प्रोफाइल केस की जांच की.
अपने प्रोफेशनल रवैये और पुलिसिंग के व्यापक अनुभव के लिए जाने जाने वाले आईपीएस अनुराग धनकड़ को राज्य के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से एक माना जाता था.
शुरुआती रिपोर्ट्स से पता चलता है कि सीनियर अनुराग धनकड़ की मौत आत्महत्या से हुई हो सकती है. हालांकि, मुख्यमंत्री के सचिव किरण गिट्टे ने कहा कि उनकी मौत के सही हालात की अभी आधिकारिक पुष्टि होनी बाकी है.
सीनियर डॉक्टर डॉ. प्रदीप भौमिक ने मीडिया को बताया कि अनुराग धनकड़ को दोपहर करीब 12 बजे अस्पताल लाया गया था, तब उनकी नब्ज, ब्लड प्रेशर, तापमान या जीवन होने कोई अन्य ज़रूरी संकेत नहीं मिल रहे थे. फिर भी, इमरजेंसी यूनिट में कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) शुरू किया गया. तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके. मौत के कारण के बारे में पूछे जाने पर डॉ. भौमिक ने कहा कि इसका पता पोस्टमार्टम के बाद ही चल पाएगा. लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डीजीपी धनकड़ ने आत्महत्या की.
अनुराग धनखड़ उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के बिहारीपुर गांव के रहने वाले थे. हालांकि अब उनके नजदीकी परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता . उनके पुराना घर बंद रहता है. उनके कुछ नजदीकी रिश्तेदार पश्चिम उत्तर प्रदेश के बड़ौत और लोनी में रहते हैं . त्रिपुरा सरकार की कैबिनेट की बैठक में डीजीपी के शोक व सम्मान के तौर पर दो मिनट का मौन रखा गया . इसके साथ ही त्रिपुरा सरकार ने 21 जुलाई को राजकीय शोक की घोषणा की.










