राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर डीआरडीओ के योगदान को ऐसे याद किया गया

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के मौके पर आयोजित वेबिनार को संबोधित करते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों के समर्पण, दृढ़ संकल्प और बलिदान को सम्मान से याद करने के लिए भारत के रक्षा अनुसन्धान विकास संगठन (DRDO – डीआरडीओ) में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2020 मनाया गया. इस दौरान विशेष रूप से उन वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों को याद किया गया, जिन्होंने शक्ति-पोखरण 2 की सफलता के साथ राष्ट्रीय तकनीकी पहचान हासिल करने के लिए काम किया. इस अवसर पर, एक वेबिनार आयोजित किया गया और कोविड-19 के खिलाफ लड़ने के लिए डीआरडीओ प्रौद्योगिकी पर एक प्रस्तुति दी गई.

इस अवसर पर अपने सम्बोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “यह दिन हमारे भारतीय वैज्ञानिकों के ज्ञान, प्रतिभा और दृढ़ता के लिए समर्पित है, विशेष रूप से उनके लिए जिन्होंने देश की जटिल राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों का समाधान खोजने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है”. उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस हमारी तकनीकी तरक्की का जायजा लेने का एक मौका है और एक तकनीकी शक्ति के रूप में उभरने के लिए हमें पता होना चाहिए कि हमें क्या करना है. ऐसा आत्मनिरीक्षण ज़रूरी है क्योंकि विज्ञान और प्रौद्योगिकी देश की अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण कारक बन गए हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना था यह दिन हमें महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने, नवाचारों को प्रोत्साहित करने और उत्पाद की प्राप्ति के लिए प्रौद्योगिकी प्रवाह को बनाए रखने के लिए लगातार कोशिश करने की याद दिलाता है.

श्री सिंह ने कहा कि रक्षा संगठन अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए कोविड-19 की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. भारत के रक्षा बलों और अनुसंधान और विकास की कोशिशों ने इस अदृश्य दुश्मन की पैदा की चुनौतियों का समाधान खोजने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उन्होंने कहा कि डीआरडीओ ने कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई में योगदान देने के अपने निरंतर प्रयासों के माध्यम से इस दिनों में 50 से ज़्यादा उत्पाद विकसित किए हैं. इनमे बायो सूट, सैनिटाइजर डिस्पेंसर, पीपीई किट वगैरा शामिल हैं.

नीति आयोग के सदस्य डॉ वी के सारस्वत ने अपने संबोधन में कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में पहले 45 दिनों के दौरान बेहतरीन काम के लिए डीआरडीओ को बधाई दी. उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में देश ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के बुनियादी ढांचे को मज़बूत किया है। उन्होंने डीआरडीओ को जीवन विज्ञान प्रयोगशालाओं पर अधिक ध्यान देने , जैव रक्षा कार्यक्रम को पुनर्जीवित करने और अधिक रोबोट उपकरणों का विकास करने की ज़रूरत पर जोर दिया. डीआरडीओ के पास इन पर काम करने का मज़बूत ढांचा है. भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) प्रोफेसर के विजयराघवन ने इस मौके पर डीआरडीओ की तारीफ़ में कहा कि कोविड–19 के खिलाफ लड़ाई में अवसर के अनुकूल कार्य करना असाधारण है.

डीडीआर एंड डी के सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ जी सतीश रेड्डी ने कोविड-19 का मुकाबला करने में साथी नागरिकों, सशस्त्र बलों और कोरोना वारियर्स को समर्थन देने के लिए सभी टीमों को बधाई दी. डॉ रेड्डी ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान, उत्पादों की दुनिया भर में आपूर्ति की जानी चाहिए. देर से की गई सप्लाई कोई सप्लाई नहीं है. डीआरडीओ ने कोविड -19 से लड़ने के लिए 53 उत्पाद विकसित किए हैं. उन्होंने बताया कि कुछ प्रणालियों को रिकॉर्ड समय में शामिल किया गया था. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2020 के इस अवसर पर रक्षा मंत्रालय और डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे.

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