भारतीय वायुसेना में 4 चिनूक हेलीकॉप्टर की पहली खेप शामिल, जानिए खूबियां

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चिनूक हेलीकॉप्टर
चंडीगढ स्थित एयरफोर्स स्टेशन पर चिनूक हेलीकॉप्टर

भारतीय वायुसेना (Indian Airforce-IAF) ने आज चंडीगढ़ वायुसेना स्टेशन पर औपचारिक रूप से सीएच 47 एफ (I) चिनूक हेलीकॉप्टर को अपने बेड़े में शामिल कर लिया. इस अवसर पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ समारोह के विशिष्ट अतिथि थे. चिनूक हेलीकॉप्टर न सिर्फ तेजी से उडऩे के लिए ही मशहूर है बल्कि इसे किसी भी वक्त उड़ाया जा सकता है. मौसम इसकी उड़ान में रोड़ा नहीं बन सकता. बीहड़ और पहाड़ी स्थानों के लिए ये बहुत सटीक हेलीकॉप्टर माने जाते हैं.

चिनूक हेलीकॉप्टर
चिनूक हेलीकॉप्टर की पहली खेप को शामिल किए जाने के मौके पर एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ

भारतीय वायुसेना ने सितंबर 2015 में 15 चिनूक हेलीकॉप्टरों के लिए मेसर्स बोइंग लिमिटेड के साथ समझौता किया था. चार हेलीकॉप्टरों की पहली खेप रविवार को कच्छ के मुंद्रा एयरपोर्ट पहुंची थी. 11 हेलीकॉप्टरों की अंतिम खेप अगले वर्ष मार्च तक पहुंच जाएगी. इन हेलीकॉप्टरों को भारत के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा. करीब 17 हजार करोड रुपये के इस सौदे में 22 अपाचे हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं.

चिनूक मल्टीमिशन हेवी लिफ्ट ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर्स है. इनके द्वारा सैनिकों, हथियारों, युद्धक उपकरणों, गोला बारूद सहित अन्य तमाम तरीके की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है. सैन्य ऑपरेशन के अलावा आपदा में राहत और बचाव कार्य में भी इनका प्रभावी इस्तेमाल होता है. इस हेलीकॉप्टर से एम-777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में भारतीय फौज को मदद मिलेगी.

खासियतें

चिनूक हेलीकॉप्टर का निर्माण अमेरिकी कंपनी बोइंग रोटरक्राफ्ट्स सिस्टम्स ने किया है. इसके रोटर का व्यास-18.29 मी है. रोटर के घूमने की लंबाई- 30.14 मी. है. फ्यूजलेज- 15.46 मी है. ऊंचाई- 5.68 मी और फ्यूजलेज चौड़ाई- 3.78 मी है. ईंधन क्षमता- 3914 लीटर जबकि अधिकतम रफ्तार- 302 किमी प्रति घंटा है. इसकी क्रूज रफ्तार- 291 किमी प्रति घंटा और मिशन रेडियस- 370 किमी तथा वजन- 22680 किग्रा है.

यह 10886 किग्रा भार उठाने में सक्षम है. यह 11 टन का अधिकतम पेलोड ले जा सकता है. इसके साथ ही 45 सैनिक भी जा सकते हैं. यही नहीं, इन सबके साथ 10 टन का वजन लटकाकर ले जा सकता है. इसमें पूरी तरह से एकीकृत डिजिटल कॉकपिट मैनेजमेंट सिस्टम होता है. इसमें कामन एविएशन आर्किटेक्चर और एडवांस्ड कार्गो हैंडलिंग क्षमताएं भी होती हैं.

ये देश कर रहे इस्तेमाल

अमेरिकी सेनाओं के साथ ब्रिटेन, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात, इटली, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, नीदरलैंड्स और ग्रीस सहित दुनिया के 19 देशों की सेनाएं इस भरोसेमंद हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर रही हैं.

लादेन को भी निबटाया था

मई 2011 में अंतर्राष्ट्रीय आतंकी ओसामा बिन लादेन को मारने में चिनूक का परोक्ष रूप से अहम रोल था. अमेरिका को लादेन के पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपे होने की पक्की खबर थी. उसे मारने का ऑपरेशन नेवी सील के जिम्मे था. इन कमांडों ने अपने ऑपरेशन में दो ब्लैक हॉक हेलीकाप्टरों का इस्तेमाल किया जिन्हें विशेष तौर पर डिजायन किया था जिससे वे शोर कम करें और पाकिस्तानी रडार की पकड़ में न आएं. किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए इस टीम को दो चिनूक हेलीकॉप्टरों से बैकअप दिया गया. यानी अगर ब्लैक हॉक को कुछ होता है तो हर स्थिति से निपटने के लिए चिनूक पर ही भरोसा किया गया. अब यही चिनूक हेलीकॉप्टर भारत के पास आ चुका है. संयोग ही है, कि भारत के भी कई जानी दुश्मन पाकिस्तान में छिपे हुए हैं.

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