केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उनकी हिरासत रद्द किए जाने के कुछ घंटों बाद जब वांगचुक जेल से बाहर आए, तो उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने उनका स्वागत किया. ज़रूरी कागज़ी कार्रवाई पूरी होने के बाद, वांगचुक दोपहर करीब 1 बजे आंगमो के साथ एक निजी गाड़ी में जोधपुर जेल से रवाना हो गए.
59 वर्षीय सोनम वांगचुक पर ‘अरब स्प्रिंग’ जैसी शैली के विरोध प्रदर्शनों का भड़काऊ ज़िक्र करके लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया गया था. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने “सभी संबंधित पक्षों के साथ रचनात्मक और सार्थक बातचीत” को बढ़ावा देने की ज़रूरत का हवाला देते हुए, “तत्काल प्रभाव से” उनकी हिरासत रद्द कर दी.
यह रिहाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा 17 मार्च को गीतांजलि आंगमो की ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ (habeas corpus) याचिका पर सुनवाई किए जाने से कुछ ही दिन पहले हुई है. यह याचिका 1980 के उस कानून के तहत सोनम की हिरासत के खिलाफ दायर की गई थी, जो बिना किसी मुकदमे के 12 महीने तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है. जाने माने वकील कपिल सिब्बल इस केस में उनकी तरफ से पेश हो रहे हैं जबकि सरकार की तरफ से सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता वकील हैं.
सोंनम शुरू से ही इस मांग को जोर शोर से उठाते रहे हैं कि लदाख की लोक संस्कृति, पर्यावरण और कबीलाई समूहों की रक्षा के लिए ज़रूरी है कि वहां के प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल का अधिकार स्थानीय निवासियों न छीना जाए. इसके लिए वे लदाख को संविधान की छठी अनुसूची में रखने की मांग कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में ऐसा वादा भी किया था. लिहाज़ा सोनम इस पहलू को भी बार बार याद दिलाकर सरकार को कठघरे में खड़ा करते रहे हैं .













