सेना का 100 साल पुराना ये कॉलेज कैडेट्स लड़कियों का पहला बैच तैयार करेगा

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राष्ट्रीय इंडियन मिलिटरी कॉलेज
कॉलेज के वर्तमान कैडेट्स के बैच के साथ राज्यपाल गुरमीत सिंह, यहां के छात्र रहे रिटायर्ड और वर्तमान सैन्य अधिकारी

योद्धाओं को पालने के तौर पर पहचाने जाने वाला 100 साल पुराना इतिहास समेटे हुए राष्ट्रीय इंडियन मिलिटरी कॉलेज (RIMC) पहली बार लड़कियों के दाखिले के लिए तैयार हुआ है. भारत के सेनाध्यक्ष ने कॉलेज की तैयारियों पर संतोष ज़ाहिर करते हुए कहा कि आरआईएमसी में लड़कियों का जुड़ना इसके लिए शताब्दी क्षण होगा. यहां लड़कियों के पहले बैच के तौर पर 5 छात्राओं को प्रवेश दिया जाएगा. कॉलेज के शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर आए उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह ने इसे बदलाव लाने वाला कदम बताया और 5 कैडेट लड़कियों के दाखिले की तुलना गुरु गोबिंद सिंह के उन पंज प्यारों से कर दी जो सिख सेना के प्रतीक हैं.

राष्ट्रीय इंडियन मिलिटरी कॉलेज
कॉलेज के वर्तमान कैडेट्स के बैच के साथ राज्यपाल गुरमीत सिंह, यहां के छात्र रहे रिटायर्ड और वर्तमान सैन्य अधिकारी

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के छावनी इलाके में 13 मार्च 1922 को स्थापित किए गए इस कॉलेज की 100 साल से भी ज़्यादा कुछ इमारतें बुलंदी के साथ मौजूद हैं जिनका रोजमर्रा का काम भी होता है. ये आठवीं कक्षा से आगे की स्कूल की पढ़ाई के साथ सेना के लिए अफसर तैयार करने वाली ऐसी पौधशाला है जो भारतीय सेना को कई चीफ, कमांडर और विभिन्न क्षेत्रों में नामी गिरामी हस्तियां दे चुका है. विरासत और आधुनिकता के मेल वाला ये शानदार एकमात्र ऐसा संस्थान भी है जो कोरोना वायरस संक्रमण की महामारी के चुनौतीपूर्ण समय में भी बिना प्रभावित हुए सामान्य रूप से चलता रहा. इसके लिए भारत के सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे ने यहां के कर्मचारियों को बधाई दी. सेनाध्यक्ष श्री नरवणे ने अपने संदेश में इस बात का ज़िक्र करते हुए कैडेट्स से भविष्यष की नेतृत्वक भूमिकाओं तथा प्रौद्योगिकी में तेज बदलावों के कारण आने वाली चुनौतियों के लिए तैयारी करने की अपील की है.

देहरादून में है राष्ट्रीय इंडियन मिलिटरी कॉलेज :

भारत में ब्रिटिश शासन के दौर में जब आरआईएमएस का उद्घाटन (13 मार्च 1922 को) हुआ तब इसकी स्थापना प्रिंस ऑफ़ वेल्स रॉयल इंडियन मिलिटरी कॉलेज (prince of wales royal indian military college) के रूप में हुई. कॉलेज भारत को चार सेनाध्यक्ष और 2 वायु सेना प्रमुख दे चुका है. वायुसेना प्रमुख बन कर रिटायर हुए बीएस धनोआ भी उनमें से एक थे. रिटायर्ड एयर चीफ मार्शल धनोआ कॉलेज के इस कार्यक्रम में भी शामिल हुए. यही नहीं राष्ट्रीय इंडियन मिलिटरी कॉलेज से पढ़े कैडेट्स में से 4 पाकिस्तान की थल सेना के कमांडर इन चीफ और 2 चीफ ऑफ़ एयर स्टाफ भी बने.

राष्ट्रीय इंडियन मिलिटरी कॉलेज
प्रिंस ऑफ़ वेल्स रॉयल इंडियन मिलिटरी कॉलेज के कैडेट्स का पहला बैच

क्यों बनाया गया ये कॉलेज :

असल में अंग्रेजों का इस कॉलेज को बनाने के पीछे मकसद इंग्लैंड के सैंड्हर्स्ट स्थित रॉयल मिलिटरी कॉलेज (royal military college , sandhurst ) में दाखिला लेने वाले भारतीय नौजवानों का पास प्रतिशत बढ़ाना था. ब्रिटिश सैन्य अफसरों का मानना था सेना में अफसर बनना बिना इंग्लैंड में पढ़ाई किये नामुमकिन है. क्योंकि भारतीय लड़कों के लिए इंग्लैंड आकर पढ़ना सम्भव नहीं था सो उन्होंने पब्लिक स्कूल शिक्षा भारत में ही देने की योजना बनाई. तब प्रिंस ऑफ़ वेल्स रॉयल इंडियन मिलिटरी कॉलेज से पढ़े लड़के सेना का प्रशिक्षण पाकर अधिकारी बनने के लिए सैंड्हर्स्ट भेजे जाने लगे.

भले ही यहां अब लडकियों के लिए पहला बैच तैयार हो रहा है लेकिन यहां से एक कैडेट पहले भी तैयार हो चुकी है और इतना ही नहीं वो यहां से पढ़ाई के बाद सेना में भी गई. नाम है स्वर्णिमा थपलियाल जिनके बारे में कम ही लोगों को ही पता है. ये 1992 की बात है. स्वर्णिमा कॉलेज के ही एक फैकल्टी मेंबर की बेटी थी और वे सेना में मेजर भी बनी.

राष्ट्रीय इंडियन मिलिटरी कॉलेज की खासियत :

ये हिमालय की तलहटी में खूबसूरत दून घाटी (beautiful dun valley) में 137 एकड़ इलाके में फैला हुआ है. कुल मिलाकर यहां एक बार में 250 कैडेट्स (cadets) होते हैं. कॉलेज का प्रमुख एक कर्नल रैंक का अधिकारी होता है.

क्योंकि यहां भारत के सभी राज्यों से छात्र पढ़ने आते हैं इसलिए राष्ट्रीय इंडियन मिलिटरी कॉलेज का परिसर एक लघु भारत का नज़ारा पेश करता है. यहां साल में दो बार दाखिला होता है. पूरे भारत में प्रवेश परीक्षा के जरिये यहां के लिए छात्र चुने जाते हैं. यूं तो हरेक राज्य से एक कैडेट लिया जाता है लेकिन कुछ बड़े या ज़्यादा आबादी वाले राज्यों से 2 कैडेट्स भी ले लिए जाते हैं. यहां 8 वीं क्लास से 12 वीं तक की पढ़ाई होती है. यहां आधुनिकतम तकनीक से पढ़ाई कराई जाती है वहीं खेलकूद में भी इस कॉलेज ने अपना विशेष स्थान बनाया है.