बीएसएफ चौकी पर एक पेड़ ऐसा जो आधा भारत और आधा पाकिस्तान का

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बीएसएफ चौकी
सुचेतगढ़ बॉर्डर

क्या आप जानते हैं कि एक पेड़ ऐसा भी है जो आधा पाकिस्तान का और आधा भारत का है. जी हां, हैरान कर देने वाली ये सच्चाई जम्मू कश्मीर से सटे पाकिस्तान के बॉर्डर वाले इलाके में देखने को मिली. पीपल का यह पेड़ आरएस पूरा सेक्टर में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की सुचेतगढ़ स्थित चुंगी चौकी पर है. पेड़ के मोटे से तने के बीच वाले हिस्से में चूने से किया गया सफेद और गेरुआ रंग तो एक जैसा है लेकिन पाकिस्तान की तरफ वाले हिस्से में रंग हल्का है जबकि भारत वाले हिस्से में दिखाई देने वाला रंग गहरा है.

बीएसएफ चौकी
सुचेतगढ़ बॉर्डर

असल में सुचेतगढ़ में भारत और पाकिस्तान को यहां विभाजित करने वाली सीमा पर फेंसिंग है लेकिन उसके बीचों बीच बनी रेखा की निशानदेही के तौर पर पिलर लगाए गये. इन पिलर पर नम्बर लिखे गये हैं लेकिन एक जगह ऐसी है जहां पिलर नहीं है बल्कि पिलर जैसा रंग और उसका नंबर एक पेड़ पर लगा है. असल में ये पिलर भारत की तरफ से लगाये गये हैं. पाकिस्तान इस स्थान पर अपना हक़ जताता है. इसलिए वो यहां जमीन के बंटवारे को मंज़ूर नहीं करता. यहां लगाये गये पिलर में से एक वहां उगे पेड़ के नीचे दब गया लिहाज़ा पेड़ को विभाजन रेखा के पिलर की श्रृंखला की कड़ी के तौर पर मान लिया गया.

बीएसएफ चौकी
सुचेतगढ़ बॉर्डर

बीएसएफ की इस चौकी पर 2 अक्टूबर 2021 से रोज़ाना शाम को वैसी ही बीटिंग रिट्रीट परेड होती है जैसी भारत पाकिस्तान की पंजाब सीमा पर होती है. इस परेड को देखने के लिए शनिवार और रविवार को यहां काफी लोग आते हैं. बीएसएफ ने सुचेतगढ़ की चुंगी चौकी (suchetgarh octroi post) की कई तरीके से सजावट की हुई है. खास बात ये है कि यहां भारत पाकिस्तान सीमा पर परेड देखने के लिए कोई ज़्यादा औपचारिकता नहीं है. एक पहचान पत्र दस्तावेज़ होना चाहिए जैसे आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी आदि. सुचेतगढ़ सीमा चौकी (BOP) पर आने वाले दर्शकों की सुविधा के लिए बीएसएफ की तरफ से भी कैंटीन बनाई गई है. वैसे इसके बाहरी हिस्से में प्राइवेट रेस्टोरेंट भी हैं. साथ ही एक गिफ्ट शॉप भी है.

बीएसएफ चौकी
हनुमान मंदिर

सुचेतगढ़ चुंगी चौकी के बाहरी हिस्से में कश्मीर के महाराजा गुलाब सिंह का बनवाया हुआ प्राचीन लक्ष्मी नारायण मन्दिर भी है. इसी के साथ के हनुमान मन्दिर से दिलचस्प बात भी जुड़ी है. इस मन्दिर का द्वार पश्चिम दिशा की तरफ है और जब सूरज ढलता है तो सूरज की आखिरी किरणें हनुमान प्रतिमा के चरणों में पड़ती हैं.

बीएसएफ चौकी
रघुनाथ मंदिर