जिस्म पर कैमरा, वायरलेस से जुड़ा ईयर प्लग : बदला गया दिल्ली पुलिस का रूप

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हाईटेक 'रफ़्तार' के 300 सदस्य वाले काफिले को भारत की राजधानी की दिल्ली सड़कों पर उतारने के लिए इंडिया गेट पर आयोजित कार्यक्रम में भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने हरी झंडी दिखाई.

मोटरसाइकिल में बदलाव करके हैंडल पर लगी न टूटने वाले कांच की शील्ड जो सर्द गर्म हवाओं के साथ ही सामने से होने वाले हमले को रोकने में सक्षम, मोटर साइकिल सवार के हेलमेट में ब्लू टूथ ईयर पीस जिसे फ़ोन और वायरलेस से भी जोड़ा जा सकता है, हर मौसम के लिए मुफीद खास तरह की जैकट और वर्दी में ही फिट आडियो वीडियो रिकार्ड करने वाला कैमरा. ये है दिल्ली पुलिस के मोटर साइकिल गश्ती दल ‘रफ्तार’ का बदला हुआ रूप.

इस हाईटेक ‘रफ़्तार’ के 300 सदस्य वाले काफिले को भारत की राजधानी की दिल्ली सड़कों पर उतारने के लिए इंडिया गेट पर आयोजित कार्यक्रम में भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने हरी झंडी दिखाई. दिल्ली की सड़कों पर तेज़ तर्रारी वाली दिल्ली पुलिस की ज्यादा तादाद में मौजूदगी दिखाना, भीड़-भाड़ वाली जगह और संकरे रास्तों के बावजूद मदद के लिए जल्दी पहुंचना और ऐसी जगहों में वारदात करके फरार हो रहे मुजरिमों तक जल्द से जल्द पहुंचना ही, इन मोटर साइकिल सवार पुलिसकर्मियों का मकसद है.

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दिल्ली पुलिस के मोटर साइकिल गश्ती दल ‘रफ्तार’ की शाहदरा जिले में गश्त.

मोटरसाइकिल सवार ऐसी संचार प्रणाली से भी लैस रहेगा जिससे ये न सिर्फ ज़िला और पुलिस मुख्यालय के कंट्रोल रूम से जुड़ा रहे बल्कि पुलिस को मदद के लिए फोन करके काल करने वाले शख्स से भी सम्पर्क में बना रहे. जीपीआरएस लगा होने की वजह से मोटर साइकिल कंट्रोल रूम से नज़र भी रखी जा सकेगी.

दिल्ली पुलिस ने मीडिया को जो आंकड़े उपलब्ध कराए हैं, उनके मुताबिक फिलहाल कुल मिलाकर 2028 मोटर साइकिलें अलग अलग जिलों को आवंटित की गई हैं. हरेक थाने की एक ही मोटरसाइकिल है जिसमें ज़िले के कंट्रोल रूम (DPCR) के साथ साथ केन्द्रीय पुलिस नियंत्रण कक्ष  (CPCR) से भी सम्पर्क रखने की संचार व्यवस्था है. इन मोटर साइकिल से पुलिस उन जगहों पर जल्दी पहुंच सकेगी जहां पीसीआर वैन नहीं पहुँच पाती या देर से पहुंचती हैं. इससे पीसीआर वैन के काम का बोझ भी कम होगा. इस नज़रिये से इनकी उपयोगिता को देखते हुए हरेक थाने में ऐसी परिवर्तित तीन मोटर साइकिलें तैनात करने का फैसला लिया गया.

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि बड़ी तादाद ऐसे अपराधियों की पाई गई है जो वारदात में दुपहिया वाहन, खासतौर से मोटरसाइकिल, इस्तेमाल करते हैं और पकड़े जाने से बचने के लिए संकरे रास्तों, गली कूचों से निकल जाते हैं. उन जगहों पर पुलिस के चौपहिया वाहन या तो जा ही नहीं पाते या उन्हें पहुँचने में देर लगती है. ऐसे अपराधियों और हालात से निपटने में मोटर साइकिल का इस्तेमाल ही कारगर होता है. ऐसे मुजरिम महिलाओं को ज्यादातर शिकार बनाते हैं. महिलाओं के गले से चेन झपटना, पर्स या मोबाइल फोन झपटकर फरार हो जाना जैसी ज्यादातर घटनाएँ बाजारों में होती है और कई बार वहां पुलिस की वैन पहुँचने में, कभी भीड़भाड़ की वजह से तो कभी संकरे रास्तों  की वजह से, देरी होती है जबकि मोटर साइकिल सवार पुलिस ऐसे में जल्दी पहुंचती है.