कोविड 19 का असर : मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल इस बार ऑनलाइन होगा

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मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल
मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल (2018 की फाइल फोटो)

पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी सिटी ब्यूटीफुल ‘ चंडीगढ़ ‘ में लगातार तीन साल से आयोजित होने वाला मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल इस बार बिना रौनक के होगा. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड 19) के संक्रमण और फलस्वरूप इसके प्रकोप से बचाव के लिए बनाये गये प्रोटोकॉल की वजह से , सेना और सैनिकों के लिए धूम धड़ाके वाला ये उत्सव , इस बार ऑनलाइन होगा. जो कभी सुखना लेक के मुहाने लेक क्लब में हरियाली और झील के कुदरती वातावरण में होता था अब इंटरनेट के ज़रिये ही , तीन दिवसीय इस उत्सव का आयोजन देखा -सुना जा सकता है.

मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल में इस बार जनता की भागीदारी वैसी न होगी जैसे हर बार सुखना लेक के किनारे सर्द दोपहर के दौरान होती थी. मेला तो नहीं होगा , अलबत्ता सैन्य विशेषज्ञों की चर्चाएँ , परिचर्चाएं और सैन्य गौरव गाथाएं डिजिटल स्क्रीन पर ज़रूर देखी – सुनी जा सकेंगी. विभिन्न कार्यक्रमों की लाइव स्ट्रीमिंग होगी और कई प्रोग्राम रिकॉर्ड करके बाद में दिखाए जायेंगे. ये ऑनलाइन मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल 18 से 20 दिसम्बर तक होगा. इससे पहले युद्ध स्मारक पर 7 दिसम्बर को एक कार्यक्रम प्रस्तावित है.

इस बार ये होगा ख़ास :

भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में लडे गए हुए युद्ध के 1921 में 50 साल पूरे होने वाले हैं. स्वाभाविक है कि ऐसे मे मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल में उस युद्ध से जुडी घटनाओं , यादों , कुर्बानियों और सीखे गये सबक के ज़िक्र वाले कार्यक्रम होंगे ही. ये तो इतिहास की बात है लेकिन वर्तमान सैन्य और सामरिक हालात भी कम दिलचस्प नहीं है जोकि विभिन्न कार्यक्रमों में चर्चा का मुख्य केंद्र रहेंगे. खासतौर से भारत – चीन के बीच के एक बार बदले हालात जिसकी वजह बनी है मई में दोनों मुल्कों के सैनिको के बीच लदाख सीमा पर गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प जिसमें भारत के 20 जवानों की जान गई लेकिन चीन ने अभी तक खुलासा नहीं किया कि उसका इस झड़प में क्या जानी नुकसान हुआ. सीमा पर दोनों देशों की कमांडर स्तर की आठ बैठकों के बाद भी ऐसा कोई नतीजा नहीं निकला जो भारतीय पक्ष के लिए जरा भी फायदेमंद रहा हो. भारत – चीन सामरिक सम्बन्धों और इनसे जुडी चुनौतियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं को छूने वाले कार्यक्रम का होना तो अवश्यम्भावी है ही.

मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल :

पंजाब सरकार , भारतीय सेना की पश्चिमी कमान और चंडीगढ़ प्रशासन मिलकर 2017 से मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल का लगातार आयोजन कर रहे हैं. हर बार ये दिसम्बर माह में होता है. पोलो मैच और कुछेक गतिविधियाँ चंडीगढ़ से बाहर होती हैं लेकिन मुख्य कार्यक्रम चंडीगढ़ में सुखना लेक के किनारे ही होता है. पंजाब के वर्तमान मुख्यमंत्री और पूर्व सैनिक कैप्टन अमरिंदर सिंह की पहल पर इसकी शुरुआत हुई थी. इस उत्सव में पूर्व सैनिक जहां अपने अनुभव साझा करते हैं वहीं देश विदेश के सैन्य और सुरक्षा विशेषज्ञों की दिलचस्प चर्चाएँ सुनने को मिलती हैं जिसमें आम लोग भी शिरकत कर सकते हैं.

विभिन्न गतिविधियाँ :

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य से लेकर विभिन्न युद्धों के इतिहास और उनके नायकों पर प्रकाश डालती प्रदर्शनियां , फिल्में और सामूहिक चर्चा का आयोजन होता है. भारत ही नहीं , अन्य मुल्कों के सैन्य अधिकारी भी अपने दल के साथ इस फेस्टिवल में शिरकत करते हैं और अपने अनुभव साझा करते हैं. इसके अलावा सैन्य तरीकों से मनोरंजन के कार्यक्रम और खान पान मेला भी इसका हिस्सा होता है.

सेना में रूचि रखने वाले युवा वर्ग और खासतौर से छात्र छात्राओं के लिए ये आयोजन काफी कुछ सीखने और समझने का अवसर प्रदान करता है. सेना की प्रेरणादायक कहानियां , साहित्य आदि तो इस फेस्टिवल में मिलते ही हैं उनके लिये करियर के हिसाब से सलाह मशविरा हासिल करने का भी ये एक मौका होता है .