बीएसएफ के नए डीजी पंकज सिंह के पिता भी कभी इसी कुर्सी पर बैठे थे

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बीएसएफ़ के प्रमुख बनाए गए पंकज सिंह .

पूरी दुनिया में सरहदों की रखवाली करने वाली तमाम बलों में सबसे बड़ी,  सीमा सुरक्षा बल यानि बीएसएफ (border security force -BSF) ,  के इतिहास में आज  एक दिलचस्प पन्ना और जुड़ गया है. भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी पंकज सिंह को बीएसएफ का महानिदेशक बनाए जाने से ऐसा हुआ है. बीएसएफ के प्रमुखों का इतिहास जब भी लिखा जाएगा तो उसमें ये ज़िक्र ज़रूर होगा कि बीएसएफ एकमात्र ऐसा पुलिस संगठन है जिसको पिता और पुत्र दोनों ने कमान किया. जी हाँ , बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल (director general – DG ) बनाये गए राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी पंकज सिंह कोई और नहीं , भारत भर में लोकप्रिय सेवानिवृत्त उन्ही आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह के पुत्र हैं जो उत्तर प्रदेश पुलिस के बाद बीएसएफ की भी कमान सम्भाल चुके हैं.

बीएसएफ़ के प्रमुख बनाए गए पंकज सिंह दरअसल राजस्थान कैडर के 1988  बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. 27 साल पहले उनके पिता प्रकाश सिंह भी इसी कुर्सी पर बैठे थे जिसकी ज़िम्मेदारी आज उनको संभालने का मौका मिला है. पद्मश्री से भी सम्मानित प्रकाश सिंह ( Prakash Singh)  भारत में पुलिस सुधारों की ज़बरदस्त पैरवी करने वाले चुनिन्दा अधिकारियों में शिखर श्रेणी में गिने जाते हैं.

आईपीएस पंकज सिंह :
पंकज सिंह 31 अगस्त को सीमा सुरक्षा बल (border security force ) के महानिदेशक ( डायरेक्टर जनरल – director general ) का ओहदा संभालेंगे.  27 जुलाई 2021 तक बीएसएफ के प्रमुख गुजरात कैडर के आईपीएस राकेश अस्थाना थे जिन्हें अब दिल्ली पुलिस का कमिश्नर बनाया जा चुका है. उनके बीएसएफ से हटने तक सरकार ने इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की थी लिहाज़ा बीएसएफ के महानिदेशक के पद का कामकाज देखने के लिए भारत तिब्बत सीमा पुलिस ( आईटीबीपी ITBP ) के महानिदेशक ( डीजी )  एसएस देसवाल को अतिरिक्त प्रभार सौंपा था.

58 वर्षीय पंकज सिंह जयपुर में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी – IG ) और केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो में रहे हैं. भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों की जांच से जुड़े रहे पंकज सिंह जम्मू कश्मीर के उस सेक्स स्कैंडल में बड़े बड़े लोगों का पर्दाफाश करने वाले अपराधिक मामले को भी देख रहे थे जिसमें जम्मू कश्मीर के तत्कालीन मंत्री भी फंसे थे. जम्मू कश्मीर में उस रैकेट का भी पर्दाफाश करने में पंकज सिंह की भूमिका अहम रही थी जिसमें हथियार विक्रेताओं,  अधिकारियों और गिरोह सरगनाओं की मिलीभगत से बिना उचित वेरिफिकेशन करवाए हथियारों के लाइसेंस बांटे गये थे.

पंकज सिंह की रिटायरमेंट दिसम्बर 2022 में है. सरकार के आदेश के मुताबिक़ उनके बारे में  यदि कोई और नया आदेश नही आता  , तब तक पंकज सिंह बीएसएफ के प्रमुख  बने रहेंगे.

आईपीएस संजय अरोड़ा  एसएस देसवाल की जगह लेंगे :

संजय अरोड़ा को भारत तिब्बत सीमा पुलिस का महानिदेशक बनाया गया है.

भारतीय पुलिस सेवा के तमिलनाडु कैडर के अधिकारी संजय अरोड़ा को भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी – ITBP ) का महानिदेशक नियुक्त किया गया है. संजय अरोड़ा वर्तमान में केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ – CRPF ) में विशेष महानिदेशक हैं. संजय अरोड़ा  इसी महीने रिटायर हो रहे एसएस देसवाल से आईटीबीपी के प्रमुख की कुर्सी का कार्यभार लेंगे.   हरियाणा कैडर के 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी  एसएस देसवाल का सेवाकाल 31 अगस्त 2021 को समाप्त होना है. सम्भवत: तभी  वे आईपीएस पंकज सिंह को भी बीएसएफ के प्रमुख की कुर्सी सौंपेंगे.

कौन हैं प्रकाश सिंह :
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में जन्मे 85 वर्षीय  प्रकाश सिंह 1991से लेकर 1993 तक भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक रहे. वे भारतीय पुलिस सेवा के 1959 बैच के अधिकारी थे और उनकी पहली पुलिस पोस्टिंग कानपुर में बतौर सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी ) हुई थी. वे यूपी पुलिस में विभिन्न पदों पर रहे और डीजी भी बने. इसके बाद उन्हें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ ) का महानिदेशक बनाया गया था. बीएसएफ में  प्रकाश सिंह का कार्यकाल काफी छोटा रहा. जून 1993  से जनवरी 1994 तक आईपीएस प्रकाश सिंह बीएसएफ के महानिदेशक रहे. वे असम पुलिस के भी प्रमुख रह चुके हैं.

बीएसएफ़ के प्रमुख बनाए गए पंकज सिंह बीएसएफ़ के महानिदेशक रहे प्रकाश सिंह के पुत्र हैं.

भारत में पुलिस में ढांचागत परिवर्तन और पुलिस सुधारों पर अमल कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाज़ा खटखटा चुके प्रकाश सिंह का नाम इस सन्दर्भ में लिया जाएगा . रिटायरमेंट के बाद पुलिस सुधार के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने 1996 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका डाली थी जिस पर  10 साल बाद एक ऐतिहासिक फैसला आया. इसके तहत केंद्र और राज्यों की सरकारों को पुलिस में थाना स्तर से लेकर पुलिस महानिदेशक के स्तर पर नियुक्ति और तबादलों की नीति अपनाने के निर्देश दिए गये थे. साथ ही ये पुलिस के कामकाज में  ढांचागत सुधारों के सफर का मील का पत्थर भी माना जाता है.

वो बात अलग है कि उस फैसले के 15 साल बीतने के बाद भी भारतीय राज व्यवस्था ने उस  पुलिस सुधार कार्यक्रम को  पूरे मन से अभी तक नहीं अपनाया जो पुलिस को और अफसरशाही को राजनीतिक और अन्य दबावों से मुक्त और जनता के प्रति जवाबदेह हो.  सरकार द्वारा गठित विभिन्न जांच आयोग और जांच समितियों से प्रमुख रूप से जुड़े रहे रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी प्रकाश सिंह कई पुस्तकें लिख चुके हैं. वे वर्तमान में इन्डियन पुलिस फाउंडेशन के चेयरमैन भी हैं.