जनरल हसनैन ने श्रीनगर स्थित मुख्यालय वाली 15 कोर ( 15 corps ) की कमान संभाली थी जिसे चिनार कोर ( chinar corps ) भी कहा जाता है . यह कोर कश्मीर घाटी में ऑपरेशन के लिए ज़िम्मेदार सेना की सबसे ज़रूरी फॉर्मेशन में से एक है. उन्होंने भारतीय थल सेना की एक बड़ी स्ट्राइक फॉर्मेशन, 21 कोर ( 21 corps ) का भी नेतृत्व किया था. सेवानिवृत्ति से पहले उनकी आखिरी पोस्टिंग भारतीय सेना के सैन्य सचिव के तौर पर थी, जो फोर्स के अंदर वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों और प्रशासनिक काम की देखरेख के लिए ज़िम्मेदार एक अहम ओहदा है.
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद :
जनरल हसनैन सेना में 40 साल की सक्रिय सेवा के बाद रिटायर ज़रूर हुए लेकिन सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रियता खूब रही . विभिन्न समाचार पत्रों और बेव पोर्टल पर उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं . उनको कश्मीर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर भी नियुक्त किया गया था. यह एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है . हसनैन विभिन्न संस्थानों से भी जुड़े रहे हैं .
शुरुआती जीवन :
एक सैनिक परिवार में पैदा हुए सैयद अता हसनैन ने नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की . इसके बाद उन्होंने में दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज और फिर किंग्स कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन में दाखिला लिया. उन्होंने रॉयल कॉलेज ऑफ़ डिफेंस स्टडीज़, किंग्स कॉलेज लंदन और एशिया पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज़, हवाई में भी पढ़ाई की.
सैन्य जीवन :
उन्होंने श्रीलंका से लेकर सियाचिन ग्लेशियर तक, पूर्वोत्तर से लेकर जम्मू और कश्मीर ( jammu and kashmir) तक, और मोज़ाम्बिक से लेकर रवांडा तक संयुक्त राष्ट्र ऑपरेशन्स में कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं में काम किए .













