रासुका में गिरफ्तार सोनम वांगचुक जोधपुर जेल से रिहा , सरकार ने रद्द की हिरासत

6
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ( फाइल फोटो )
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ( फाइल फोटो )
सुप्रीम कोर्ट में केस और सार्वजनिक तौर पर जमकर हो रही आलोचनाओं के बीच सरकार ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को आखिर रिहा कर ही दिया. सोनम शनिवार की दोपहर राजस्थान के जोधपुर की सेंट्रल जेल से रिहा हुए जहां वे लगभग छह महीने से कैद थे .  सोनम वांगचुक  लदाख में हिंसा भड़काने का इलज़ाम लगाकर  राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (national security act ) के तहत हिरासत में लिया गया था . इस क़ानून के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना अदालत में केस चलाए साल भर तक हिरासत में रखा जा सकता है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उनकी हिरासत रद्द किए जाने के कुछ घंटों बाद जब वांगचुक जेल से बाहर आए, तो उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने उनका स्वागत किया. ज़रूरी कागज़ी कार्रवाई पूरी होने के बाद, वांगचुक दोपहर करीब 1 बजे आंगमो के साथ एक निजी गाड़ी में जोधपुर जेल से रवाना हो गए.

59 वर्षीय सोनम वांगचुक पर ‘अरब स्प्रिंग’ जैसी शैली के विरोध प्रदर्शनों का भड़काऊ ज़िक्र करके लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया गया  था.  केंद्रीय गृह मंत्रालय ने “सभी संबंधित पक्षों के साथ रचनात्मक और सार्थक बातचीत” को बढ़ावा देने की ज़रूरत का हवाला देते हुए, “तत्काल प्रभाव से” उनकी हिरासत रद्द कर दी.

यह रिहाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा 17 मार्च को गीतांजलि आंगमो की ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ (habeas corpus) याचिका पर सुनवाई किए जाने से कुछ ही दिन पहले हुई है.  यह याचिका 1980 के उस कानून के तहत सोनम  की हिरासत के खिलाफ दायर की गई थी, जो बिना किसी मुकदमे के 12 महीने तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है. जाने माने वकील कपिल सिब्बल इस केस में उनकी तरफ से पेश हो रहे हैं जबकि सरकार की तरफ से सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता वकील हैं.

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था.  इससे दो दिन पहले, लदाख  को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने और उसे छठी अनुसूची में रखने  की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे. पुलिस को इसमें गोली चलानी पड़ी थी. इन घटनाओं में  चार लोगों की मौत हो गई थी और 45 लोग घायल हो गए थे.  केंद्रीय अन्वेषण  ब्यूरो ( central bureau of investigation) ने भी सोनम वांगचुक द्वारा स्थापित एक संस्थान के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की थी. जोधपुर में 25 फरवरी को कार्यकर्ताओं ने सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग को लेकर एक प्रदर्शन किया था.

सोंनम शुरू से ही इस मांग को जोर शोर से उठाते रहे हैं कि लदाख की लोक संस्कृति, पर्यावरण  और  कबीलाई समूहों की रक्षा के लिए ज़रूरी है कि वहां के प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल का अधिकार स्थानीय निवासियों न छीना जाए. इसके लिए वे लदाख को संविधान की छठी अनुसूची में रखने की मांग कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में ऐसा वादा भी किया था. लिहाज़ा सोनम इस पहलू को भी बार बार याद दिलाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करते रहे हैं .