अपने साथी को भिखारी बना देख दंग रह गये पुलिस के दो डीएसपी

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पुलिस अधिकारी मनीष मिश्रा बाएं जिस हालत में मिले और वर्दी में मनीष.

भिखारी की तरह सड़कों पर दिन गुजारने वाले इस पुलिस अधिकारी की रुला देने वाली जीवन कथा किसी फ़िल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है. इसे जानकर जितना अचरज होता है उतना ही दर्द भी उभरता है. मध्य प्रदेश के इस पुलिस अधिकारी मनीष मिश्रा की हालत देखकर या जानकर भी यकायक तो किसी को यकीन नहीं होता. शायद यही वजह है जो हर किसी की जुबान से निकालता है – ऐसा कैसे हो सकता है ? क्या सचमुच में ऐसा हुआ?

किस्मत ऐसे दिन किसी को न दिखाये – ऐसा ही हर कोई बोलता है जब वो मनीष मिश्रा के वर्तमान और बीते कल की तुलना करता है. मध्य प्रदेश पुलिस के ही दो अधिकारियों ने भिखारी समझकर अगर मदद के लिए हाथ न बढ़ाया होता तो शायद मनीष मिश्रा की तकलीफ और गुमनामी भरी ज़िन्दगी यूँ ही भटकते भटकते ही खत्म हो जाती …चुपचाप !!

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पुलिस अधिकारी मनीष मिश्रा

असल में हुआ ये कि हाल ही में मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर में उपचुनाव की मतगणना के रोज़ ड्यूटी पर गश्त के दौरान पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) रत्नेश सिंह तोमर और विजय सिंह की नज़र उस शख्स पर पड़ी जो कचरे के ढेर में खाना तलाश रहा था. भूख के साथ साथ उस पर सर्दी की मार भी दिखाई दे रही थी. उसकी हालत देख कर डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर और विजय सिंह से रहा नहीं गया. उससे पूछताछ और मदद करने की गरज से दोनों उसके पास गए लेकिन जब बातचीत के दौरान भिखारी ने अपनी कहानी सुनानी शुरू की तो दोनों हैरान थे – अरे ये तो अपना बैचमेट मनीष मिश्रा ही है. मनीष और ये दोनों अधिकारी पुलिस में साथ साथ ही सब इन्स्पेक्टर भर्ती हुए थे. जेहन में उनके आया ही होगा कि सब ठीक ठाक होता तो मनीष भी आज हमारी तरह डीएसपी होता.

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पुलिस अधिकारी मनीष मिश्रा (बाएं) नए रूप में

ठण्ड से सिकुड़ते इस शख्स को जब इन पुलिस अधिकारियों में से एक ने अपनी जैकेट और एक ने अपने जूते दिए तब तक तो वे सोच भी नहीं सकते थे कि जिसकी भिखारी समझकर वे मदद कर रहे हैं वो उनका पुराना साथी है जो मानसिक संतुलन खो चुका था. मनीष तकरीबन दस साल से ऐसी हालत में ग्वालियर में सड़कों पर भटकता दिन गुजार रहा था. इससे पहले बीमार होने पर उन्हें किसी सेंटर में भर्ती कराया गया था जहां से वे गायब हो गये थे. तब से भीख मांगकर मनीष यूँ ही ज़िन्दगी बसर कर रहे थे. पत्नी न्याय विभाग में कार्यरत है लेकिन उन्होंने मनीष से तलाक ले लिया था. हैरानी की बात है कि मनीष के भाई भी पुलिस में थानेदार हैं. यही नहीं उनके पिता और चाचा एसएसपी के ओहदे से रिटायर हुए. उनकी बहन भी किसी दूतावास में अधिकारी है.

रत्नेश सिंह तोमर और विजय सिंह के साथ ही मनीष मिश्रा सन 1999 में पुलिस में सब इंस्पेक्टर भर्ती हुए थे. उन्होंने 2005 तक मध्य प्रदेश में पुलिस की नौकरी की और अंतिम समय में दतिया में पोस्टेड रहे. यही नहीं मनीष एक शानदार निशानेबाज़ भी थे.

मनीष मिश्रा की सारी बातें जानने के बाद उनके दोस्तों ने उन्हें मनाकर अपने साथ ले जाने की कोशिश की, लेकिन मनीष साथ जाने को राजी नहीं हुए. इसके बाद दोनों अधिकारियों ने मनीष को एक समाजसेवी संस्था में भिजवा दिया. बताया जाता है कि यहाँ उनका सही तरीके से इलाज शुरू हो गया है.

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