अंतत: खुद को मौत से नहीं बचा पाए 2014 बैच के युवा आईपीएस अफसर सुरेंद्र दास

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IPS अफसर सुरेंद्र दास
5 सितंबर को सल्फास खाने वाले आईपीएस अधिकारी सुरेंद्र दास ने रविवार को रीजेंसी हास्पिटल में अंतिम सांस ली. फाइल फोटो

घरेलू कलह से आजिज आकर जहर खाने वाले 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी और कानपुर में एसपी पूर्वी सुरेंद्र दास ने रविवार दोपहर 12:19 बजे रीजेंसी अस्पताल के आईसीयू में अंतिम सांस ली. उन्होंने 5 सितंबर को 25 ग्राम सल्फास खा लिया था. जहर के असर से सुबह उनके हृदय ने काम करना बंद कर दिया था. एक्मो मशीन से उसे ठीक करने की कोशिश की गई लेकिन, कामयाबी नहीं मिली. उनका अंतिम संस्कार सोमवार (10 सितंबर) को लखनऊ में किया जायेगा. कानपुर में सुरेंद्र की तैनाती अगस्त में ही हुई थी. कल शनिवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह सुरेंद्र को देखने हास्पिटल आये थे. उन्होंने डाक्टरों से यहाँ तक कहा था कि अगर अमेरिका में इलाज संभव है तो वहाँ इलाज कराइये लेकिन जान बचाइये.

मूलरूप से बलिया के भरौली निवासी आईपीएस अधिकारी सुरेंद्र दास का परिवार लखनऊ में पीजीआई के पास कर्ली पश्चिम मस्जिद वाली गली में रहता है. सुरेंद्र ने बुधवार तड़के कैंट थाने के पास स्थित अपने सरकारी आवास में पत्नी डॉ. रवीना से झगड़े के बाद जहरीला पदार्थ खा लिया था. डॉ. रवीना उन्हें पहले उर्सला अस्पताल ले गईं, जहां से लाकर रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डाक्टरों ने वेंटीलेटर पर रखकर उनका इलाज शुरू किया था. बाद में मुंबई से आई विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम ने एक्मो मशीन के जरिए उनके आंतरिक अंगों को बचाने की कवायद शुरू की थी लेकिन, शनिवार को उनके पैर में रक्त प्रवाह रुक गया था.

रीजेंसी हास्पिटल के सीएमएस डॉ.राजेश अग्रवाल के मुताबिक, शनिवार शाम ऑपरेशन कर सुरेंद्र दास के पैर का ब्लड सर्कुलेशन ठीक किया गया था लेकिन, देर शाम जहर के असर से उनकी किडनी व लिवर ने काम करना बंद कर दिया. रविवार सुबह अचानक हृदय ने भी काम करना बंद कर दिया. दोपहर 12.19 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया. बेटे की मौत की खबर सुनकर मां इंदूदेवी, बहन सावित्री और पत्नी रवीना बेसुध हो गईं. भाई नरेंद्र व अन्य परिजन का भी बुरा हाल है. सूचना पर पुलिस व प्रशासन के तमाम अधिकारियों के साथ ही उनके बैचमेट अफसर भी अस्पताल पहुंचे. करीब तीन बजे पोस्टमार्टम कराकर शव को पुलिस लाइन लाया गया जहां उन्हें श्रद्धांजलि देकर ‘शोक शस्त्र’ सलामी दी. शाम पांच बजे शव को लखनऊ उनके घर रवाना किया गया.

अंतिम दर्शन कर वापस लौटी पत्नी

IPS अफसर सुरेंद्र दास
IPS अफसर सुरेंद्र दास के शव के पास पत्नी डा. रवीना. फोटो साभार : दैनिक जागरण

कानपुर स्थित आवास पर शव का अंतिम दर्शन करने वालों की भीड़ लगी थी. इलाके के लोग गमगीन थे और परिवारीजन का रो-रोकर बुरा हाल था. शव पहुंचने के थोड़ी देर बाद डॉ. रवीना अपने माता-पिता व कुछ रिश्तेदारों के साथ वहां पहुंची. पति के अंतिम दर्शन के दौरान वह चीख पड़ीं.

अधिकारियों ने दी परिवार को सांत्वना

एसपी पूर्वी के निधन पर पुलिस व प्रशासनिक महकमे में शोक की लहर दौड़ गई. एडीजी अविनाश चंद्र, मंडलायुक्त सुभाषचंद्र शर्मा, जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत, एसएसपी अनंत देव समेत तमाम अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी. एसएसपी ने बताया कि डाक्टरों ने काफी प्रयास किया लेकिन, एसपी सुरेंद्र को बचाया नहीं जा सका.

आइपीएस सुरेंद्र दास की मौत की खबर पहुंचते ही गमगीन हुआ भरौली

सुरेंद्र दास के चयन की खबर पर बलिया के जिस भरौली गांव ने जश्न मनाया था, वह रविवार को गम में डूब गया. सुरेंद्र दास के बारे में मनहूस खबर दोपहर करीब 1.30 बजे गांव पहुंची. रिश्ते में उनके चाचा श्याम लाल दास बार-बार यही कह रहे थे कि सुरेंद्र बहुत ही हिम्मत वाला था. ऐसा कदम उसे नहीं उठाना चाहिए था. उसकी मौत ने हम सभी को झकझोर दिया है. दोस्तों को यकीन नहीं होता कि दूसरों का हौसला बढ़ाने वाला खुद कैसे हिम्मत हार गया.

श्यामलाल दास ने बताया कि सुरेंद्र अक्सर फोन कर गांव की खबर लेते रहते थे. हमेशा गांव की बातें, कौन क्या कर रहा रहा है सब कुछ पूछते थे. अपने दोस्तों से भी बातें करते थे. मुझे हमेशा अपने पास लखनऊ बुलाया करते थे पर समय के अभाव में मैं जा नहीं पाता था. इतना कहने के बाद वे रोते हुए घर के अंदर गए और बैग उठा कर लखनऊ के लिए रवाना हो गए.

भरौली निवासी सुनील बचपन से सुरेंद्र दास के दोस्त थे. उन्होंने पुरानी यादें साझा करते हुए बताया जब हम कक्षा पांच में गांव के स्वामी सहजानंद विद्यालय पढ़ रहे थे तब वे काफी आगे थे. स्कूल के सभी शिक्षक उनकी सराहना करते थे. हमने साथ में ही नवोदय विद्यालय के लिए प्रवेश परीक्षा दी थी. इसके बाद वह पढ़ाई करने बाहर चले गए. वह बहुत कम गांव आते थे. इसके बावजूद अपने बचपन के दोस्तों को कभी नहीं भूले. सुरेंद्र ऐसा कोई कदम उठाएंगे, यह हमने कभी सोचा भी नहीं था.

दिवंगत सुरेंद्र दास के भाई ने एफआइआर दर्ज कराने की बात कही

सुरेंद्र दास का शव रविवार शाम पीजीआई क्षेत्र के एकता नगर स्थित आवास लाया गया. शव का अंतिम संस्कार सोमवार सुबह करीब 10 बजे भैंसा कुंड पर किया जाएगा. इस दौरान परिवारीजन ने सुरेंद्र की पत्नी डॉ. रवीना व उनके घरवालों पर गंभीर आरोप लगाए. बड़े भाई नरेंद्र का आरोप है कि पत्नी और ससुरालीजन की प्रताडऩा से सुरेंद्र ने आत्महत्या की है. वह एफआइआर दर्ज कराकर कार्रवाई की मांग करेंगे.

नरेंद्र के आरोप

नरेंद्र के मुताबिक, शादी के बाद से रवीना लखनऊ स्थित घर पर एक दिन भी नहीं रहीं. वह सुरेंद्र को घरवालों से बात करने से मना करती थी. शादी के दो माह बाद से ही दंपती में अनबन होने लगी थी. नरेंद्र का कहना है कि उनका भाई रवीना से तलाक लेना चाहता था. इस बारे में बातचीत भी चल रही थी. रवीना और घरवालों की वजह से सुरेंद्र बहुत तनाव में था. नरेंद्र ने कहा कि सुरेंद्र की मौत की मौत का कारण उसकी पत्नी और ससुरालीजन हैं.

शादी डॉट काम के जरिये हुआ था विवाह

नरेंद्र ने बताया कि शादी डॉट कॉम के जरिए सुरेंद्र का रिश्ता तय हुआ था. इसके बाद रवीना के माता पिता ने बातचीत की और फिर 9 अप्रैल, 2017 को दोनों की शादी हो गई. आरोप है कि शादी के बाद अगले ही दिन रवीना मायके चली गई थी. यही नहीं, रिसेप्शन में भी वह सीधे शाम को पार्टी में पहुंची थी. सुरेंद्र को वह अक्सर नरेंद्र, मां या बहनों से फोन पर भी बात करने से रोकती थी. इस कारण कुछ दिनों से सुरेंद्र ने बातचीत करना भी बंद कर दिया था.

10 साल पहले हो गई थी पिता की मौत

नरेंद्र ने बताया कि वर्ष 2008 में उनके पिता आरसी दास की मौत हो गई थी. कड़ी मेहनत व संघर्ष के बाद उनका भाई आईपीएस अधिकारी बना था. वह खुद को एक कमरे में बंद कर लेता था और घंटों पढ़ाई करता रहता था. सुरेंद्र की पांच बहनें पुष्पा, आरती, सुनीता, अनीता और सावित्री हैं. सुरेंद्र के मूल निवास बलिया से उनके रिश्तेदार व परिचित लखनऊ पहुंच रहे हैं, जिसके कारण सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

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