पंजाब पुलिस में भर्ती सिपाहियों के लिए पहली बार बनी तरक्की की ऐसी नीति

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पंजाब पुलिस
पंजाब पुलिस में कांस्टेबल की तरक्की पालिसी (प्रतीकात्मक फोटो)

पंजाब पुलिस में तरक्की के लिए तरसते रहे उन पुलिसकर्मियों के लिए खुशखबरी है जो इस ऐतिहासिक पुलिस फ़ोर्स में सबसे छोटे रैंक यानि सिपाही के तौर पर भर्ती हुए. अब ऐसे सिपाहियों को तरक्की देने के आदेश दिए गये हैं जिन्हें पंजाब पुलिस में सेवा करते हुए 16, 24 और 30 साल हो चुके हैं. इसके लिए पंजाब सरकार ने नीति बनाई है और इस नीति के तहत प्रोन्नत किये जाने वाले सिपाहियों को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह बैज/फीत लगायेंगे. इसके लिए 9 जुलाई को होशियारपुर में जहां खेलां स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में विशेष समारोह का आयोजन होगा.

पंजाब पुलिस में भर्ती सिपाहियों को तरक्की देने के लिए बनाई और अमल में लाई जा रही इस तरह की ये पहली नीति है जिसमें एक निश्चित समय सीमा के भीतर सिपाहियों को पदोन्नत करने का प्रावधान है. इसके तहत, जो सिपाही सेवाकाल के 16, 24 और 30 साल पूरे कर चुके हैं उनको अगले रैंक पर प्रोन्नत किया जायेगा.

इससे पहले पंजाब पुलिस में सिपाही के तौर पर भर्ती हुए पुलिसकर्मियों को सिर्फ 16 साल के बाद तरक्की के साथ अगला रैंक दिया जाता था. एक अंदाज़े के मुताबिक़ इस नीति से तकरीबन 10 हज़ार पुलिसकर्मियों को लाभ मिलेगा. कई पुलिसकर्मी, जो हवलदार के ओहदे से ही रिटायर हो जाते थे, वो अब सहायक उप निरीक्षक (ASI) तो बन ही सकेंगे. इस नीति का मकसद पुलिसकर्मियों को सेवाकाल के दौरान समयबद्ध तरीके से प्रोन्नति के कम से कम तीन मौके देना है.

पंजाब पुलिस का दिलचस्प इतिहास :

भारत के पंजाब राज्य की पुलिस आधुनिक युग के सबसे पुराने पुलिस संगठनों में से एक है जिसके गठन की जड़ें 1898 से जुड़ी हुई हैं. तब पहली बार ऐसा हुआ जब पुलिस महानिरीक्षक के ओहदे से सैनिक अधिकारी को हटाये जाने की व्यवस्था की गई. उस वक्त भारत में ब्रिटिश शासन था और पुलिस का मुखिया आर्मी आफिसर हुआ करता था. 1902 में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय पुलिस आयोग बनाया था ताकि पुलिस की खामियों का पता लगाकर, उन्हें दूर किया जा सके. इसके बाद ही पंजाब में पुलिस तंत्र मज़बूत हुआ और इसकी बल संख्या भी बढ़ाई गई.

1891 में यहाँ फिल्लौर में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल बनाया गया जहाँ आज भी IPS अधिकारी तक विभिन्न तरह के प्रशिक्षण के लिए जाते हैं. यहाँ बाद में फिंगर प्रिंट अनुभाग भी जोड़ा गया.

पकिस्तानी सीमा से सटे इस राज्य में पचास के दशक में फिर से पुलिस तंत्र में सुधार करने की ज़रूरत महसूस की गई. इसके बाद 1961 भारत के मुख्य न्यायाधीश की सरपरस्ती में आयोग गठित किया गया जिसने मई 1962 में अपनी रिपोर्ट दी और फिर यहाँ अपराध अनुसन्धान के लिए प्रयोगशाला, फोरेंसिक विज्ञान, बेहतर मानव संसाधन और उनके विकास कार्यक्रमों पर नीतिगत काम शुरू किया गया.