अब यह खरीद प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, रक्षा अधिग्रहण परिषद ( defence acquisition council) की अगली बैठक में पेश किया जाएगा जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से अंतिम मंज़ूरी मिलने की उम्मीद है.
ये जेट ‘मेक इन इंडिया’ योजना के तहत खरीदे जाएंगे, जिसमें राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन ( dassault aviation ) एक भारतीय फर्म के साथ साझेदारी करेगी. पिछले हफ़्ते, दसॉल्ट ने कहा कि उसने दसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) में अपनी शेयरहोल्डिंग 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 51 प्रतिशत कर दी है, जिससे यह जॉइंट वेंचर फ्रांसीसी कंपनी की मेजॉरिटी-ओन्ड सब्सिडियरी बन गई है. अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर डीआरएएल में पार्टनर है.
भारतीय वायु सेना (indian air force ) के लिए फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की योजना का लम्बा इतिहास है जिससे विवाद जुड़े रहे हैं. इन सबके बीच हाल के बरसों में कुछेक राफेल विमान भारतीय वायु सेना में शामिल भी किए गए. पिछले साल मई में पाकिस्तान के साथ ‘ ऑपरेशन सिन्दूर ‘ के दौरान भी राफेल चर्चा में आया . इसके बाद सितंबर में, भारतीय वायु सेना ने रक्षा मंत्रालय को एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा था जिसमें अधिक संख्या में जेट्स शामिल करने की अपनी बहुआयामी योजना के तहत 114 और राफेल फाइटर जेट्स की मांग की गई थी.
भारतीय वायु सेना ने राफेल के पक्ष में अपने चुनाव के लिए कई कारण बताए हैं . पहला तो यही ही कि सेना पहले से ही 36 राफेल जेट उड़ा रही है, जबकि नौसेना ने उसी जेट के 26 समुद्री-संस्करणों का ऑर्डर दिया है. संख्या बढ़ने से रखरखाव लागत कम होगी. अंबाला में वायु सेना के बेस पर एक राफेल उड़ान-प्रशिक्षण और रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) सुविधा चालू है. वायु सेना के पास दो स्क्वाड्रन (36-38 विमान) को तुरंत शामिल करने की क्षमता है .
फ्रांसीसी विमान निर्माता सभी 114 जेट में भारतीय हथियार, मिसाइल और गोला-बारूद लगाएगा और जेट को भारतीय रडार और सेंसर के साथ डिजिटल रूप से इंटीग्रेट करने के लिए सुरक्षित डेटा लिंक भी देगा, जो ग्राउंड-बेस्ड कंट्रोलर को इमेज भेजेंगे.
साथ ही, विमान निर्माता एयर फ्रेम बनाने के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) भी देगा. इसके सप्लायर , जैसे इंजन बनाने वाली कंपनी सफ्रान और एवियोनिक्स प्रोवाइडर थेल्स भी टीओटी का हिस्सा होंगे. एयर फ्रेम, इंजन और एवियोनिक्स के लिए टीओटी पूरा होने के बाद स्वदेशी सामग्री 55 प्रतिशत से 60 प्रतिशत के बीच होने की उम्मीद है.













