…टाइगर हिल पर जब तिरंगा लहराते ही हिल गया था पाकिस्तान

1363
कारगिल संघर्ष
टाइगर हिल फतह करने वाले महावीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट बलवान सिंह (बाएं), युद्ध सेवा मेडल विजेता ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर (मध्य) और परमवीर चक्र विजेता ग्रेनेडियर योगेंद्र यादव (दाएं)
  • टाइगर हिल विजय दिवस (4 जुलाई) पर विशेष

4 जुलाई…यह वह दिन था जब भारतीय शेरों ने कारगिल संघर्ष को अंजाम तक पहुंचाया था. पाकिस्तान की मिट्टी पलीद हो गई थी. वह घुटने टेकने को मजबूर हो गया था. इस दिन 18 ग्रेनेडियर ने टाइगर हिल पर तिरंगा लहराया था और पाकिस्तान भागा-भागा अमेरिका के पास गया था कि युद्ध विराम करा दो…हम हार गये हैं…अब और नहीं लड़ सकते. लेकिन भारत सरकार ने किसी की नहीं सुनी. उस दिन क्या और कैसे हुआ…जानिये कारगिल संघर्ष की कहानी ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर की जुबानी…

17 हजार फिट ऊंची टाइगर हिल पर तिरंगा लहराते ही पाकिस्तान की कमर टूट गई. दुश्मन टाइगर हिल की चोटी पर था और वहां से दुश्मन सीधे श्रीनगर, द्रास, कारगिल व लेह मार्ग पर गोलाबारी कर बाधा पहुंचा रहा था. चार जुलाई 1999 का वह दिन आज भी मुझे और हर भारतीय को याद है जब 18 ग्रेनेडियर ने टाइगर हिल को दुश्मनों के कब्जे से छुड़ाकर वहां पर अपना तिरंगा फहराया था. टाइगर हिल पर विजय पताका फहराने के लिए देश के करीब 44 जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी.

कारगिल संघर्ष
ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर

15 मई से लेकर 2 जुलाई तक 8 सिख के जवानों ने टाइगर हिल की घेरेबंदी करके रखी. इसके बाद टाइगर हिल पर विजय पताका फहराने का जिम्मा 18 ग्रेनेडियर को दिया था. 17 हजार फिट ऊंची टाइगर हिल के लिए 18 ग्रेनेडियर ने करीब 36 घंटे आपरेशन चलाया और टाइगर हिल पर तिरंगा लहराया. 18 ग्रेनेडियर का नेतृत्व सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर (तत्कालीन कर्नल) यानी मैंने किया. 18 ग्रेनेडियर की कमांडो टीम की अगुवाई लेफ्टिनेंट बलवान सिंह (अब कर्नल) कर रहे थे. 36 घंटे चले इस आपरेशन के लिए 18 ग्रेनेडियर के जवानों के अपने खाने के सामान को कम करके उस स्थान पर भी असलहा और बारूद भर लिया.

टाइगर हिल को कब्जाने के लिए हवलदार योगेंद्र यादव ने लहूलुहान और बुरी तरह घायल होने के बावजूद दुश्मनों की कई चौकियों को तबाह कर दिया. इसी वीरता के लिए हवलदार योगेंद्र यादव को देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से नवाजा गया. 18 ग्रेनेडियर की कमांडो टीम का नेतृत्व करने वाले कैप्टन बलवान सिंह को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया. हिल पर तिरंगा फहराने के लिए कैप्टन सचिन और हवलदार मदन लाल को वीरचक्र से नवाजा गया.

कारगिल संघर्ष
लेफ्टिनेंट बलवान सिंह (अब कर्नल)… इन्हें टाइगर हिल की चोटी पर हमले की जिम्मेदारी दी गई थी. वह गम्भीर रूप से घायल हो गये थे. इसके बावजूद दुश्मन को अकेले दम करीबी युद्ध में न सिर्फ उलझाए रखा बल्कि बहुत से दुश्मन सैनिकों को हलाक भी कर दिया. उनके इसी अदम्य साहस और हौसले के लिये उन्हें महावीर चक्र प्रदान किया गया था. Photo Source/ADGPI

टाइगर हिल पर विजय पताका फहराने के लिए चले 36 घंटे के आपरेशन में 18 ग्रेनेडियर के 9 जवान शहीद हुए. कारगिल संघर्ष में अदम्य साहस के लिए 18 ग्रेनेडियर को 52 वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए. मुझे युद्ध सेवा मेडल से नवाजा गया.

लड़ाई बहुत कठिन थी. 17000 फिट की ऊंचाई पर आक्सीजन की कमी थी, सुखी और पथरीली सीधी चढ़ाई थी, दुश्मन चोटी पर था और छिपने के लिए एक घास का तिनका तक नहीं था. जैसे ही टाइगर हिल पर भारतीय सेना ने तिरंगा लहराया पाकिस्तान की कमर टूट गई और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के पास गए और उनसे बिना शर्त युद्ध विराम की गुहार लगाई. लेकिन भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि जब तक भारत की सीमा से घुसपैठियों के खदेड़ नहीं दिया जाएगा तब तक युद्ध विराम नहीं होगा. इस युद्ध में पाकिस्तान के मेजर इकबाल और कैप्टन कसाल शेर खान भी मारे गए थे.