करगिल विजय दिवस : 60 दिन चला युद्ध, भारत ने खोये थे 500 से ज्यादा सैनिक

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करगिल विजय दिवस
करगिल विजय दिवस

पाकिस्तान की कब्जाई अपनी सैनिक चौकियां वापस हासिल करने और लदाख को भारत के हिस्से से काटने की बड़ी साजिश को नाकाम करने के लिए शहीद हुए भारत के 500 से ज्यादा सैनिकों की कुर्बानी को याद करने का आज एक अहम दिन है. भारत इसे करगिल विजय दिवस के तौर पर हर साल 26 जुलाई को मनाता है. इसी दिन वर्ष 2000 में, साठ दिन तक पाकिस्तान से चला वो संघर्ष खत्म हुआ जिसे अंतत: करगिल युद्ध का नाम दिया गया. शुरू में न तो भारतीय सेना को अंदाजा था और न ही पाकिस्तान ने ही इसमें अपनी सेना के शामिल होने की बात कबूल की थी. जम्मू कश्मीर के अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में लड़े गये इस युद्ध ने भारत – पाकिस्तान के उन सम्बन्धों में दरार और चौड़ी कर दी थी जो 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की करारी शिकस्त से पैदा हुई थी.

करगिल विजय दिवस
करगिल विजय के हीरो

करगिल का संघर्ष भारतीय सेना के लिए एक बड़ा सबक भी था. ये एक तरह से दोनों मुल्कों के सैनिकों के बीच एक स्तर पर भरोसे का कत्ल था जो पाकिस्तान की सेना ने किया था. इसकी साजिश की भनक कई दिन तक भारतीय सेना और गुप्तचर एजेंसियों को नहीं लगी थी. यही वजह है जो इस युद्ध को भारतीय जासूसों की नाकामी का नतीजा माना जाता है.

असल में अत्यधिक ऊंचाई वाले करगिल इलाके में सर्दियों में मौसम इतने खतरे पैदा कर देता है कि किसी भी इंसान के लिए वहां सामान्य गतिविधियां तक करना तो दूर एक जगह से दूसरी जगह तक जाना भी बेहद मुश्किल है. उस पर वीरान खतरनाक पहाड़ियां. ऐसे में दोनों देशों की सेनाओं ने आपसी समझ के तहत ये तय कर रखा था कि ऐसे खतरनाक हालात में सीमाई चौकियों से तैनाती हटाकर उन्हें खाली छोड़ दिया जाएगा. लेकिन 1998 की सर्दियों के बाद खाली छोड़ी गई इन चौकियों पर पाकिस्तान ने बर्फ पिघलने की शुरुआत में कब्जा करना शुरू कर दिया था.

करगिल विजय दिवस
करगिल विजय दिवस

करगिल युद्ध के शुरू में गैर सैनिकों/पाकिस्तानी जिहादियों की आड़ या भूमिका रही लेकिन उनके साथ पाकिस्तानी सैनिक और सेना का उपलब्ध कराया असलाह होता था. जिस तरह का गोला बारूद इस्तेमाल किया जा रहा था और संघर्ष चल रहा था वो स्पष्ट करता था कि पाकिस्तानी हमलावरों और घुसपैठियों के पीछे युद्ध प्रशिक्षित बल है. पाकिस्तान हमेशा कहता रहा कि इसमें उसकी सेना शामिल नहीं है. नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान के इस प्लान को ‘ऑपरेशन बदरी’ नाम दिया गया था जिसके खिलाफ भारत ने ऑपरेशन विजय किया था जिसमें तकरीबन 2 लाख सैनिकों को तैनात किया गया था.

करगिल विजय दिवस
22 साल पहले

पाकिस्तान ने शुरू -शुरू में इसे चुनिन्दा बागियों की करतूत कहकर प्रचारित किया लेकिन अंतत: साबित हो ही गया था कि इसमें पाकिस्तान की सेना शामिल थी. इसी के साथ इसे संघर्ष या झड़प की श्रेणी से बाहर निकाल कर युद्ध घोषित किया गया. हालांकि इसमें दोनों ही मुल्कों को भारी नुकसान हुआ. भारतीय सेना ने अपने कई नौजवान अधिकारी खोये. करगिल युद्ध के शहीदों की याद में करगिल समेत कई जगहों पर शहीद स्मारक बनाये गए जहां हरेक 26 जुलाई को शहीदों की याद में कार्यक्रम होते हैं. मुख्य कार्यक्रम राजधानी दिल्ली में होता है जिसमें तमाम सैन्य अधिकारियों से लेकर प्रधानमंत्री तक शामिल होते हैं.