बॉर्डर पर ये गुमनाम योद्धा जान खतरे में डाल धड़ाधड़ पुल बना रहे हैं

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सात राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित ये पुल कनेक्टिविटी और विकास के एक नये युग की शुरूआत करेंगे, ऐसी मेरी उम्मीद है: रक्षा मंत्री

भारत में पश्चिमी, उत्तरी और उत्तर-पूर्वी सीमाओं के करीब संवेदनशील क्षेत्रों में सड़कों और पुलों की कनेक्टिविटी में एक नए युग की शुरुआत हुई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 11 अक्टूबर को 44 प्रमुख स्थायी पुलों को राष्ट्र को समर्पित किया. उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में नेचिपु सुरंग के लिए आधारशिला भी रखी. ये पुल रणनीतिक महत्व के हैं और दूरदराज के क्षेत्रों में संपर्क बनाते हैं. ये 44 पुल हैं जो सात राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं.

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल बिपिन रावत, सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे और रक्षा सचिव अजय कुमार भी, वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित इस लोकार्पण समारोह में मौजूद थे जो राजधानी नई दिल्ली में हुआ. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, सिक्किम और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, सांसदों, नागरिक/सैन्य गण्यमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ विभिन्न स्थलों पर संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की जनता ने एक वीडियो लिंक के ज़रिये समारोह में शिरकत की.

एक साथ इतनी संख्या में पुलों का उद्घाटन, और सुरंग का शिलान्यास, अपने आप में एक बड़ा रिकार्ड है।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महानिदेशक और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के सभी रैंकों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी और कहा कि एक ही बार में 44 पुलों का समर्पण एक रिकॉर्ड है. श्री सिंह ने कहा कि कोविड-19 के चुनौतीपूर्ण समय में और पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा तनाव और विवादों के बावजूद, देश न केवल उनका सामना कर रहा है, बल्कि विकास के सभी क्षेत्रों में ऐतिहासिक बदलाव ला रहा है.

सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका के लिए बीआरओ की तारीफ़ करते हुए, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इन पुलों ने पश्चिमी, उत्तरी और उत्तर-पूर्व क्षेत्रों के दूर-दराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी में सुधार किया और स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं को पूरा किया. इनसे पूरे वर्ष सशस्त्र बलों के परिवहन और रसद संबंधी आवश्यकताएं भी पूरी होंगी.

उन्होंने कहा कि बीआरओ का वार्षिक बजट वर्ष 2008-2016 के बीच 3,300 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,600 करोड़ रुपये हो गया. इतना ही नहीं, 2020-21 में यह धनराशि 11,000 करोड़ रुपये से भी अधिक हो गई. कोविड-19 के बावजूद इस बजट में कोई कमी नहीं की गई.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 44 प्रमुख स्थायी पुलों को राष्ट्र को समर्पित किया.

रक्षा मंत्री ने यह भी घोषणा की कि सरकार ने बीआरओ के इंजीनियरों और श्रमिकों को उच्च ऊंचाई पर पहने जाने वाले विशेष कपड़े के प्रावधान किए हैं.

अरुणाचल प्रदेश के तवांग की सड़क पर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण नेचिपु सुरंग की आधारशिला भी राजनाथ सिंह ने रखी. यह 450 मीटर लंबी, दो लेन वाली सुरंग नेचिपु पास में सभी मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में एक सुरक्षित रास्ता मुहैया कराएगी.

बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने गण्यमान्य व्यक्तियों को संबांधित करते हुए कहा कि 30 मीटर से लेकर 484 मीटर तक के विभिन्न आकार के 44 पुल जम्मू-कश्मीर (10), लद्दाख (08), हिमाचल प्रदेश (02), पंजाब (04), उत्तराखंड (08), अरुणाचल प्रदेश (08) और सिक्किम (04) में स्थित हैं. वे सामरिक महत्व के हैं और सीमा क्षेत्रों में नागरिक और सैन्य यातायात की भारी आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं., ये पुल सुदूर सीमा क्षेत्रों के समग्र आर्थिक विकास में योगदान करेंगे और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सशस्त्र बलों की शीघ्र तैनाती में भी सहायता करेंगे.

उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में तेजी लाने के अलावा, बीआरओ ने पिछले साल 28 प्रमुख पुलों को पूरा करके पुलों के निर्माण पर विशेष जोर दिया है, जबकि इस वर्ष 102 प्रमुख पुलों का निर्माण पूरा किया जा रहा है. इनमें से 54 पुल पहले ही पूरे हो चुके हैं. सशस्त्र बलों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों की तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बीआरओ द्वारा 60 से अधिक बेली पुलों का भी निर्माण किया गया है.

बीआरओ ने रणनीतिक महत्व के कार्यों जैसे कि प्रमुख पुल और सड़क, अटल सुरंग रोहतांग, सेला सुरंग आदि के निर्माण और सामरिक पर्वतीय मार्ग के उद्घाटन के लिए स्नो क्लीयरेंस के साथ कोविड-19 महामारी संबंधी प्रतिबंधों के दौरान भी लगातार काम किया है. अभूतपूर्व बर्फबारी के बावजूद 60 साल के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए, सभी रणनीतिक पास और सड़कों को उनकी औसत वार्षिक उद्घाटन की तारीखों से लगभग एक महीने पहले यातायात के लिए मंजूरी दे दी गई थी. इसने सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को राहत पहुंचाई और सैनिकों और रसद की तेजी से आवाजाही को सुनिश्चित किया.

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