सरकारी आंकड़े बताते हैं भारतीय पुलिस बलों की खराब हालत की कहानी

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सीमा सुरक्षा बल

भारत में विभिन्न प्रकार के पुलिस संगठनों में कुल मिलाकर तकरीबन साढ़े 20 लाख कार्मिक हैं जबकि तकरीबन 26 लाख से ज्यादा पदों की मंजूरी दी जा चुकी है. यानि भारतीय पुलिस व्यवस्था कार्मिकों की भरी कमी के दबाव के बीच किस तरह से दबाव के तहत काम कर रही है, उसका अंदाज़ा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है. ज़रुरत तो सम्भवत: और भी ज़्यादा है लेकिन मंज़ूर शुदा पदों पर भी कार्मिक भर्ती नहीं हुए हैं. उपलब्ध इन आंकड़ों के हिसाब से सवा पांच लाख पुलिस कार्मिकों की ये कमी तब पता चली जब पुलिस अनुसन्धान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी – BPRD) के आंकड़ों का संकलन जारी किया गया.

सीआरपीएफ

कितनी कमी :

हैरान करने और दिलचस्पी पैदा करके के साथ साथ ये आंकड़े अफसोसनाक हालात की तरफ भी इशारा करते हैं. खुद केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने बीपीआरएंडडी के संकलित किये जो आंकड़े जारी किये है उनसे पता चलता है कि जनवरी 2019 यानि एक साल पहले तक भारत में विभिन्न तरह के पुलिस संगठनों के लिए कार्मिकों के 25 95435 पदों को मंजूरी मिली हुई थी लेकिन तब यहाँ 2067270 ही पदों पर कार्मिक काम कर रहे थे जिसका मतलब 5, 28,165 रिक्त थे.

केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल :

कमोबेश यही हालात केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ़-CAPF) के सन्दर्भ में भी हैं. भारतीय केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए जहां 10, 98,779 पदों की मंजूरी है वहीं यहाँ 9,99,918 कार्मिक हैं यानि एक लाख जवानों की कमी से ये सीएपीएफ़ भी जूझ रहे हैं.

महिलाओं की संख्या :

आईटीबीपी

आंकड़े ये भी बताते हैं कि भारतीय पुलिस संस्थानों में महिलाओं की तादाद बेहद कम है. पुलिस संस्थानों में 206727 कार्मिकों में महिलाओं की संख्या मात्र 185696 है जो 9 प्रतिशत से भी कम है. पिछले साल यानि 2017 -18 के मुकाबले इनकी भर्ती में भी मात्र 9.52 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ. केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में तो महिलाओं की मौजूदगी की स्थिति और भी खराब है. यहाँ 9,99,918 कार्मिकों में मात्र 29,532 महिलायें हैं यानि यहाँ सिर्फ 2.95% महिलायें काम करती हैं.

जिले व थाने :

भारत में कुल मिलाकर 777 पुलिस ज़िले और 16,671 थाने हैं. इनमें वास्तविक थानों की संख्या 16,587 है.

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