बड़ा सबक सिखाता है कर्नल वीपीएस चौहान का केस, क्या होगी अफसरों पर भी कार्रवाई

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कर्नल (रिटा.) वीपीएस चौहान पर मुकदमा दर्ज
रिहाई के बाद कार्प्स आफ मिलिटरी पुलिस के अधिकारी कर्नल (रिटा.) वीपीएस चौहान को लेने जिला जेल पहुंचे थे. Source/ADGPI

उत्तर प्रदेश के सबसे हाई प्रोफाइल शहर नोएडा में रिटायर्ड कर्नल वीपीएस चौहान (76 वर्षीय) की 14 अगस्त को की गई गिरफ्तारी से लेकर हफ्ते भर बाद सोमवार को उनकी रिहाई तक का पूरा प्रकरण दो बातें तो साफ साफ बता रहा है. पहला, प्रचार और दावा जैसा चाहे किया जा रहा हो इस प्रदेश में जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला रवैया पुरानी सरकारों के जमाने के हिसाब से जारी है. दूसरा, पुलिस व नागरिक प्रशासन के आला अधिकारी तक उतने संवेदनशील नहीं हैं जितना कि होना चाहिए क्यूंकि साफ़ साफ़ गलती दिखाई देने के बाद भी न तो एडीएम को गिरफ्तार किया गया और न ही पुलिस (सिपाही या दरोगा को छोड़) व नोएडा अथारिटी के किसी अधिकारी पर असरदार कार्रवाई की गई. बताया जा रहा है कि एडीएम भूमिगत है.

कर्नल (रिटा.) वीपीएस चौहान पर मुकदमा दर्ज
कार्प्स आफ मिलिटरी पुलिस के कार्मिक उसी दिन से पुलिस और नागरिक प्रशासन के अफसरों के साथ लगातार संपर्क में थे जब 14 अगस्त को नोएडा निवासी कर्नल (रिटा.) वीपीएस चौहान पर मुकदमा दर्ज किया गया था. Source/ADGPI

पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों में संवेदनशीलता न तो तब दिखी जब कर्नल वीरेन्द्र प्रताप सिंह चौहान के खिलाफ केस दर्ज करके उन्हें जेल भेजा जा रहा था, ना ही तब जब कर्नल ने एडीएम के करवाये अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज़ उठाई और न ही तब जब ये काफी हद तक स्पष्ट हो गया कि कर्नल चौहान के खिलाफ सारा प्रपंच बदनीयती से रचा गया. शर्मनाक तो ये कि मसला कोई इतना बड़ा भी नहीं था जिसमें नौबत यहाँ तक पहुंचती जहां एक ऐसे वरिष्ठ रिटायर्ड फौजी अधिकारी पर सलाखों की कालिख पोत दी जाये जिसका ताल्लुक हाजीपुर आपरेशन, 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध और सियाचिन पर कब्ज़े जैसी जांबाज़ी भरी सैन्य कार्रवाई करने वाली पैरा यूनिट से हो. अपराधियों की तरह हथकड़ी लगाकर और ज़लील करके जेल में ले जाए गए खुद कर्नल चौहान की वर्दी पर अब तक 16 मेडल लग चुके हैं. इतना ही नहीं कर्नल वीपीएस चौहान इंडियन इंस्टीटयूट आफ माउंटेनियरिंग एंड स्कीइंग के प्रिंसिपल भी रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश में जवानों को सेना में भर्ती के लिए मुफ्त में प्रशिक्षण भी देते हैं.

कर्नल (रिटा.) वीपीएस चौहान पर मुकदमा दर्ज
कर्नल (रिटा.) वीपीएस चौहान पर मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद कार्प्स आफ मिलिटरी पुलिस के कार्मिक कोतवाली सेक्टर 20 नोएडा के अंदर और बाहर. Source/ADGPI

सवाल उठता है कि क्या इस उम्र, ओहदे और रुतबे को जीने वाले वरिष्ठ नागरिक पर ऐसे कानून के तहत केस, बिना वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी के, दर्ज हुआ होगा जिस कानून के बेजा इस्तेमाल की बात न सिर्फ कई बार सामने आईं है बल्कि इसके बेजा इस्तेमाल पर देश की सर्वोच्च अदालत भी चिंता ज़ाहिर करते हुए, इसके लागू करने की प्रक्रिया में परिवर्तन की बात कह चुकी है. पुलिस ने 14 अगस्त को IPC की और धाराओं के साथ SC /ST Act के तहत केस दर्ज करके कर्नल चौहान और तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस ने कर्नल के खिलाफ उनके उस पड़ोसी एडीएम की पत्नी की शिकायत पर ये केस दर्ज किया था जिस एडीएम के किये अवैध निर्माण की शिकायत कर्नल ने महीनों पहले नोएडा अथारिटी से की थी. एडीएम का फ्लैट नोएडा के सेक्टर 29 में पहली मंजिल पर है जबकि उसके नीचे यानि ग्राउंड फ्लोर पर कर्नल वीपीएस चौहान रहते हैं. शिकायत के बाद थोड़ा दबाव पड़ने पर हटाया निर्माण कुछ दिन बाद फिर से कर लिया गया. इससे परेशान कर्नल चौहान की शिकायत पर अथारिटी ने फिर कोई कार्रवाई नहीं की. यहाँ गलती तो सरासर नोएडा अथारिटी के अधिकारियों की है जिन्होंने अपना काम नहीं किया और ऐसा हो भी नहीं सकता कि ADM स्तर के अधिकारी के खिलाफ इस शिकायत की जानकारी अथारिटी में उच्चतम स्तर के अधिकारी तक न हो.

कर्नल (रिटा.) वीपीएस चौहान पर मुकदमा दर्ज
कार्प्स आफ मिलिटरी पुलिस के अधिकारियों को रिहाई के बाद शायद घटनाक्रम बयान कर रहे हैं कर्नल (रिटा.) वीपीएस चौहान. Source/ADGPI

इतना ही नहीं सुबह सुबह के मामले को पुलिस शाम तक खींचती रही और फिर कर्नल और अन्य को गिरफ्तार करके तब जेल भेजा गया जब अदालत के बंद होने का समय हो ताकि उन्हें ज़मानत मिलने की कहीं गुंजायश ही न रहे. अगले दिन 15 अगस्त यानि स्वतंत्रता दिवस पर अदालत बंद थी. यहाँ भी पुलिस के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाना लाज़िमी है. उस सुबह के पूरे घटनाक्रम का वीडियो सीसी टीवी कैमरे में रिकार्ड हो गया था जिसमें कर्नल और एडीएम के बीच झगड़ा होता दिखाई दे रहा है. जब ये वीडियो जिला मजिस्ट्रेट के सामने आया (जो पुलिस पहले देख चुकी होगी) तो उसमें कर्नल की पिटाई होती देखने पर जिला मजिस्ट्रेट ने पुलिस को एडीएम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. तब जाकर पुलिस ने एडीएम, उसकी पत्नी, बेटे तथा अन्य चार के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया. इस केस में शनिवार को एडीएम के घरेलू नौकर जितेन्द्र को और इतवार को गनर राहुल नागर को गिरफ्तार कर लिया गया था.

कर्नल (रिटा.) वीपीएस चौहान पर मुकदमा दर्ज
कार्प्स आफ मिलिटरी पुलिस के अधिकारियों के साथ रिहाई के बाद कर्नल (रिटा.) वीपीएस चौहान. Source/ADGPI

अभी तक इस मामले में लापरवाही और गलती पाए जाने पर सिपाही क्लर्क वासिफ अली को और एक सब इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया है. एसएचओ और सीओ (सर्कल आफिसर) का तबादला कर दिया गया है. मामले की जांच सीओ अवनीश कुमार को सौंपी गई है.

सोमवार को ज़मानत के बाद कर्नल वीपीएस चौहान लक्सर जेल से छूटे तो वहां उनको लेने के लिए मिलिटरी पुलिस के अधिकारी और जवान मौजूद थे. सेना की तरफ से बाकायदा वहां की तस्वीरें भी जारी की गई. ADGPI ने फोटो जारी करते हुए इस पूरे मामले में सेना के, कर्नल के साथ खड़े होने की बात कही. इस पूरे प्रकरण के दौरान कर्नल को सेना की तरफ से समर्थन और मदद दी गई. रिटायर्ड ब्रिगेडियर जेएस ग्रेवाल और उनके साथ कर्नल (रिटायर्ड) शशि वेद ने उनकी जमानत के मामले में उनके वकील के तौर पर पेश होकर गौतम बुद्ध नगर ज़िला के अतिरिक्त सत्र न्यायालय में पक्ष रखा.

इस मामले में एक बड़ा बिन्दू जांच करने का अब ये भी है कि इस बात का पता लगाकर कार्रवाई की जाए कि किसके दबाव में और क्यूँ एडीएम के फ्लैट में हुए अवैध निर्माण के खिलाफ असरदार कार्यवाही नहीं की गई और ज़िला स्तर पर पुलिस में किस किस अधिकारी के संज्ञान में ये मामला था. उन अधिकारियों ने समय रहते इसमें दखल क्यूँ नहीं दिया?