केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल ( central reserve police force ) ने 9 अप्रैल 1965 में सरदार पोस्ट पर हुई की लड़ाई को याद करते हए आज शौर्य दिवस मनाया. कच्छ के रण में अपने से तादाद में दस गुना ज्यादा हमलावरों का सीआरपीएफ के जवानों ने बेहद साहस और वीरता से मुकाबला किया था लेकिन 6 जवानों को गंवाना पड़ा. भारतीय केन्द्रीय पुलिस बलों के इतिहास में दर्ज उस उस शौर्य गाथा और बलिदानियों को याद करते हुए सीआरपीएफ ने अपने आज की वीरों की वीरता को भी सलाम किया. एक वीर नारी और 15 जवानों को मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया.
सीआरपीएफ ( crpf) के दिल्ली स्थित मुख्यालय में शौर्य ऑफिसर्स इंस्टिट्यूट में हर साल की तरह 9 अप्रैल 2026 को भी शौर्य दिवस के अवसर पर अलंकरण समारोह हुआ. सीआरपीएफ के महानिदेशक जी पी सिंह ने 15 जवानों को अदम्य वीरता और साहस दिखाते हुए कर्तव्य पालन करने पर मेडल लगाए और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए . एक जवान को मरणोपरांत सम्मान उनकी वीर नारी ने स्वीकार किया .
ब्रिटिश शासन के दौरान 27 जुलाई 1939 को ( crown representative’s police) के तौर पर गठित किया बल ही आज का सीआरपीएफ है जो वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल ( central armed police force ) बन चूका है. इसके जवानों की तादाद 3 लाख से ऊपर हो चुकी है.

सरदार पोस्ट (sardar post) की लड़ाई :
वो 9 अप्रैल 19 65 की घटना है जा भारत – पाकिस्तान सीमा पर कच्छ के सुनसान रण में, इतिहास रक्त और लोहे से लिखा गया था. सीआरपीएफ की दूसरी बटालियन की दो कंपनियों ने पाकिस्तानी इन्फैंट्री ब्रिगेड के 3,500 सैनिकों के भीषण हमले का सामना किया था. संख्या में बहुत कम होने के बावजूद सीआरपीएफ के जवान चट्टान की तरह डटे रहे और बेमिसाल साहस के साथ हमले को नाकाम कर डाला. मुकाबले में पाकिस्तान के 34 सैनिक मारे गए जिसमें 2 अधिकारी शामिल थे. पाकिस्तानी सेना के 4 जवान युद्ध बंदी बनाए गए. सरदार पोस्ट ( चौकी ) पर कोई कब्जा न कर सका .
सरदार पोस्ट की लड़ाई में सीआरपीएफ के जिन वीरों ने सर्वोच्च बलीदा दिया उनमें नायक किशोर सिंह के अलावा बाकी सिपाही (constable ) थे जिनके नाम है : किशन सिंह , ज्ञान चंद , हुड्डू राम , शमशेर सिंह और सिंधवीर प्रधान.













