यूपी एसटीएफ के जनक रिटायर्ड डीजीपी श्रीराम अरुण का लखनऊ में निधन

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श्रीराम अरुण
श्रीराम अरुण ने 10 अप्रैल 2016 को अपने फेसबुक पेज पर यह प्रोफाइल पिक्चर पोस्ट की थी. फोटो साभार : श्रीराम अरुण के फेसबुक वाल से

उत्तर प्रदेश के दो बार पुलिस महानिदेशक (DGP) बने, भारतीय पुलिस सेवा के रिटायर्ड अधिकारी श्रीराम अरुण का आज लखनऊ में निधन हो गया. श्रीराम अरुण उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष कार्य दल (स्पेशल टास्क फ़ोर्स – STF ) के जनक माने जाते हैं. वह लम्बे समय से बीमार थे और मंगलवार को लखनऊ के विज्ञान पुरी स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली. वह 78 साल के थे.

श्रीराम अरुण
श्रीराम अरुण ने 6 मार्च 2015 को अपने फेसबुक पेज पर अपने परिवार की यह फोटो पोस्ट की थी. सबसे बाएं हैं उनके पुत्र और उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस-ATS ) के महानिरीक्षक (IG) असीम अरुण. फोटो साभार : श्रीराम अरुण के फेसबुक वाल से.

वर्तमान में उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस-ATS ) के महानिरीक्षक (IG) असीम अरुण उनके पुत्र हैं. श्रीराम की पत्नी शशि अरुण जानी मानी लेखिका और समाजसेविका हैं. उनकी पुत्री रश्मि शमी मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अफसर हैं और प्रमुख सचिव हैं.

श्री राम अरुण एक नजर में

  • जन्म- 1940 खैरनगर जनपद कन्नौज
  • बैच-1963 भारतीय पुलिस सेवा
  • पुलिस महानिदेशक पद पर -1997
  • पुलिस महानिदेशक पद पर द्वितीय बार- 1999
  • सेवा निवृत्त -वर्ष 2000
  • एससी/एसटी आयोग के अध्यक्ष-2001 -2004 तक

इन प्रमुख पदों पर रहे

एडीजी कानून/व्यवस्था, जोनल आईजी- लखनऊ,जोनल आईजी – कानपुर, डीआईजी रेंज- मेरठ

सम्मान एवं अन्य महत्वपूर्ण कार्य

  • उत्कृष्ट सेवाओं के लिए रास्ट्रपति पदक से सम्मानित
  • 1971 के युद्ध बांग्लादेश फ्रंटियर पीएसी सेनानायक के रूप में युद्ध में हिस्सा लिया जिसके लिए पूर्वी स्टार एवं संग्राम पदक से अलंकृत किया गया.
  • पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए पुलिस मॉडर्न स्कूल की स्थापना.
  • पुलिस कर्मियों के बेहतर इलाज के लिए जीवन रक्षक निधि की व्यवस्था कराई.
  • डीजीपी के रूप में द्वितीय कार्यकाल में कानून व्यवस्था और विवेचना को पृथक करने की नींव डाली.

यूपी के राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने श्रीराम के निधन पर शोक व्यक्त किया और उनके परिवार के प्रति संवेदनायें प्रकट की हैं.

श्रीराम यूपी के कई पुलिस जिलों में कप्तान रह चुके हैं. यूपी के डीजीपी के तौर पर उनका पहला कार्यकाल एक साल का था (3 मई 1997 से दो अप्रैल 1998) और दूसरा कार्यकाल सिर्फ आठ महीने (23 दिसंबर 1999 से 31 जुलाई 2000) का रहा. एक बार वह मायावती के मुख्यमंत्रित्व काल में तो एक बार कल्याण सिंह के मुख्यमंत्रित्व के दौरान यूपी के डीजीपी रहे. रिटायर होने के बाद आईपीएस श्रीराम अरुण उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी रहे.