शतक बनाकर कूच कर गया भारत का ऐसा योद्धा जो तीनों सेनाओं में रहा

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पृथीपाल सिंह गिल
रिटायर्ड कर्नल पृथीपाल सिंह (फाइल)

उम्र की शतकीय पारी पूरी करने के बाद भारत का एक ऐसा योद्धा सैनिक संसार से कूच कर गया जिसने भारतीय सेना के तीनों अंगों में अपनी सेवा दी. दूसरे विश्व युद्ध से लेकर विभिन्न सैन्य कार्रवाइयों में हिस्सा ले चुके भारतीय सेना के कर्नल (रिटायर्ड) पृथीपाल सिंह गिल ने चंडीगढ़ में रविवार (5 दिसंबर 2021) को तब अंतिम सांस ली जब उनके 101 वें जन्मदिन का उत्सव मनाने को सिर्फ एक हफ्ता बचा था.

पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ में भरे पूरे परिवार के साथ रह रहे थे कर्नल पृथीपाल सिंह गिल को सेक्टर-25 स्थित शवदाह गृह में परिजनों, दोस्तों और थल सेना की पश्चिमी कमांड के अधिकारियों ने आखिरी सलाम किया. सैनिक के साथ एक खिलाड़ी भी रहे कर्नल गिल पत्नी, बेटे, पोते और पड़पोतों को छोड़कर अचानक ही विदा हुए. कर्नल गिल के पुत्र डॉक्टर अजयपाल सिंह गिल ने बताया कि पिताजी सुबह थोड़े सुस्त थे लेकिन किसी तरह की समस्या का ज़िक्र उन्होंने नहीं किया था. उम्र और शारीरिक अवस्था ही सम्भवत: दोपहर हुए उनके देहांत का कारण बनी.

चंडीगढ़ के सेक्टर 35 निवासी रिटायर्ड कर्नल पृथीपाल सिंह गिल का सैन्य करियर 1942 रॉयल इंडियन एयर फ़ोर्स (भारतीय वायु सेना का तत्कालीन नाम) से शुरू हुआ जब वह कराची में फ्लाइट कैडेट बने. उनके पिता हरपाल सिंह भी सैनिक थे लेकिन उन्हें बेटे का वायु सेना में जाना पसंद नहीं था. हरपाल सिंह थल सेना (Army) में थे सो पिता की इच्छा को ध्यान में रखते हुए पृथीपाल सिंह गिल ने भी थल सेना को चुना. हालांकि इससे पहले 1943 से लेकर 1948 तक वे नौसेना में रहे. पृथीपाल सिंह गिल 1951 में थल सेना में शामिल हुए. कर्नल के रैंक तक पहुँचने के बाद 1970 में पृथीपाल सिंह गिल ने समय से पूर्व सेवानिवृत्ति ले ली.

कर्नल पृथीपाल सिंह गिल ने 71 मीडियम रेजीमेंट का गठन किया और 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के समय में उसके कमान अधिकारी भी रहे. पंजाब के राजसी शहर पटियाला की धरती पर जन्मे पृथीपाल सिंह गिल ने लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज में शिक्षा पूरी की और परमिंदर कौर से विवाह किया.