पूंछ में शहीद हुए पांच भारतीय सैनिकों और उनके परिवार की ये है हालत

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कश्मीर
देश की सीमा में घुसपैठ कर रहे आतंकवादियों की तलाश में छेड़े गए अभियान में वीरगति को प्राप्त हुए जांबाज.

कश्मीर में 2006 में तीन आतंकवादियों को धराशायी करने में अहम भूमिका निभाने के लिए सेना मेडल से सम्मानित जांबाज़ नायब सूबेदार जसविंदर सिंह की पूंछ सेक्टर से आई शहादत की खबर पर किसी को यकीन नहीं हो रहा था. पंजाब के कपूरथला के माना तलवंडी गांव के 39 वर्षीय जसविंदर का नाम सोमवार को शहीद हुए उन पांच सैनिकों की फेहरिस्त में शामिल था जो देश की सीमा में घुसपैठ कर रहे आतंकवादियों की तलाश में छेड़े गए अभियान में गये हुए थे. अन्य शहीदों में भी दो का ताल्लुक पंजाब से और एक का केरल से है. इनके नाम हैं : नायक मनदीप सिंह, सिपाही गज्जन सिंह, सिपाही सरज सिंह और सिपाही वैशाख एच.

पंजाब सरकार ने शहीदों के परिवारों को 50 – 50 लाख रुपये की राशि और परिवार के प्रत्येक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का एलान किया है.

नायब सूबेदार जसविंदर सिंह :

जसविंदर सिंह के परिवार में पत्नी 35 वर्षीय सुखप्रीत कौर, 13 साल का बेटा विक्रमजीत सिंह और 11 साल की बेटी हरनूर कौर के अलावा 65 वर्षीया विधवा माँ भी हैं. जसविंदर के पिता रिटायर्ड कैप्टन हरभजन सिंह का मई महीने में जब निधन हुआ था, तभी जसविंदर गांव आये थे. अब नवंबर के पहले हफ्ते में उनके छुट्टी पर आने का प्लान था और उन दिनों में, पिता के स्वर्गवास से जुड़ी कोई रस्म करनी थी. बल्कि शनिवार को इस सिलसिले में जसविंदर ने परिवार वालों से फोन काल पर बात भी की थी.

फौजी पृष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाले नायब सूबेदार जसविंदर सिंह के पिता हरभजन सिंह भी थल सेना में थे और बतौर कैप्टन (ओनररी – honorary ) रिटायर हुए थे. नायब सूबेदार जसविंदर सिंह के बड़े भाई रजिंदर सिंह भी सेना से 2015 में रिटायर होकर लौटे. वो बताते हैं कि सुबह जब सेना की तरफ से फोन आया और हमारा हाल चाल पूछा गया तो कुछ शक तो उन्हें तभी हो गया था. इसके बाद एक और फोन कॉल आई जिसमें जसविंदर के शहीद होने की सूचना दी गई. परिवार को बताया गया कि मुकाबले के दौरान आतंकवादियों ने हथगोला फेंका था जिसके धमाके से जसविंदर और चार अन्य सैनिकों की जान गई. परिवार को बताया ये भी गया है कि जसविंदर सिंह का पार्थिव शरीर गुरुवार को अंतिम संस्कार के लिए गांव लाया जा सकेगा.

रजिंदर सिंह ने बताया कि तीन भाई बहनों में जसविंदर सबसे छोटा था. साल 2001 में 12 वीं क्लास पास करने के बाद जसविंदर सिंह सेना में भर्ती हुए. वैसे यहां गांव में परिवार की 6 एकड़ साझा जमीन है जिस पर खेतीबाड़ी होती है.

कश्मीर
आतंकवादियों के विरुद्ध अभियान में वीरगति को प्राप्त हुए जांबाज.

नायक मनदीप सिंह :

पंजाब के गुरदास पुर ज़िले के चट्ठा गांव के 30 नायक मनदीप सिंह भी पूंछ में शहीद हुए फौजियों में से है. मनदीप के निधन का समाचार सुनकर गांव आये उनके भाई जगरूप सिंह राजस्थान के गंगानगर में हवलदार के तौर पर तैनात हैं. जगरूप सिंह को मनदीप से मिले हुए तो डेढ़ साल का अरसा बीत गया था लेकिन फोन पर वीडियो कालिंग के जरिये अक्सर उनकी मुलाक़ात होती थी. बल्कि उनके बीच आखिरी वीडियो कॉल भी पूंछ में मुठभेड़ से कुछ घंटे पहले ही हुई थी.

जगरूप सिंह बताते हैं कि हम तीन भाई हैं. एक भाई कतर (Qatar ) में ट्रक चलाता है और मनदीप ने मेरे वाला रास्ता पकड़ा और दस साल पहले सेना में भर्ती हुआ. पिता का 2018 में निधन हो गया था. तीनों भाइयों के परिवार और माँ साथ साथ गांव में रहते हैं.

परिवार के पास सिर्फ एक एकड़ जमीन है जिससे तीन भाइयों वाले परिवार का गुजर बसर तो नामुमकिन है ऐसे में कोई और विकल्प भी नही कि कुछ और किया जाए. वैसे भी चट्ठा गांव में काफी फौजी है. तकरीबन 15 लोग तो यहां से सेना में गये ही हैं. जगरूप कहते हैं कि इन सबके बावजूद यहां इतना आसान नहीं है. क्यूंकि बारी बारी से कुछ लम्बी छुट्टी लेकर घर आते थे इसलिए भाइयों की आपस में मुलाकात भी नहीं हो पाती थी. घर में सारा कुछ महिलाओं को ही देखना पड़ता है. जगरूप सिंह बताते हैं, ‘मेरा एक बेटा और एक बेटी है जबकि मन्दीप के तो दो बेटे हैं. छोटा बेटा तो बस तीन महीने का ही है जबकि बड़ा वाला 18 महीने का ‘.

जगरूप बड़े भावुक हो जाते हैं. बताते हैं, ‘इतवार की शाम को ही तो हम बचपन की बातें याद करके खुश होकर एक दूसरे से बातें कर रहे थे. क्या पता था कि सुबह उठते ही भाई सदा के लिए बिछड़ा मिलेगा’. हवलदार जगरूप सिंह बताते हैं कि मनदीप गांव में मकान बनाने को लेकर बहुत खुश था. उसने घर का नक्शा और डिज़ायन बनाया था. दोनों भाई वीडियो चैट के दौरान इस पर चर्चा करते रहते थे कि पैसे का इंतजाम कैसे होगा.

गुरदासपुर के चट्ठा गांव में फौजी तो काफी रहे हैं लेकिन सैनिक कार्रवाई में शहीद होने वाला मनदीप यहां का पहला सैनिक है.

सरज सिंह :

भाई गुरप्रीत सिंह और सुखवीर सिंह के नक्शे कदम पर चलता हुआ उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के बांदा का रहने वाला सरज सिंह 21 साल की उम्र में सेना में भर्ती हुआ था. दो साल पहले ही सरज सिंह की शादी हुई थी. परिवार वाले बताते हैं कि इतवार को ही उसने अपनी पत्नी रंजीत कौर से फोन पर बात करते हुए इस बार दीवाली घर आकर मनाने का वादा किया था. उत्तर प्रदेश की सरकार ने सरज सिंह के परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता राशि और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा किया है. साथ एक सड़क का नाम भी शहीद सरज सिंह के नाम पर रखा जाएगा.

सिपाही वैसाख एच :

जम्मू कश्मीर में शहीद हुए पांच सैनिकों में से सबसे कम उम्र का 23 साल का सिपाही वैसाख एच तो दूसरे सुदूर कोने के राज्य केरल के कोल्लन ज़िले के कुडावत्तूर गांव का रहने वाला था. 12 वीं क्लास पास करके ढाई साल पहले ही वैसाख एच सेना में भर्ती हुआ था. कुछ टाइम पंजाब के कपूरथला में तैनाती के बाद ही ये उसकी दूसरी पोस्टिंग थी. अपने परिवार का पेट पालने का वही एक सहारा था और मां बाप की बड़ी उम्मीद थी. पिता कोच्चि में एक प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करते थे जो कोविड 19 संक्रमण में गड़बड़ाये आर्थिक दौर में छूट गई थी. घर में एक छोटी बहन शिल्पा भी है जिसकी शादी करने का ज़िम्मा खुद ही वैसाख एच ने उठाया था जो किसी भी भारतीय परिवार में एक भाई के नाते स्वाभाविक भी है. हालांकि खुद वैसाख की शादी साल भर पहले तय हो गई थी लेकिन वैसाख ने प्रण लिया था कि बहन की शादी के बाद ही अपनी शादी करेगा.

वैसाख एच की पारिवारिक मित्र और स्थानीय पंचायत की सदस्य के रमानी बताती हैं कि अभिभावकों ने अपने जीवन की सारी पूंजी दोनों बच्चों की पढ़ाई और परवरिश पर खर्च की थी. पिछले महीने ही जाकर वे अपना घर बना पाए थे. ये भी वैसाख की कमाई और बचत के साथ बैंक लोन से मुमकिन हुआ था. तभी वैसाख घर आया था.