चंड़ीगढ़ में सातवें मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन 2 – 3 दिसंबर को

70
मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल ( फाइल फोटो )

सैनिकों की वीरता, गौरव और सेना में उनकी  चुनौतियों से लेकर बलिदान तक की असली गाथाओं से रूबरू कराने वाले आयोजन मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल का सातवां संस्करण चंडीगढ़ में 2 और 3 दिसंबर 2023  को होगा. सैनिकों , युद्धों और सेनाओं के इतिहास को अलग अलग विधाओं के ज़रिये दर्शाने वाला यह आयोजन किसी उत्सव से कम नहीं है और इसकी औपचारिक शुरुआत रविवार को ब्रेवहर्ट्स राइड ( bravehearts ride ) के ज़रिये हो चुकी है जिसे पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने हरि झंडी दिखाकर रवाना किया. इससे पहले चंडीगढ़ स्थित समर स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित करके वीर बलिदानी सैनिकों को याद किया गया.

चंडीगढ़ समर स्मारक  ( chandigarh war memorial ) पर बलिदानी सैनिकों को याद करने , उनको सम्मान देने  भारत के पूर्व सेनाध्यक्ष वी पी मलिक , पूर्व वायुसेनाध्यक्ष सुनील लाम्बा और पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल टीएस शेरगिल भी पहुंचे. जनरल शेरगिल  मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल आयोजन करने वाली एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं . परमवीर चक्र से सम्मानित दो जाबांज पूर्व सैनिक कैप्टन बाना सिंह ( ओननरी ) और सूबेदार मेजर संजय कुमार भी उपस्थित थे.

इस अवसर पर राज्यपाल पुरोहित ने , 2017 में शुरू हुए इस  फेस्टिवल के महत्व और अब तक के इतिहास का वर्णन करती फिल्म भी रिलीज़ की. फेस्टिवल के ताज़ा संस्करण की घोषणा करती 4 मिनट की यह फिल्म राष्ट्रीय पुरस्कार से  सम्मानित  निदेशक ओजस्वी शर्मा ने बनाई है. फेस्टिवल के आयोजन के दौरान भी दर्शकों को यह दिखाई जाएगी. लिटरेचर  आयोजन का आयोजन उसी पुरानी जगह सुखना झील के किनारे लेक क्लब परिसर में होगा जो सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ के सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहती है .

पंजाब के मुख्यमंत्री रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह ( capt amarinder singh )  ने इस सैनिक आयोजन की नींव रखी थी जो आम नागरिकों के लिए भी खुला होता है. इस बार का फेस्टिवल अंग्रेज़ हुकूमत से आज़ादी के फ़ौरन बाद 1947-48 में भारत – पाकिस्तान के बीच हुई जंग के शहीद सैनिकों की याद को समर्पित किया गया है . उस जंग को अब ७५व साल हो रहे हैं. उससे जुडी घटनाओं के अलावा इस बार मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल में विभिन्न मंचों के ज़रिये , यूक्रेन और रूस के युद्ध के साथ साथ इस्राइल व फलस्तीन में हुए ताज़ा टकराव को लेकर भी , चर्चा होना स्वाभाविक है .

हथियारों , गोला बारूद और सैन्य उपकरणों की प्रदर्शनी इस बार भी होगी. सैन्य संस्कृति  एवं स्मृतियों से जुड़ी पेंटिंग , फोटो आदि की प्रदर्शनी भी लगेगी . सेना का बैंड , पंजाब के लोक कलाकारों का जोश इस बार भी दिखेगा . इनके साथ ही खान पान के स्टाल तो इस आयोजन को मेले की शक्ल देंगे ही जिसकी शुरुआत 2017 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की थी. पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के सहयोग से इस सैन्य मेले मिलिटरी लिटरेचर फेस्टिवल ( military literature festival ) का आयोजन तब से हर साल होता आ रहा है. भारतीय सेना की चण्डी मंदिर मुख्यालय स्थित पश्चिमी कमांड की इसमें अहम भूमिका रहती है .