केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अफसरों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमल का इंतज़ार …

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प्रतिनिधित्व के लिए फोटो
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क्या केंद्र सरकार  सभी  केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों  के लंबे समय से रुके हुए कैडर रिव्यू  ( cadre review ) से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अमल टालने  का कोई और रास्ता तलाश कर रही है ?  और क्या यह रास्ता संसद में बिल लाकर अख्तियार किया जायेगा ? इस तरह के सवाल तभी से उठने शुरू हो गए जब  सुप्रीम कोर्ट की तरफ से छह महीने की तय समय सीमा समाप्त होने के बाद और केंद्र सरकार की तरफ से समीक्षा याचिका खारिज  किए जाने के बाद भी अधिकारियों का कैडर रिव्यू  करने पर देरी की जाने लगी.

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों – सीमा सुरक्षा बल ( border security force ) , केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल ( central reserve police force ) , भारत-तिब्बत सीमा पुलिस  (indo tibet border police ), सशस्त्र सीमा बल ( sashastra seema bal ), केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ( central industrial security force) और असम राइफ़ल्स ( assam rifles )  में ‘संगठित सेवा का दर्जा’ देने और कैडर अफसरों  के अन्य  हितों को लेकर सुप्रीम कोर्ट  ने मई 2025 में एक अहम फैसला सुनाया था.  उसमें कहा गया था कि इन बलों में ‘संगठित समूह ए सेवा’ (organised group a service ) सही मायने में लागू हो. छह महीने में ‘कैडर रिव्यू’ किया जाए.  इस फैसले के खिलाफ सरकार, सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन में चली गई, जिसे सर्वोच्च अदालत ने डिसमिस कर दिया था.

हैरानी इस बात की है कि इन बलों का शीर्ष  नेतृत्व जोकि वास्तव में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी और सीधे गृह मंत्रालय के अधीन है , इस विषय को लेकर काम में तेजी नहीं  दिखा रहा . हाल ही में गृह मंत्रालय के एक अधिकारी का सभी केंद्रीय सशस्त्र बलों के प्रमुखों को  लिखा गया एक पत्र इस तरफ स्पष्ट इशारा कर रहा है.  आशंका व्यक्त की जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को जस का टस पालन करने से रोकने की बजाय सरकार इस विषय पर संसद में बिल लाना चाह रही है .

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ गृह मंत्रालय में अवर सचिव ( under secretary ) अमित कुमार ने 3 फरवरी को इस बारब में  सीमा सुरक्षा बल ( border security force ) , केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल ( central reserve police force ) , भारत-तिब्बत सीमा पुलिस  (indo tibet border police ), सशस्त्र सीमा बल ( sashastra seema bal ), केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ( central industrial security force) और असम राइफ़ल्स ( assam rifles )  के महानिदेशकों को पत्र लिखा हैं  जिसमें कहा गया हैं  कि मंत्रालय पिछले साल 26 दिसंबर को जारी पहले के पत्र का अभी तक उनकी तरफ से  जवाब नहीं मिला है.

पत्र  में कहा गया है , “यह ध्यान दिया जाना है  कि यह मामला माननीय कोर्ट  में है और सबसे ज़रूरी है. इसलिए,   केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) से फिर से अनुरोध  है कि वे अपने मौजूदा ग्रुप ‘ए ’ कैडर का पूरा रिव्यू करें और मंत्रालय  को जल्द से जल्द विस्तृत  कैडर समीक्षा प्रस्ताव  ( cadre review proposal)जमा करें.” यह स्मरण पत्र  मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की पृष्ठभूमि  में लिखा गया है, जिसमें केंद्र सरकार  को केन्द्रीय सशस्त्र बलों में ग्रुप- ए  अधिकारियों को “सभी उद्देश्यों  के लिए” संगठित सेवा  ( organised service )  के तौर पर पहचानने के बाद उनका कैडर रिव्यू करने का निर्देश दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट  ने केंद्रीय पुलिस  बलों में आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने की बात कही थी, लेकिन इसके उलट  पिछले कुछ महीनों में केंद्रीय बलों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति में तेजी दिखाई दी. अमर उजाला की 12 फरवरी की  एक रिपोर्ट के मुताबिक – जून 2025 में 678 आईपीएस अधिकारी, इन बलों  में तैनात थे.  अब यह संख्या, 700 के पार पहुंच गई है.  पिछले साल जून में केंद्र सरकार में बतौर प्रतिनियुक्ति 15 डीजी, 12 स्पेशल डी जी, 26 एडीजी, 150 आईजी, 254 डीआईजी और 221 एसपी के पद स्वीकृत थे. वहीं 23 दिसंबर 2025 में आईपीएस ‘प्रतिनियुक्ति’ के लिए स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ा दी गई. फिलहाल, केंद्र में डीजी के 15 पद, एसडीजी के 17, एडीजी के 30, आईजी के 158, डीआईजी के 256 और एसपी के 225 पद स्वीकृत किए गए हैं.

कैडर समीक्षा का मकसद फोर्स के अंदर करियर में ठहराव और  उसके ढांचे को संतुलित करना है जिसकी लम्बे समय से मांग हो रही है . इसके न  होने से अधिकारियों के लिए तरक्की के रास्ते लगातार कम हो रहे हैं . जिस अधिकारी को सेवा में आने के 13 साल में कमांडेंट बन जाना चाहिए उसे इस पद पर पहुंचने में 20 साल से भी ज्यादा का अरसा लग रहा है . इतना नहीं तरक्की के लिए बरसों का यह फासला बढ़ता जा रहा है .  आई जी और एडीजी जैसे पदों पर बेहद मामूली संख्या में ही बल के अधिकारी पहुंच सकते हैं .  वर्तमान में इन बलों में उप महानिरीक्षक ( dig ) के 20 फीसदी और महानिरीक्षक ( ig ) के 50 फीसदी पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं .

यदि लंबित  कैडर रिव्यू  होता है इन बलों के तकरीबन लगभग 13,000 ग्रुप-ए  अधिकारियों के तरक्की के रास्ते खुलेंगे .  पर असर पड़ने की उम्मीद है. इससे अन्य संगठित सेवाओं के अधिकारियों के समान ही उन्हें आर्थिक व अन्य लाभ भी मिल सकेंगे. इससे बलों में बड़ा प्रशासनिक बदलाव भी आएगा .