पंजाब के पूर्व डीजीपी वी के भावरा की याचिका पर राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस

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आईपीएस अधिकारी वी के भावरा

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ( punjab and haryana high court ) ने पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक (director general of police ) वी के भावरा की उस याचिका पर केंद्र सरकार , पंजाब राज्य की सरकार और पंजाब पुलिस के वर्तमान प्रमुख गौरव यादव को नोटिस जारी किए हैं जिसमें गौरव यादव को राज्य का पुलिस प्रमुख नियुक्त करने को चुनौती दी गई है . आईपीएस वी के भावरा की तरफ से दायर याचिका में  केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (central administrative tribunal) के 6 मई के आदेश को चुनौती दी गई है.

केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ( cat – कैट ) ने आईपीएस वी के भावरा की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें श्री भावरा को पंजाब पुलिस के प्रमुख के पद पर उनको फिर से बहाल करने का निर्देश देने को कहा था . कैट ने  याचिका को खारिज करने का कारण  ‘याचिका दायर करने में देरी और तकनीकी आधार ‘ बताया था.

वी के भावरा ने  मांग की है कि अदालत राज्य सरकार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी upsc ) की सिफारिशों और 8 जनवरी, 2022 की उनकी दो साल तक की  नियुक्ति को ध्यान में रखते हुए  उन्हें डीजीपी के पद पर 2 साल तक  बहाल करने का निर्देश दे. याचिका में कहा गया है कि स्थानांतरण की आड़ में उन्हें “दंडात्मक कार्रवाई” के तहत डीजीपी ( पुलिस प्रमुख ) के पद से हटा दिया गया है. इसलिए, सरकार को निर्देश दिया जाना चाहिए कि उन्हें वास्तविक दो साल का कार्यकाल पूरा होने तक डीजीपी के रूप में बने रहने की अनुमति दी जाए.  उन्होंने नवंबर 2023 में कैट का रुख किया था.

6 मई को कैट ने उनके आवेदन को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने “सीमा के साथ-साथ ‘ ट्रिब्यूनल में जाने में हुई देरी की माफ़ी की मांग की थी.  भावरा ने डीजीपी गौरव यादव की नियुक्ति को चुनौती दी थी, लेकिन याचिका तकनीकी आधार पर खारिज कर दी गई थी.

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका पर न्यायमूर्ति दीपक सिब्बल और न्यायमूर्ति दीपक मनचंदा की पीठ ने सुनवाई की. पीठ ने अगली सुनवाई के लिए  4 जुलाई का दिन मुकर्रर किया है .

1987-बैच के आईपीएस अधिकारी वी के  भावरा को  पंजाब में कांग्रेस की चरणजीत सिंह चन्नी सरकार के दौरान  डीजीपी के रूप में  8 जनवरी 2022 को नियुक्त किया गया था. उसी दिन राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए  आदर्श आचार संहिता लागू हुई थी. वह जुलाई 2022 में छुट्टी पर चले गए, जिसके बाद गौरव  यादव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया था. सितंबर में  छुट्टी से लौटने से पहले ही उनका तबादला कर उन्हें पंजाब पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के अध्यक्ष के रूप में तैनात कर दिया  गया था और कार्यभार गौरव यादव को दिया गया था.

वी के भावरा की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है , “जब वर्तमान सरकार ने कार्यभार संभाला, तो याचिकाकर्ता पर डीजीपी (पुलिस बल के प्रमुख) के पद का प्रभार छोड़ने के लिए दबाव डाला गया क्योंकि ऐसा माना जाता था कि वह पिछली सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति था. यह निराधार था क्योंकि याचिकाकर्ता को यूपीएससी  द्वारा आयोजित वैध प्रक्रिया के अनुसरण में नियुक्त किया गया था.”

उनका दावा है कि जून 2022 तक उन पर यह लिखित में देने के लिए दबाव डाला गया कि वह डीजीपी के पद पर बने नहीं रहना चाहते हैं और बाद में लंबी छुट्टी के लिए आवेदन करने के लिए कहा गया. याचिका में कहा गया है कि इसी बिंदु पर उन्होंने जुलाई 2022 में 60 दिनों की छुट्टी का अनुरोध किया था।

याचिका में कहा गया , “कार्यभार संभालने के तुरंत बाद (वर्तमान सरकार द्वारा), याचिकाकर्ता को विभिन्न गैरकानूनी कार्यों में हिस्सा  लेने के लिए कहा जा रहा था, जिसमें विभिन्न सार्वजनिक हस्तियों के खिलाफ मामले दर्ज करना, राज्य से बाहर रह रहे व्यक्तियों को  पंजाब पुलिस की  सुरक्षा मुहैया  कराना  शामिल था, लेकिन याचिकाकर्ता ने ऐसा करने पर  रोक लगा दी और ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल होने  से इनकार कर दिया.